सफलता की कहानी पोषण वारियर्स

जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्युज
हितग्राहियों को कर रहे पोषण आहार के प्रति जागरूक, रंगोली बनाकर दे रहे संदेश
रायपुर 24 सितंबर 2020।
अनाज, फल और सब्जियों से बनी रंगोली जिसने भी देखी उसके मुंह से वाह जरूर निकला । आंगनबाड़ी केंद्र 2 ग्राम पंचायत पचेड़ा, विकासखंड अभनपुर, की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गीता माण्डले का मकसद केवल रंगोली बनाना नहीं, लोगों को पोषण आहार के प्रति जागरूक भी करना है ।
जहाँ एक तरफ महिला एवं बाल विकास विभाग का अमला संक्रमण से सुरक्षा और बचाव में मुस्तैदी से लगा हुआ है वही दूसरी ओर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने पोषण वारियर्स के रूप में घर-घर जाकर लोगों की मॉनीटरिंग कर रही है।
घर घर जाकर 3-6 वर्ष के बच्चों को 1200 ग्राम सत्तू के पैकेट बांटे है तो कम वजन के बच्चों के अभिभावक को पोषण पर विशेष समझाइश और ध्यान देने को ज़ोर दिया जा रहा है । 0-6 वर्ष के सभी बच्चों, गर्भवती और धात्री माताओं को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दी जा रहीं है । सर्वे कर सर्दी-खांसी के पीड़ित व्यक्तियों की जांच भी करवाने में सहयोग कर रहे है । घर-घर पहुंचकर लोगों को शारीरिकदूरी, हाथ धोने की समझाइश के साथ जागरूकता का संदेश दिया।
पोषण वारियर्स गीता माण्डले कहती है उसने 29 अगस्त 2008 में मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में शुरुआत की थी । उसके सामने एक पीढ़ी जवान हो गई । गीता कहती हैं: “जब मैने शुरुआत की थी तो हमारे गांव की एक बालिका बहुत अस्वस्थ रहती थी । आए दिन कोई न कोई स्वास्थ्य समस्या उसको होती रहती थी । मां-बाप परेशान थे । मैंने उनको सलाह दी कि वह स्थानीय शासकीय चिकित्सालय में अपनी बच्ची को दिखाएं और जैसा वहॉ के डॉक्टर परामर्श देते हैं उस तरीके से बच्ची की देखभाल करें । डॉक्टर का परामर्श और नियमित देखभाल से आज वह बच्ची एक दम स्वस्थ है और हमारी हितग्राही भी है। अब वह 13 वर्ष की हो गई है, जब भी मैं उसको देखती हूं तो मुझे बहुत खुशी होती है। मुझे गर्व है कि मेरी सलाह काम आई ।‘’गीता कहती है अगर जीवन में कुछ बनना चाहते हो तो लोगों की सेवा करो क्योंकि दूसरों के लिए जीना ही सबसे बड़ी सेवा है।
प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्र के कार्यकर्ता कोविड-19 के संक्रमण काल में पोषण वारियर्स के रुप में सामने आये है । कोविड-19 के संक्रमण के कारण जब पूरे देश में लॉकडाउन हुआ तब भी हितग्राहियों तक टीएचआर (टेक होम राशन) के तहत सूखा अनाज इन कार्यकर्ताओं ने पहुँचाया। साथ ही लोगों को कोविड-19 के संक्रमण से बचने के लिए फेस मास्क, हाथों को धोना, शारीरिक दूरी का पालन कराना और बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और विकास के लिए घर में ही रहकर परंपरागत खेलों को बढ़ावा देने की जानकारी भी गृह भेंट करके दी गई । माता-पिता को बच्चों के साथ खेलकूद में भाग लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है ।
वर्तमान में शासन द्वारा पोषण माह का आयोजन 1 सितंबर से 30 सितंबर तक चलाया जा रहा है । पोषण वारियर्स होने के नाते लोगों को पोषण के प्रति जागरूक किया जा रहा है । अनाज, फल और सब्जियों के माध्यम से पोषण रंगोली, पोषण थाली, पोषण मटका जैसी गतिविधियों को करके व्हाट्सएप के माध्यम से हितग्राहियों तक पहुंचाया जा रहा है ।
केंद्री सेक्टर की सेक्टर सुपरवाइजर खेमेश्वरी वर्मा कहती हैं इस वर्ष भी पोषण माह के अंतर्गत कुपोषण को दूर करने के लिए एवं सही पोषण लाने के लिए अनाज एवं रंगोली से लड़की का चित्र बनाकर गीता माण्डले द्वारा फल एवं सब्जियों को दर्शाया गया । इसमें ‘’हरी सब्जियां फल खाओ कुपोषण को दूर भगाओ’’ का संदेश भी दिया गया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रंगोली बनाकर ‘’सही पोषण देश रोशन’’ का संदेश दे रहीं हैं ।
गीता ने जमीनी स्तर पर ही नहीं ऑफिस कार्य की जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रहीं है। क्षेत्र की समस्त डाटा एंट्री गीता के द्वारा की जाती है। गीता का मानना है कि सहयोगी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सब एक टीम है । टीम के सहयोग से ही सेक्टर अच्छे से काम हो रहा है । स्थानिय सरपंच,पंच, अधिकारियों और मीडिया के कार्यकर्ता उनकी गतिविधियों में नियमित सहयोग करते हैं जिससे लोगों तक सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ मिले का प्रचार-प्रसार भी करते हैं ।
क्या है रेडी टू ईट फूड

आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्भवती महिलाएं और शिशुवती महिलाएं और सात महीने से तीन साल की उम्र वाले बच्चों को रेडी-टू-ईट फूड (फोर्टिफाइड न्यूट्रो पंजरी जिसे उपमा भी कहा जाता है) उपलब्ध कराई जाती है। यह अत्यंत पोषक खाना होता है|