नारी शिक्षा के जनक राष्ट्रपिता ज्योति राव फुले जयंती 11 अप्रैल

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राष्ट्रपिता ज्योतिराव फूले ने सन 1873 में अंग्रेजों के शासन में शुद्र-अतिशुद्र को अपना विकास करने को कहा,
तब मनुवादियों ने प्रचार किया कि महात्मा फुले देश की अखंडता को तोड़ रहे हैं।
बाबा साहब डॉ. अंबेडकर ने जब 1930 में अछूतों के लिए अधिकार मांगा तब गांधी जी ने कहा कि इससे देश की एकता को खतरा है। मंडल कमीशन ने अन्य पिछड़े वर्ग की 3743 जातियों की पहचान जिनकी संख्या 52% है। लोकतंत्र में बहुमत के आधार पर इन जातियों का शासन होना चाहिए। जब इन जातियों की लिए सरकारी सेवा में आरक्षण की बात आई तब प्रचार किया गया की राष्ट्र की एकता और अखंडता को खतरा है। प्रशासन में हिस्सेदारी, राज्यसत्ता में, अर्थसत्ता में अपनी आवाज होनी चाहिए, यह सब बातें जब-जब आई तब-तब ‘देश की एकता और अखंडता खतरे में है’ यह नारा दिया गया।
वैसे देखा जाए तो देश की एकता और अखंडता को आंतरिक या वाह्य आक्रमण से कोई खतरा नहीं है, लेकिन बहुजन समाज जब अपने अधिकार मांगता है, अपने हिस्सेदारी की बात करता है,जब बराबरी की बात आती है जो भारतीय संविधान में हमने स्वीकार की है। बहुजन समाज के लोग इससे बराबरी के स्टेट्स के दायरे में आ जातेें है,और तब यह बात मनुवादी/ब्राह्मणवादी समाज व्यवस्था, गैर बराबरी की व्यवस्था प्रस्थापित करने वाले लोगों को पसंद नहीं आता है। क्योंकि इससे उनका वर्चस्व खतरे में पड़ जाता है। मगर यह बात छुपाने के लिए ‘राष्ट्रीय एकता को खतरा है’ यह नारा देकर बहुजन समाज के लोगों को गुमराह किया जा रहा है। यह षड़यंत्र जो देश में चल रहा है,…..इस षड़यंत्र को हमें समाज के सामने उजागर करना होगा।
इसलिए राष्ट्रपिता ज्योतिबा फूले के बाद बाबा
साहब ने कहा है…..

शिक्षित बनों,
संगठित रहकर,
संघर्ष करो ।

जय सेवा
जय सतनाम
जय भीम
संविधान….

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