जगदलपुर : आदिवासी संस्कृति का संरक्षण-संवर्धन करना हम सबकी जवाबदारी-श्री लखेश्वर बघेल

बस्तरसंभागसांस्कृतिकविभिन्नपर्यटनस्थल

पर्यावरणक्षेत्रमेंअलगपहचानहैःविक्रममण्ड़ावी

विशालआदिवासीसमृद्धसंस्कृतियोंकेसंरक्षणहेतुअभिलेखीकरणपरकियागयाचर्चा

जगदलपुर 31 अगस्त 2020 जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्युज

बस्तर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री लखेश्वर बघेल ने कहाकि आदिवासी समाज की संस्कृति का संरक्षण-संवर्धन करनाहम सब लोगों की जवाबदारी है। प्राधिकरण का गठन बस्तरक्षेत्र के विकास हेतु किया गया है। इसमें सांस्कृतिक-पुरातात्विक धरोहरों का संरक्षण-संवर्धन का कार्य किया जानाहै। बस्तर संभाग में जनजाति बाहुल्य जनसंख्या निवास करतीहैं। क्षेत्र में आदिवासी की 44 जाति है जिन पर कई लेखकों नेउनकी संस्कृति, त्यौहार, भाषा-बोली, गीत-संगीत, लोक नृत्यआदि विषयों पर कई लेख लिखे है उन धरोहरों को संरक्षितकरने का कार्य प्राधिकरण द्वारा किया जाएगा। श्री बघेलसोमवार को कमिश्नर कार्यालय के सभाकक्ष में संभाग के सभीजिलों से आदिवासी संस्कृति से संबंधित साहित्यकार, काव्यरचनाकार, आदिवासी संस्कृति के संरक्षक व सामाजिकप्रतिनिधियों से आदिवासी समृद्ध संस्कृतियों के संरक्षण हेतुअभिलेखीकरण के लिए बैठक में चर्चा कर रहे थे।

श्री बघेल ने कहा कि आदिवासी संस्कृति, परम्परा को संरक्षितकरने के लिए जिला स्तर में सामाजिक नीति-रीति के संबंध मेंबैठक करने की जरूरत है। जिससे इसके जानकार लोगों कीसुझाव मिल सके। इस संभाग स्तरीय बैठक में विभिन्न  विषय-विशेषज्ञों द्वारा दिए गए सुझाव पर अगामी दिनों में कार्य कियाजाएगा। उन्होंने आगे कहा कि स्थानीय बोली में छपी पुस्तकें,आदिवासी संस्कृति से संबंधित पुस्तकों को अध्ययन हेतुजिला व ब्लाॅक स्तर पर रखा जाएगा। अपनी संस्कृति कापहचान को आगे ले जाने के लिए नए जनरेशन को अवगतकराना होगा और संस्कृति का संरक्षण-संवर्धन करना होगा।

बस्तर प्राधिकरण के उपाध्यक्ष श्री विक्रम मण्ड़ावी ने कहा किबस्तर संभाग सांस्कृतिक, विभिन्न पर्यटन स्थल व पर्यावरणक्षेत्र के रूप में अलग पहचान बनाएं हुए है। बस्तर की यहपहचान कुछ क्षेत्र तक ही सीमित नहीं होना चाहिए आदिवासीसंस्कृति अपने आप में समृद्ध है। इसकी जानकारी देने के लिएएक माध्यम होना आवश्यक है जो कि बस्तर क्षेत्र के संस्कृति,त्यौहारों, लोक-नृत्य, गीत, भाषा-बोली, व सामाजिकपरम्पराओं को बताए। आदिवासी संस्कृति के संरक्षण-संवर्धनहेतु प्राधिकरण के माध्यम से बैठक किया इसी प्रकार जिलास्तर पर भी बैठक करने की जरूरत है। श्री मण्ड़ावी ने बैठकमें बस्तर संभाग के प्रवेश स्थलों पर सांस्कृतिक पहचान दिलानेवाले प्रवेश द्वार बनाने की प्रस्ताव दिए। बस्तर की समृद्धसंस्कृति से नए जनरेशन को जोड़ने लिए स्कूलों और काॅलेजोंमें संस्कृति से संबंधित पुस्तकों की उपलब्ध कराने कहा। साथही मेला, बाजार में जन भागीदारी अधिक होती है इन जगहों मेंसांस्कृतिक प्रचार-प्रसार भी का कार्य किया जाए।
इस अवसर पर कमिश्नर श्री अमृत कुमार खलखो ने कहा किबस्तर संभाग में केशकाल घाटी के ऊपर से एक अलगसंस्कृति भाषा-बोली, रहन-सहन का अनुभव किया जा सकताहै। इस क्षेत्र की संस्कृति को समझना हो तो बस्तर केसाप्ताहिक बाजार का अवलोकन करना चाहिए। माननीयमुख्यमंत्री के द्वारा बस्तर क्षेत्र के विकास आदिवासी संस्कृतिके संरक्षण एवं संवर्धन हेतु संग्रहालय निर्माण की अनुमति दीगई। परीचर्चा में डिप्टी कलेक्टर बीएस सिदार, सुकमा,बीजापुर, नारायणपुर, बस्तर, दन्तेवाड़ा, कोण्डागांव, कांकेरजिलों के सहायक आयुक्त व आदिवासी संस्कृति औरसामाजिक प्रबुद्ध जन उपस्थित थे। सातों जिलों से पधारे हुएआदिवासी संस्कृति से संबंधित साहित्यकार, काव्य रचनाकार,आदिवासी संस्कृति के संरक्षक व सामाजिक क्षेत्र के प्रबुद्धजन द्वारा आदिवासी समृद्ध संस्कृतियों के संरक्षण हेतुअभिलेखीकरण पर अपने सुझाव प्रस्तुत किए।