रायपुर : लॉकडाउन: घर-घर सुपोषण के साथ शैक्षणिक परिवेश गढ़ रहा नौनिहालों का भविष्य : डिजीटल माध्यम बन रहा समग्र विकास का आधार

📅21 Apr 2020

रायपुर, 21 अप्रैल 2020 Jiwrakhan lal ushare cggrameen nëws

प्रदेश में कोरोना वायरस के संक्रमण के प्रभाव से नौनिहालों को सुरक्षित रखते हुए उन्हे घर पर ही पोषण और शिक्षा पहुंचा कर भविष्य गढ़ने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने लॉकडाउन का प्रभाव बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य और विकास पर न हो इसकी पूरी व्यवस्था की है। इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं सुरक्षित तौर पर डोर-टू-डोर रेडी-टू-ईट सामग्रियों को उपलब्ध कराने के साथ-साथ डिजिटल तकनीक के माध्यम सें प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख एवं शिक्षा की सेवा दे रही हैं। डिजिटल माध्यम से दी जा रही शिक्षा और घर पर मिल रहा पोषक आहार बच्चों के समग्र विकास का आधार बन रहा है।
दूरस्थ सूरजपुर जिले में भी सभी सुरक्षा मानकों का पालन करने के साथ गांव-गांव में कोरोना संक्रमण से बचाव के प्रति जागरूकता की अलख जगाने का काम आंगनबाडी कार्यकर्ताओं ने बखूबी किया है। लॉकडाउन अवधि में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा शून्य से छह वर्ष के नौनिहालों के समग्र विकास के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख एवं शिक्षा (ईसीसीई) पर आधारित एक अभिनव प्रयास शुरू किया गया है। इसके तहत डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से अभिभावकों तक नौनिहालों के समग्र विकास की सटीक सूचनाएं प्रेषित की जा रही है। 
लॉकडाउन के वजह सें बंद हुए जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में दर्ज 85 हजार नौनिहालों का स्वास्थ्य प्रभावित न हो, इसके लिए पोषण आहार को डोर-टू-डोर पहुंचाया जा रहा है। सूरजपुर जिले की 2002 आंगनबाड़ी केन्द्रों में दर्ज बच्चों, गर्भवती और शिशुवती समेत कुल 97 हजार 995 हितग्राहियों को अप्रैल माह से एक-एक माह का रेडी-टू-ईट फूड घर-घर जाकर वितरण किया जा रहा है। इनमें 6 माह से 6 साल के सामान्य बच्चों की संख्या 41 हजार 270, 6 माह से 6 साल के गंभीर कुपोषित बच्चों की संख्या 5 हजार 95 और 3 वर्ष से 6 साल के सामान्य बच्चों की संख्या 31 हजार 353 और इसी आयु वर्ग के गंभीर कुपोषित बच्चों की संख्या 1 हजार 291 है। इन सभी को पौष्टिक रेडी-टू-ईट उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही 9 हजार 644 गर्भवती महिलाओं और 9 हजार 342 शिशुवती महिलाओं और 271 किशोरी बालिकाओं को भी रेडी-टू-फूड एक-एक माह का प्रदाय किया जा रहा है। कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं द्वारा गंभीर कुपोषित बच्चों के खान-पान पर विशेष ध्यान रखा जा रहा है। इसके साथ सेक्टरवार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सोशल मीडिया समूहों पर नौनिहालों की देख-रेख और प्रारंभिक शिक्षा संबंधित जानकारी परिजानों तक पहुंचा रही है। इससे लॉकडाउन मे घरो पर ही सुरक्षित रहते हुए स्वास्थ्य, सुपोषण और शिक्षा की पहल सार्थक साबित हो रही है।

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