भारत में कोरोना संक्रमण के तीन तरह के मरीज , अलग-अलग तीन तरीके से फैल रहा है कोरोना का संक्रमण, जानें तीनों प्रकार के कोरोना के क्या है लक्षण ? एम्स दिल्ली के निर्देशक डॉ. गुलेरिया की सलाह – लोगों को अब और भी ज्यादा सतर्क होने की जरूरत क्योंकि खुल गया है लॉकडाउन

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दिल्ली वेब डेस्क / अब विदेशों की तर्ज पर भारत में भीकोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से फ़ैल रहा रहा है | भारत संक्रमण के मामले पूरी दुनिया के टॉप 5 देशों में शामिल हो गया है | हालांकि अब भी देश में संक्रमण का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा हैं | ताजा जानकारी के मुताबिक गुरुवार शाम तक भारत में कोरोना के मरीजों का आंकड़ा 2 लाख 86 हजार पार हो चूका था | देश में इस जानलेवा बीमारी की चपेट में आकर अब तक 8000 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है | केस स्टडी से पता चलता है कि कोरोना वायरस की रोकथाम में सबसे बड़ी चुनौती संक्रमित लोगों की पहचान करना है | डॉक्टर बताते है कि जहां कुछ मरीजों में कोरोना संक्रमण के स्पष्ट लक्षण नजर आ जाते हैं, वहीं कुछ लोगों में संक्रमित होने के बाद भी कोई लक्षण नजर नहीं आते | इसके चलते अंतिम विकल्प उनके मेडिकल टेस्ट के आधार पर ही फैसला लेना होता है |

फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टिट्यूट, गुरुग्राम में न्यूरोलॉजी के डायरेक्टर डॉ. प्रवीण गुप्ता के मुताबिक कोरोना वायरस का संक्रमण भारत में तीन तरह से हो रहा है | इसमें पहले मरीज एसिम्प्टमैटिक, दूसरे प्रिसिम्प्टमैटिक और तीसरे सिम्प्टमैटिक है | उनके मुताबिक एसिम्प्टमैटिक मामले वे हैं जिनमें कोरोना वायरस का संक्रमण तो है लेकिन उनमें किसी तरह के लक्षण नजर नहीं आते हैं यानी उनमें खांसी, बुखार और सांस लेने में तकलीफ जैसी कोई समस्या नहीं होती है | जबकि प्रिसिम्टमैटिक मामले में संक्रमण होने के कुछ दिनों बाद लक्षण नजर आते हैं | वहीं, सिम्प्टमैटिक केस वे हैं जिनमें संक्रमित शख्स में बुखार, बहती नाक, खांसी जैसे लक्षण नजर आते हैं |

डॉ. प्रवीण गुप्ता ने बताया कि शुरुआती दौर में कहा जा रहा था कि बिना लक्षण वाले कोरोना संक्रमित तेजी से वायरस को फैला सकते हैं | लेकिन असल में ये लोग एसिम्प्टमैटिक ना होकर प्रिसिम्प्टमैटिक होते हैं या फिर ऐसे वाहक होते हैं जिनमें बदन दर्द जैसे हल्के लक्षण ही नजर आते हैं | उन्होंने कहा, कि प्रिसिम्प्टमैटिक लोगों में लक्षण दिखने से 48 घंटे पहले से ही वायरस फैलना शुरू हो जाता है | उनके मुताबिक ऐसे लोग खतरनाक होते हैं क्योंकि उनमें लक्षण नहीं होते हैं और वे किसी तरह की सावधानी भी नहीं बरतते हैं | उन्होंने बताया कि प्रिसिम्टमैटिक लोगों से कोरोना वायरस फैलने का खतरा सबसे ज्यादा है | यूएस सेंटर्स ऑफ डिसीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन ने भी अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि प्री सिम्प्टोमैटिक के 40 प्रतिशत मरीज अस्वस्थ महसूस करने से पहले ही संक्रमण फैलाना शुरू कर देते हैं |

भारत के विभिन्न इलाकों में सामने आ रहे संक्रमित मरीजों को लेकर गंगाराम हॉस्पिटल में इम्यूनोलॉजी ऐंड माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट के चेयरमैन डॉ. चंद वत्तल का भी अपना तर्क है | वो बताते है कि बिना लक्षण वाले कोरोना संक्रमण के मामलों को लेकर डॉक्टरों को ज्यादा गंभीर होने की जरूरत है | उनके मुताबिक ऐसे मरीजों को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन को भी बयान देने से पहले ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए | उनके मुताबिक किसी भी नतीजे पर पहुंचने के लिए हमें सबूतों की जरूरत है | उन्होंने बताया कि अभी तक जो भी स्टडीज आई हैं, वे ज्यादातर ऑनलाइन स्टडीज हैं | इनकी किस्म निर्धारित करने से पूर्व गहन रिसर्च की जरूरत है |

डॉ. वत्तल ने कहा, कि हमारे देश में एसिम्प्टमैटिक मामलों को गंभीरता से लेने की जरूरत है , क्योंकि हमें उनके कॉन्टैक्ट के बारे में भी जानकारी नहीं होती है | डॉ. वत्तल ने कहा, कि भारत में लोकल ट्रांसमिशन है | यही वजह है कि हमने हॉटस्पॉट और कंटेनमेंट जोन बनाए हैं | ये भी एक तथ्य है कि कोरोना संक्रमण का प्राथमिक स्रोत एसिम्टमैटिक या बिना लक्षण वाले लोग नहीं हैं |

उधर कई डॉक्टर और रिसर्चर भारत के टेस्टिंग सिस्टम पर भी सवाल उठा रहे है | उनके मुताबिक ICMR की पहली गाइडलाइन्स के तहत सिर्फ लक्षण वाले संदिग्ध लोग ही कोरोना वायरस का टेस्ट करा सकते हैं | जबकि 18 मई के जारी एक और गाइडलाइन में कहा गया कि, ‘हाई रिस्क एसिम्प्टमैटिक और कोरोना वायरस के सीधे संपर्क में आने वाले लोगों के भी टेस्ट किए जाने चाहिए |’ जानकारों की दलील है कि भारत के विशेषज्ञों की राय पर ICMR को अब अपनी टेस्टिंग रणनीति संशोधित करनी चाहिए | उसे नई बातों को ध्यान में रखते हुए ज्यादा टेस्टिंग पर जोर देना चाहिए |

उधर ICMR के रिसर्च टास्क के सदस्य और PHFI में महामारी विज्ञान के प्रमुख प्रोफेसर गिरिधर बाबू के मुताबिक कई प्रमाण स्पष्ट रूप से ये संकेत दे रहे हैं कि एसिम्प्टमैटिक लोग भी कोरोना वायरस फैला सकते हैं | हालांकि केवल 10 फीसदी एसिम्प्टमैटिक लोगों में इसके लक्षण आ सकते हैं |

जबकि प्रसिद्ध पल्मोनोलॉजिस्ट और एम्स के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया की दलील है कि हम लोगों को अब यह सोच कर चलना चाहिए कि हम जिस किसी से भी मिलते हैं वो एसिम्प्टमैटिक पॉजिटिव है | उनके मुताबिक आज दिल्ली या कई अन्य शहरों में ऐसी ही स्थिति है | बाजार, अस्पताल या कहीं भी घूमने जा रहे हैं तो ये याद रखें कि आपके आस-पास कोई भी एसिम्प्टमैटिक व्यक्ति हो सकता है | उनके मुताबिक अब लॉकडाउन खुल रहा है तो लोगों को जरूरी हो जाता है कि वे और सतर्क हो |