4 सितंबर विश्व यौन स्वास्थ्य दिवस कोविड-19 के समय भी यौन स्वास्थ्य के प्रति समाज में जागरुकता जरुरी


रायपुर, 4 सितंबर 2020। 4 सितंबर को विश्व यौन स्वास्थ्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। विश्व यौन स्वास्थ्य दिवस दुनिया भर में यौन स्वास्थ्य के बारे में अधिक से अधिक सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देने का एक प्रयास है। यौन स्वास्थ्य को सकारात्मक रूप से देखने के लिए कामुकता और यौन संबंधों के लिए सकारात्मक और सम्मानजनक दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड-19 महामारी की वजह से विश्व यौन स्वास्थ्य दिवस -2020 का थीम “ कोविड-19 के समय में यौन आनंद ” विषय पर आधारित रखा है।
विभिन्न यौन गतिविधियों से संबंधित सामान्य लोगों के बीच में मिथक व जागरुकता के अभाव में हमेशा यौन स्वास्थ्य में गिरावट एक खतरनाक संकेत है। मनोचिकित्सक डॉ. सुचीता गोयल का कहना है समाज में यौन स्वास्थ्य के प्रति गलत धारणाओं की वजह से लोग मानसिक रुप से तनाव से जुझते रहते हैं। तनावग्रस्त लोगों में अवसाद अधिक होने पर वे आत्महत्या जैसे कदम भी उठा लेते हैं। डॉ. गोयल कहती हैं, यौन संबधित किसी भी तरह के मानसिक विकार उत्पन्न होने पर मनोचिकित्सक से सलाह लेने की बहुत जरुरत होती है। कोविड-19 से बचाव के लिए शारीरिक दूरी बनाए रखने को लेकर सावधानी बरतनी जरुरी है। क्योंकि COVID-19 एक श्वसन संबंधी रोग है, इसलिए लार के साथ सीधा हमारा संपर्क होता है।
मनोरोग चिकित्सक डॉ. गोयल का कहना है पुरुष ज्यादा समय घर से बाहर नौकरी सहित व्यवसाय के संबंध में कई लोगों के संपर्क में आते हैं। ऐसे में जब वापस घर आते हैं तो अपने पाटर्नर से यौन संबंध बनाने के लिए मास्क व कंडोम का उपयोग कर सावधानियां बनाए रख सकते हैं। कोरोना वायरस सांसों के जरिये मुख से संक्रमण फैला सकता है। अपने साथी के साथ कोविड-19 के बारे में बात करें, पिछले 10 दिनों में बुखार, खांसी के लक्षण होने जैसे जोखिम का आकलन करें। घर के बाहर किसी के साथ भी सेक्स सहित निकट संपर्क को कम करना चाहिए।
मनोरोग चिकित्सक डॉ. गोयल बताती हैं, यौन रोगों में धातु सिंड्रोम भारतीय उपमहाद्वीप की संस्कृतियों में पाई जाने वाली एक सामान्य स्थिति है। इसमें पुरुष रोगी थकान, कमजोरी, चिंता, भूख न लगना, अपराध बोध और यौन रोग के अस्पष्ट मनोदैहिक लक्षणों का प्रदर्शित करते हैं, जिसके कारण रोगी को रात के उत्सर्जन में वीर्य की हानि होती है। हालांकि वीर्य के नुकसान का कोई सबूत नहीं है। उन्होंने बताया इरेक्टाइल डिसफंक्शन (22-62%) और समय से पहले स्खलन (22-44%) सबसे आम तौर पर जुड़े मनोवैज्ञानिक रोग थे; जबकि अवसाद सिंड्रोम (40-42%), चिंता न्युरोसिस (21-38%), सोमाटोफ़ॉर्म / हाइपोकॉन्ड्रिआसिस (32-40%) धातु सिंड्रोम वाले रोगियों में सबसे अधिक मनोरोग संबंधी विकार है। धातु सिंड्रोम के प्रबंधन में यौन शिक्षा, विश्राम चिकित्सा और दवाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा इस तरह की शाररिक व मानसिक अवस्था के मिथकों से निपटने के लिए मानसिक चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए ।
छत्तीसगढ राज्य एड्स कंट्रोल प्रोग्राम के अतिरिक्त परियोजना संचालक डॉ.एस के बिंझवार ने बताया, कोविड-19 के समय सुरक्षित यौन संबंध बनाने के लिए सावधानियां जरुरी है। इससे यौन जनित रोगों व कोरोना वायरस के संक्रमण से बचा जा सकता है। यौन संबंध बनाने के दौरान कंडोम और मास्क का उपयोग जरुरी है। कंडोम के उपयोग से एचआईवी एड्स जैसे यौन जनित रोगों के संक्रमण का खतरा नहीं होता है। उन्होंने कहा कोविड-19 सांस से संबंधित रोग है जो संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है. संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थ जैसे लार, छींकने और खांसने से निकलने वाली बूंदों से कोरोना संक्रमण फैलता है। इसलिए सेक्स के दौरान अतिरिक्त सावधानियां बरतनी जरूरी हो जाती है।
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