बागनदी बार्डर पर मजदूरों का रेला…

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राजनांदगांव। लॉक डाउन के दौरान जिस तरह से छत्तीसगढ़
महाराष्ट्र की सीमा बागनदी में हजारों की संख्या में श्रमिकों का रेला रोज पहुंच रहा है, उसको देखते हुए कोरोना को लेकर और भयावह स्थिति नजर आ रही है। एक तरफ महाराष्ट्र सरकार हर रोज श्रमिकों को बागनदी सीमा तक भेज रही है, वहीं जिला प्रशासन श्रमिकों को उनके गृह ग्राम भेजने के लिए अलग- अलग वाहनों से व्यवस्था करने में जुटा हुआ है।
लॉक डाउन के बीच जैसे ही श्रमिकों को गृह ग्राम भेजे जाने का निर्णय हुआ, महाराष्ट्र सहित तेलंगाना, आंध्रप्रदेश जैसे राज्यों से बड़ी संख्या में श्रमिकों का आना- जाना शुरू हो गया। अभी तक श्रमिकों को लेकर दो ट्रेन भी राजनांदगांव पहुंच चुकी हैं। जिसमें करीब 300 श्रमिक राजनांदगांव आ चुके हैं। इन्हें क्वारेंटाइन में रखा गया है। राजनांदगांव से महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश की सीमा लगने के कारण रोज हजारों की संख्या में बागनदी और साल्हेवारा से श्रमिकों का रेला पहुंच रहा है। एक आंकड़े के मुताबिक बागनदी बार्डर से ही अब तक 50 हजार लोग जिले की सीमा में प्रवेश कर चुके हैं। दो दिनों से हजारों की संख्या में श्रमिक बागनदी पहुंच रहे है। हमारे प्रतिनिधि द्वारा जब बागनदी बार्डर का दौरा किया गया तो यहां का दृश्य डराने वाला था। महाराष्ट्र सरकार ने अलग- अलग ढाई सौ बड़े वाहनों में श्रमिकों को बागनदी तक भेजा है। बागनदी के बाद श्रमिकों को पुलिस और प्रशासन स्थानीय स्तर पर वाहन की व्यवस्था करते हुए उनके गंतव्य के लिए रवाना कर रहा है। पुलिस विभाग ने निजी वाहनों के अलावा विभागीय 12 वाहन लगाये हैं। इसके अलावा ट्रकों से भी बड़ी संख्या में मजदूर जा रहे हैं। इस बीच जो मजदूर बागनदी पहुंच रहे हैं, उनका स्वास्थ्य परीक्षण भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा कराया जा रहा है। लेकिन मजदूरों की हजारों की भीड़ चिंता का सबब बन रहा है।
न मास्क, न डिस्टेंस
बागनदी बार्डर पर सर्वाधिक परेशान करने वाली बात यह रही कि यहां पर श्रमिक तो हजारों की संख्या में उपस्थित थे लेकिन उनके पास न तो मास्क था और न ही सोशल डिस्टेंस का पालन होना संभव दिख रहा था।
छोटे बच्चे भूखे प्यासे, गर्भवती महिला ने किया सैकड़ों मील का सफर
इस भीषण गर्मी में कई दृश्य दिल दहला देने वाले थे। छोटे- छोटे बच्चे जिन्हें कोरोना जैसी बीमारी के बारे में कुछ नहीं मालूम, न चाहते हुए भी भूखे प्यासे रहकर तपती धूप में चलने मजबूर थे। आठ माह की गर्भवती महिला ने भी सैकड़ों मील का सफर पैदल तय किया। बागनदी पहुंचने पर उसे मेडिकल सुविधा की जरूरत महसूस हो रही थी, फिर भी चलने की मजबूरी के सामने सब कुछ बेकार थी।
साढ़े तीन हजार देकर पहुंचे मजदूर
बागनदी बार्डर पर हमारे प्रतिनिधि से चर्चा करते हुए बिलासपुर के मुकेश ने बताया कि उनके द्वारा कई श्रमिक एक साथ मिलकर किराये की बस कर बागनदी पहुंचे हैं। मालिक द्वारा प्रति यात्री के हिसाब से 35 सौ रुपए लिये गए। अब आगे कैसे जाएंगे, यह पता नहीं है। राजनांदगांव से आगे जाने के लिए कई बस मालिक 250 रुपए प्रति व्यक्ति किराया मांग रहे हैं। सोनेश कुमार ने बताया कि उनके बच्चे भूखे- प्यासे हैं। श्रमिकों को कोई सुविधाएं नहीं मिल रही है। जिसके कारण इस गर्मी में यात्रा करना और कठिन हो रहा है।
जो साधन मिला उसी में लदने को मजबूर
बागनदी सीमा पर हाल यह है कि प्रशासन सभी श्रमिकों को सुरक्षित पहुंचाने में लगा हुआ है। लेकिन वाहनों की कमी के कारण हालत यह है कि जो भी वाहन मिला उसी में श्रमिक यात्रा कर रहे हैं।
चाय-नाश्ता तक नसीब नहीं
तपती दोपहरी में महाराष्ट्र के अलग- अलग जिलों से पहुंचे श्रमिकों की सबसे बड़ी समस्या यह भी है कि भूख प्यास लगने पर खाने पीने की सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। लाक डाउन के कारण होटल बंद हैं। चाय- नाश्ता भी समय पर नसीब नहीं हो पा रहा है। इस तरह से श्रमिक घर पहुंचने से पहले पूरी तरह से बेहाल हो गए हैं। सर्वाधिक खराब हालत साथ में चल रहे नौनिहालों और महिलाओं की है। जिनके पैरों में सूजन आ जाने के कारण चलना भी मुश्किल हो गया है। बागनदी में गांव वाले भी कोरोना के डर से सहारा देने तैयार नहीं हैं।

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