होलिका दहन का ये है शुभ मुहूर्त, इन चीज़ों की दे आहुतियां…

होली पर माँ महामाया मंदिर में निभाई जाएगी दशकों की पुरानी परंपरा

Jiwrakhan lal ushare cggrameen nëws

रायपुर। छत्तीसगढ़ समेत देशभर में होली का त्यौहार बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। होलिका दहन की विधि और पूजन को लेकर भी मुहूर्त और भद्राकाल देखा जाता है। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन इस बार 9 मार्च सोमवार को किया जाएगा। अगले दिन 10 मार्च मंगलवार को होली खेली जाएगी। महामाया मंदिर के पंडित मनोज शुक्ला ने बताया कि कई वर्ष बाद होलिका दहन के समय भद्राकाल की रुकावट नहीं पड़ेगी। बल्कि इस दिन पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र होने के कारण ध्वज योग बन रहा है। जो यश प्रदान करने वाला माना जाता है।

                       होलिका दहन के दिन भद्राकाल सुबह सूर्योदय से आरम्भ होकर दोपहर 1.10 बजे खत्म हो जाएगा। होलिका पूजन का समय भद्रा के बाद दिनभर तक किया जा सकता है। होलिका दहन का शुभ मुहूर्त गोधूलि बेला से आरम्भ होकर पूर्णिमा तिथि की समाप्ति रात 11. 17 बजे तक रहेगी। इसी बीच किसी भी समय होलिका दहन विधि विधान से पूजन करके किया जाना है।

महामाया मंदिर में रात दस बजे दहन
राजधानी रायपुर के अति प्राचीन “श्री महामाया देवी मन्दिर परिसर पुरानी बस्ती रायपुर” में दिनाँक 9/3/2020 दिन सोमवार को रात्रि 10.00 बजे प्राचीन परम्परा के अनुसार मन्दिर के पूजारियों , ट्रष्ट के सदस्यों, कार्यकर्ताओं व उपस्थित श्रद्धालुओं द्वारा होलिका दहन किया जायेगा।
पंडित मनोज शुक्ला ने बताया कि माँ महामाया मन्दिर के गर्भगृह में पिछले कई दशकों से प्रज्ज्वलित अखण्ड ज्योति की विधि विधान से पूजन कर उसी ज्योति की अग्नि को परिसर में ही होलिका दहन स्थल पर सावधानी पूर्वक सुरक्षित लाया जाता है। फिर परम्परानुसार उपस्थित समस्त जन समुदाय के मध्य पूजन सम्पन्न कर होली जलायी जाती है। यहॉ जल रही होलिका की आग को विभिन्न कई साधनों द्वारा आसपास के मोहल्ले वाले ले जाकर अपने क्षेत्र के होलिका को जलाते है।

होलिका दहन की पूजा विधि 
पंडित शुक्ला ने होलिका दहन की पूजन की विस्तृत विधि भी बताई है। होलिका दहन करने से पहले गौरी – गणेश , भगवान नरसिंह व प्रह्लाद की पूजा कर होली की भी पूजा की जाती है। इस पूजा को करते समय पूजा करने वाले व्यक्ति को होलिका के पास जाकर पूर्व या उतर दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए। पूजा करने के लिये निम्न सामग्री को प्रयोग करना चाहिए।
एक लोटा जल, माला, रोली, चावल, गंध, पुष्प, कच्चा सूत, गुड, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे, गुलाल, नारियल आदि का प्रयोग करना चाहिए। इसके अतिरिक्त नई फसल के धान्यों जैसे- पके चने की बालियां व गेंहूं की बालियां भी सामग्री के रुप में रखी जाती है।

होलिका में आहुति देने वाली सामग्रियां
होलिका दहन होने के बाद होलिका में जिन वस्तुओं की आहुति दी जाती है, उसमें कच्चे आम, नारियल, भुट्टे या सप्तधान्य, चीनी के बने खिलौने, नई फसल का कुछ भाग है। होलिका में कपूर व कुछ नग छोटी इलायची जरूर डालें। इससे वातावरण में फैले कीटाणु और जीवाणु मर जाते है।

हाथ में जल, अक्षत, पुष्प आदि लेकर संकल्प करें। 
” ऊँ विष्णु: विष्णु: विष्णु: श्रीमद्भगवतो महापुरुषस्य विष्णोराज्ञया अद्य दिवसे (संवत्सर का नाम लें ) परिधावी नाम संवत्सरे संवत् 2076 फाल्गुन मासे शुभे शुक्लपक्षे पूर्णिमायां शुभ तिथि सोमवासरे , अमुक गोत्र (अपने गोत्र का नाम लें) उत्पन्ना , अमुक शर्माहं (अपने नाम का उच्चारण करें) मम इह जन्मनि जन्मान्तरे वा सर्वपापक्षयपूर्वक दीर्घायुविपुलधनधान्यं शत्रुपराजय मम् दैहिक दैविक भौतिक त्रिविध ताप निवृत्यर्थं सदभीष्टसिद्धयर्थे श्री गणेशाम्बिका प्रह्लादनृसिंहहोली इत्यादीनां पूजनमहं करिष्यते। ”

गणेश जी की पूजा मन्त्र :
गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम्।
उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपमजम्।।
ऊँ गं गणपतये नम: पंचोपचारार्थे गंधाक्षतपुष्पाणि समर्पयामि।
गौरी माता की पूजा मन्त्र :
ऊँ अम्बिकायै नम: पंचोपचारार्थे गंधाक्षतपुष्पाणि सर्मपयामि।।
नरसिंह पूजन मन्त्र :
ऊँ नृसिंहाय नम: पंचोपचारार्थे गंधाक्षतपुष्पाणि समर्पयामि।।
प्रह्लाद पूजन मन्त्र :
ऊँ प्रह्लादाय नम: पंचोपचारार्थे गंधाक्षतपुष्पाणि समर्पयामि।।
होलिका पूजन मंत्र :
अहकूटा भयत्रस्तैः कृता त्वं होलि बालिशैः
अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम्।

इसके बाद होलिका के पास गोबर से बनी ढाल – माला तथा अन्य खिलौने रख दिये जाते है। कच्चे सूत को होलिका के चारों और तीन या सात परिक्रमा करते हुए लपेटना होता है। फिर लोटे का शुद्ध जल व अन्य पूजन की सभी वस्तुओं को एक-एक करके होलिका को समर्पित किया जाता है। कई लोग अपने घर के पास या घर में भी होली जलाते है। सार्वजनिक होली से अग्नि लाकर घर में बनाई गई होली में अग्नि प्रज्जवलित की जाती है। अंत में सभी पुरुष रोली का टीका लगाते है, तथा महिलाएं गीत गाती है तथा बडों का आशिर्वाद लिया जाता है।

निरोगी रहने की मान्यता
सेंक कर लाये गये धान्यों को खाने से निरोगी रहने की मान्यता है। ऎसा माना जाता है कि होली की बची हुई अग्नि और राख को अगले दिन प्रात: घर में लाने से घर को अशुभ शक्तियों से बचाने में सहयोग मिलता है, तथा इस राख का शरीर पर लेपन भी किया जाता है। राख का लेपन करते समय निम्न मंत्र का जाप करना कल्याणकारी रहता है।

“वंदितासि सुरेन्द्रेण ब्रम्हणा शंकरेण च, अतस्त्वं पाहि माँ देवी! भूति भूतिप्रदा भव।”

होलिका पूजन के बाद होलिका दहन
विधिवत रुप से होलिका का पूजन करने के बाद होलिका का दहन किया जाता है। होलिका दहन सदैव भद्रा समय के बाद ही किया जाता है। इसलिये दहन करने से पहले भद्रा का विचार कर लेना चाहिए। ऎसा माना जाता है कि भद्रा समय में होलिका का दहन करने से क्षेत्र विशेष में अशुभ घटनाएं होने की सम्भावना बढ जाती है।

आज के समय में होलिका दहन
आज के समय में वृ्क्षारोपण के महत्व को देखते हुए, होलिका में पेड़ को काटकर लकडियों को जलाने के स्थान पर, पेड़ से सुखकर अपने आप अलग हो चुके लकड़ी को जलाकर अपने मन से आपसी कटुता को जलाने का प्रयास करना चाहिए, जिससे हम सब देश की उन्नति और विकास के लिये एक जुट होकर कार्य कर सकें। गाय के गोबर से बने हुए कण्डे का प्रयोग अधिक मात्रा में करना चाहिये।

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