सुप्रीम कोर्ट कह रहा है कि ओबीसी/ एससी / एसटी के सम्पन्न लोग जरूरतमंदों को आरक्षण का लाभ नही लेनें दे रहे हैं

सुप्रीम कोर्ट कह रहा है कि ओबीसी/ एससी / एसटी के सम्पन्न लोग जरूरतमंदों को आरक्षण का लाभ नही लेनें दे रहे हैं । सुप्रीम कोर्ट वही कह रहा है जो कई सालो से आरक्षण विरोधियो द्वारा यह शगूफा छेड़ा जा रहा है की आरक्षण का लाभ केवल कुछ लोग ही ले रहे हैं बाकी के अनुसूचित गरीब ही रह गए और उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा है ।

मैं आपको ओबीसी और एसटी का नही सिर्फ दलितो का उदहारण देके यंहा समझाऊंगा, वे कह रहे हैं कि आरक्षण का लाभ केवल सम्पन्न दलित ही ले रहा है बाकी के गरीब दलित गरीब ही रह गए ।वे ऐसा दर्शना चाहते हैं की वे गरीब दलितों के कितने बड़े हितेषी है की गरीब दलित को यह बता रहे हैं की वे गरीब है तो अमीर दलित के कारण वरना सवर्ण अब तक उन्हें भी आरक्षण का लाभ दे दिए होते ।

दरसल ऐसा अज्ञानता भरा और भ्रमित प्रचार वे धूर्त लोग कर रहे हैं जो सैकड़ो सालो से दलितों के साथ अमानवीय व्यवहार करते रहे हैं और उनका आर्थिक और सामजिक शोषण कर उन्हें फ्री के गुलाम बनाये रखे हुए थे ।सुप्रीम कोर्ट में भी ऐसे लोग है इसमें कोई आश्चर्य नही।

आज जब आरक्षण से दलित मुख्य धारा में आ रहा है और गुलामी की जंजीरे तोड़ शोषकों के समकक्ष आ खड़ा हो रहा है तो शोषक वर्ग बेचैन है की करे तो क्या करें …जा कल तक उनके गुलाम थे ‘जूते साफ़ करते थे’आज उन्ही को सलाम करना पड़ रहा है ।ऐसे में शोषकों में बेचैनी लाज़मी है ।

अतः वे नई नई चालो से लोगो को आरक्षण के खिलाफ करते रहते हैं , कभी यह कहते हैं की दलितों को मिला आरक्षण केवल 10 साल के लिए था तो कभी यह कह के लोगो में रोष भरते हैं की आरक्षण गरीबी के आधार पर होना चाहिए और अमीर दलित गरीब दलित का हक़ मार रहा है ।यह धूर्तो की चाल है ताकि स्वयं दलित ही दलित के विरुद्ध हो जाए और आरक्षण ख़त्म करने की मांग करने लगे।दरसल, दलितों को मिला आरक्षण अमीरी या गरीबी के आधार पर नहीं दिया गया है । इसका अमीरी और गरीबी से कोई लेना देना नहीं है और न ही यह गरीबी मिटाने का ही उपाय है ।

दलितों के मिले आरक्षण को हम ‘ प्रतिनिधित्व का अधिकार ‘ कह सकते हैं ।जैसे की एक-दो साल पहले की एक चर्चित घटना आपको याद होगी ? उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर की 84 सीट्स में से 83 सीट्स केवल चौबे, दुबे, उपाध्याय , तिवारी जैसे सरनेम वालो से भर दी गई ।बाकी सभी जातियो को पीछे कर दिया गया। जबकि आरक्षण लागू है, उसके बाद भी ऐसा हुआ । यदि आरक्षण न होता तो एक सीट भी नही मिलती दूसरी जाति को ।

चुकी दलित जिन्हें आर्थिक ,सामजिक रूप से हासिये पर रखा गया था , उनका हक़ मारा गया था वे समाज की मुख्य धारा से कटे हुए थे ।अत:संविधान में ऐसी व्यवस्था की गई की जो अछूत और दलित है ,शोषित हैं वंचित हैं उनकी भी भागीदारी मुख्य धारा में हो । समाज के निर्माण में वंचितो की भी समुचित भागीदारी हो ।इसलिए ,सरकारी उपक्रमो जैसे राजनैतिक,प्रशासनिक सेवाओ आदि में उनकी भी भागीदारी सुनिश्चित हो ताकि जब जनकल्याण की योजनाये बनाई जाये तो समाज के हर वर्ग का प्रतिनिधित्व हो ।

आरक्षण का लाभ लेने के लिए सरकार द्वारा जो निर्धारित योग्यता तय की गई होती है उसे पास करने के बाद ही आरक्षण का लाभ मिलता है , अन्यथा सिर्फ अनुसूचित होने भर से किसी को लाभ मिल जाये ऐसा नही होता।

आप लोग एक उदहारण से समझिये-अब अगर संयुक्त राष्ट्र मे भारत के प्रतिनिधित्व के लिये एक पोस्ट निकलती है, तो इस बात फर्क नहीं पड़ता की भारत से चुना जाने वाला व्यक्ति अमीर है या गरीब।लेकिन उसका भारतीय होना सबसे जरूरी है।साथ ही ये भी समझने की कोशिश करें की संयुक्त राष्ट्र ने एक जॉब इसलिये नहीं निकाली थी की उसे किसी एक भारतीय की गरीबी इस जॉब से मिटानी है, बल्कि इसलिये निकाली ताकि कोई एक चुना हुआ व्यक्ति भारत की आवाज संयुक्त राष्ट्र मे रख सके। अब यदि एक व्यक्ति संयुक्त राष्ट्र के निर्धारित किये गए मापदंडों को क्रैक करता है तो बाकी के भारतीय क्या यह कह सकते हैं कि चुना गया भारतीय बाकी भारतीयों को आगे नही बढ़ने दे रहा है ? यही बात भारत मे आरक्षण के मामले मे है।

सरकारी स्कूल्स की हालत आप लोग देखते ही है कैसी पढाई होती है वंहा ।चूकिं गरीब होने के कारण अधितर दलित के बच्चे सरकारी स्कूल्स में ही पढ़ते है इसलिए सरकारी स्कूल्स का शिक्षा का स्तर गिरा दिया जाता है । अध्यापक पढ़ाना ही छोड़ देते हैं , रिजल्ट ख़राब कर देते है ताकि दलित का बच्चा पढ़ के आरक्षण का लाभ न ले सके । अब जो दलित नौकरी पा गए हैं वे आर्थिक रूप से थोड़ा सही हो जाता है , वे अपने बच्चों को प्राइवेट पढ़ा लेते है , ट्यूशन पढा लेते हैं, अच्छी शिक्षा दिला के आरक्षण के काबिल बना लेते हैं ।जबकि गरीब दलित का बच्चा ऐसा नही कर पाता । गरीब दलित का बच्चा भी आरक्षण का लाभ ले सके इसलिए सरकार कई योजनाये चलाती है जैसे वजीफ़ा, कम फीस , कॉपी किताबे आदि सुविधाएं देती हैं किन्तु अभी भी निचले स्तर पर शोषक शक्तियां अपना वर्चस्व जमाये हुए हैं और वे गरीब दलित बच्चों को उन सुविधाओ का लाभ ही पहुँचने ही नही देती , जिस कारण गरीब बच्चा पीछे रह जाता है।

यदि गरीब दलित का बच्चा जैसे तैसे पढ़ भी जाये तो अधिकतर संस्थाओं जैसे डॉक्टर, इंजीनियर आदि की फीस ही इतनी कर दी है कि गरीब दलित अपने बच्चे को ऐडमिशन ही नही दिला पाता ।कैसे बनेगा गरीब दलित का बच्चा डॉक्टर इंजीनियर?

कुछ वर्ष पहले upsc के एग्जाम में आर्थिक रूप से सम्पन्न दलित टीना डाबी भी पास हुई और दिल्ली के झोपड़पट्टी में रहने वाला बेहद गरीब दलित संदीप भी , दोनों ने आरक्षण का लाभ लिया क्यों की दोनों ने परीक्षा पास की तब ऐसे में अमीर दलित गरीब दलित को आरक्षण का लाभ कैसे नही लेने दे रहा है ? जबकि अभी तक अनुसूचित जाति का 15% कोटा ही पूरा नही हुआ है ,उसे भरने की वजाय आरक्षण विरोधी धूर्त कह रहे हैं कि सम्पन्न दलित गरीब दलित को आरक्षण का लाभ नही लेने दे रहा है।

-संजय

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