बचपन की सुनहरी यादो मे शामिल रहेगा चकमक अभियान डीजिटल प्लेटफार्म के जरिये दिखाई जा रही है शिक्षाप्रद फिल्में


बैकुंठपुर, (कोरिया) मई 06,
कोरोना वायरस महामारी के दौरान बच्चों और अभिभावकों को तनाव और चिंता से दूर रखने का एक प्रयास है चकमक अभियान| यह अभियान छोटे बच्चों की कला निखारना है| इस अभियान के माध्यम से बच्चों का विश्वास व हौसला भी बढ़ रहा है।
जिले में लॉकडाउन के दौरान नन्हें बच्चों को इस अभियान के तहत अभिभावक व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मोबाईल से रूचिकर वीडियो दिखा रहे हैं और उल्लास से भरे बच्चे सीख रहे हैं।आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के समग्र विकास के लिए चकमक अभियान और सजग कार्यक्रम बच्चो की प्रतिभा निखारने के लिए किया जा हैं। बचपन की सुनहरी यादो मे शामिल रहेगा चकमक अभियान क्योंकि इसमें विभिन्न प्रकार की छत्तीसगढ़ी कविताएं एवं गीत जैसे घोड़ा नाचे हाथी नाचे, मोटर गाड़ी आवत हे, बिल्ला और बूढ़ी नानी, हाथी ददा कहा ले आथस एनिमेशन में बनाई गई हैं।अभिभावकों से भी यह आग्रह किया गया है कि वह अपने बचपन के जीवन की सुखद यादें बच्चों के साथ साझा करें, जो जीवन में मुस्कान लाती है। यह अभियान महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा चलाया जा रहा है|
जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज खलखो ने बताया: “लॉकडाउन अवधि में बच्चों का समग्र विकास हो सके इस हेतु शासन ने प्रत्येक सप्ताह की समय सारिणी बनाई है जिसमे दूसरे सप्ताह में,कागज से सूर्य औा पृथ्वी बनाना, चित्र के माध्यम से पानी का महत्व बताना,पशु पक्षियो के चित्र, कागज के जहात,बाल गीत, सौर मंडल,क्राफट जैसी अन्य चीजों पर केन्द्रित है। पालकों के द्वारा करवाई जा रही इन गतिविधियों को कार्यकर्ताओं के सहयोग से फेसबुक या वाट्सएप में भेजी जा रही है जिससे बच्चों को अपनी प्रतिभा को निखारने के भरपूर अवसर मिल रहा है।“
पर्यवेक्षक प्रकृति भट्ट ने बताया: “वर्तमान मे सजग अभियान के माध्यम से बच्चो एवं अभिभावको को प्रेरित कर बच्चों के अपनापन, स्नेह, दुलार सहहृदयता जगा कर उनमे कोरोना से उपजे तनाव एवं विचलन को सामान्य किया जा रहा है, ताकि बच्चों की सारी दुनिया अभिभावकों मे समाहित हो सके।‘’
उन्होने बताया सजग अभियान के तहत बच्चों को वाल पेंटिग, अनौपचारिक शिक्षा और राज्य शासन द्वारा तैयार की गई फिल्म दिखाई जा रही है। बच्चो के आकर्षक विडियो पर आधारित छत्तीसगढ़ी बाल गीत तथा अन्य गतिविधियां आंगनबाडी कार्यकर्ता के माध्यम से करायी जा रही है, जो बच्चों को आकर्षित कर रही है।“
आंगनबाडी कार्यकताओं द्वारा बच्चों एवं अभिभावको को सोशल डिस्टेंश का पालन करने और सेनेटाईजन का उपयोग करते हुए बार-बार हाथ धोने तथा मास्क लगाने की शिक्षा दी जा रही है। ऐसे अभिभावक जिनके पास एन्ड्राइड फोन नही है उन्हे गृह भेंट के दौरान मोबाईल के माध्यम से बच्चो के सामने विभिन्न गतिविधियो का प्रदर्शन किया जा रहा है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता प्रतिदिन अलग अलग परिवारों में जाकर जानकारी देते हुए पालकों को प्रेरित कर रहीं हैं।

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