इंकोफ्रेंडली पंचगव्य मूतियां बना रही स्वसहायता समूह की महिलाएं बिहान योजनान्तर्गत ,जिला पंचायत की अभिनव पहल


सूरजपुर 24 अगस्त 2020 जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्युज
वर्तमान समय में कोरोना वायरस महामारी संक्रमण से बचाव एवं सुरक्षा के कई तरीके अपनाये जा रहे है और शासन समय-समय पर एडवायजरी जारी कर लोगों को सुरक्षा प्रदान करने के साथ सचेत भी कर रही हैं।
जिला पंचायत सूरजपुर की अभिनव पहल पर बिहान योजनान्तर्गत स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से पंचगव्य की गणेश मूर्तियॉ निर्मित की गई जिससे महिलाओं को पैसा तो मिला ही, उन्हें आत्मनिर्भर होने की सीख भी मिल रही है|
यह पहल कलेक्टर श्री रणबीर शर्मा व मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री आकाश छिकारा के द्वारा की गयी है|
इसकी जानकारी देते हुए बिहान जिला कार्यक्रम प्रबंधक मनीष सिन्हा ने बताया महिलाओं को नवाचार के माध्यम से जिला प्रशासन के द्वारा स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है, जिससे ग्रामीण जीवन सशक्तिकरण की ओर अग्रसर हुआ है, वहीं पर्यावरण सहित मानव हित के लिए भी जिला प्रशासन सूरजपुर प्रतिबद्ध होकर कार्य कर रहा है। शासन के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए 10 इंच आकार की आकर्षक गणेश मूर्तिया बनाई गई । इसके अलावा गोबर से निर्मित दीपक, शुभ लाभ, ॐ स्वास्तिक का निर्माण जिले के विकासखंड सूरजपुर व रामानुजनगर के महिला समूहों के माध्यम से कराया जा रहा है।
शक्ति महिला ग्राम संगठन, कमलपुर की संगीता पैकरा ने बताया मूर्तियॉ निर्माण का कार्य सुखद रहा ,ऐसा लगा विघ्नहर्ता गणेश ने हमारे सारे कष्टों का हरण करने का स्वयं ही बीडा उठा लिया हो पंचगव्य मूर्तियों में जिसमें गोबर, गोमूत्र, दूध, घी एवं दही शामिल है। यह मूर्ति पानी में घूल कर पंचगव्य खाद का रूप ले लेगी जिसका उपयोग घर के गार्डन या बाड़ी में किया जा सकता हैं।
मूर्तियाँ बनाते समय न केवल पर्यावरण को ध्यान में रखा गया बल्कि सरकारी नियमों का भी पालन किया गया|
शिवम महिला स्वयं सहायता समूह दवना की नंदिनी ने बताया गणेश की मूर्तियॉ निर्माण करते समय उनके समूह की महिलाओ को स्वयं के सशक्तिकरण का भी आभास भी होता है| “ हम लोग आत्मनिर्भर होना सीख रहे है। पंचगव्य मुर्तियों को विसर्जन के लिए घरों से बाहर निकलना नही पडेंगा। मूर्तियों का विसर्जन घर पर ही बाल्टी या टब में किया जा सकता हैं।‘’
पंचगव्य से निर्मित मूर्तियॉ शास्त्रों के अनुसार अधिक महत्व रखती हैं तथा पर्यावरण के लिए भी उत्तम मानी जाती हैं। शास्त्रों मे गोबर से बनी मूर्तियों का विशेष स्थान हैं, इसी कारण गोबर से गौरी-गणेश की मूर्तिया काफी लोकप्रिय हो रही हैं।