आरक्षित वर्ग के अधिकारी कर्मचारी विभिन्न मुद्दों को लेकर चरणबद्ध तरीके से 26 को करेंगे राजधानी में विराट रैली प्रदर्शन

जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्युज

अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ छत्तीसगढ़ द्वारा सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय अनुसार विभिन्न मुद्दों पर प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराते हुए दिनांक 02 अक्टूबर 2020 को संगठन द्वारा गांधी जयंती अवसर पर सत्याग्रह का आयोजन किया था। आज दिनांक तक मांग पुरा नही होने की स्थिति में चरणबद्ध तरीके से 3 नवंबर से 20 नवंबर तक राज्य के सभी विकास खंड, जिला मुख्यालय सहित सभी कार्यालयों में आरक्षित वर्ग के अधिकारी, कर्मचारी से समर्थन प्राप्त करने हेतु हस्ताक्षर अभियान चलाने के साथ 10 नवंबर से 14 नवंबर तक विकासखंड स्तर एवं 17 नवंबर से 20 नवंबर तक जिला मुख्यालय में तहसीलदार, अनुविभागीय अधिकारी व कलेक्टर को माननीय मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन श्री भूपेश बघेल जी, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। 26 नवंबर को संविधान दिवस के दिन अपनी मांगों को रखते हुए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजातियों के ऊपर हो रहे अन्याय अत्याचार के खिलाफ संघर्ष के लिए आरक्षित वर्ग के विभिन्न संगठन जिसमें प्रमुख अजाक्स छत्तीसगढ़, अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ छत्तीसगढ़, अनुसूचित जाति, जनजाति का अखिल भारतीय परिसंघ छत्तीसगढ़ ,अनुसूचित जाति, जनजाति ,अन्य पिछड़ा वर्ग , अल्पसंख्यक छत्तीसगढ़ ,राष्ट्रीय अति पिछड़ा मोर्चा छत्तीसगढ़, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति विद्युत मंडल कर्मचारी संघ, अनुसूचित जाति- जनजाति रविशंकर विश्वविद्यालय संघ, सपाक्स छत्तीसगढ़ सहित अन्य संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से आरक्षण बचाओ, संविधान बचाओ संयुक्त आंदोलन महासंघ छत्तीसगढ़ के बैनर तले राज्य स्तरीय प्रदर्शन एवं रैली करने का निश्चय किया है। जिसके लिए सभी जिलों के संगठन द्वारा कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन देंगे । इस हेतु अनुसूचित जाति, जनजाति संगठनों का संयुक्त बैठक आहूत कर आगामी रूपरेखा तय किया गया। उक्त आशय की जानकारी देते हुए अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष आर एन ध्रुव ने कहा कि लगभग 50,000 आरक्षित वर्ग के अधिकारी कर्मचारी गण पहली बार राजधानी रायपुर में एकत्रित होकर अपनी मांगों के समर्थन में सरकार का निम्न प्रमुख मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकृष्ट करेंगे। केंद्र सरकार द्वारा देश में स्थापित शासकीय प्रतिष्ठानों का धड़ल्ले से किए जा रहे निजीकरण का विरोध करते हुए तत्काल इस पर रोक लगाए जाने की मांग की गई।
केंद्र सरकार कॉलेजियम सिस्टम समाप्त कर सुप्रीम कोर्ट एवं हाईकोर्ट में संविधान अनुच्छेद 312(1)(3) न्यायाधीशों की नियुक्ति यूपीएससी के पैटर्न पर अनुच्छेद 124 एवं 217 में संशोधन कर सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट के जजों का भी अखिल भारतीय न्यायिक सेवा आयोग के माध्यम से चयन किए जाने तथा शासकीय अधिवक्ताओंए विधि अधिकारियों का चयन प्रतियोगी परीक्षा व पदोन्नति द्वारा किये जाने की मांग, पदोन्नति में आरक्षण लागू करने हेतु छत्तीसगढ़ शासन तत्काल ठोस पहल करे एवं इस दौरान हाईकोर्ट के आदेश का गलत व्याख्या कर नियम विरूद्ध संवैधानिक प्रावधानों का उलंघन कर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिये स्थान सुरक्षित रखे बिना आरक्षण रोस्टर के विरूद्ध किये गये सभी पदोन्नति को रद्द करने व कर्नाटक की तरह एक माह मे क्वांटीबाईबल डाटा एकत्र कर पदोन्नति मे परिणामिक वरिष्ठता सहित नवीन/ संशोधन आरक्षण अधिनियम,नियम बनाई जावे।फर्जी जाति प्रमाण पत्र धारियों व जारीकर्ता, संरक्षण ,सहायता करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सरकार की घोषणा के अनुरूप तत्काल टीआरआई द्वारा एफआईआर केवियट दर्ज करने एवं विभाग द्वारा तत्काल सेवा से बर्खास्तगी ,वसुली सुप्रीम कोर्ट के फैसला स्टे 6 माह से अधिक नही रहेगा स्वत: निरस्त हो जायेगा और एफसीआई विरुद्ध जगदीश बलराम बहिरा मे जारी आदेश के अनुसार हाईकोर्ट से स्टे हटवाने की कार्रवाई किये जाने, शिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में बगैर आरक्षण रोस्टर का पालन किए व्याख्याताए सहायक ग्रेड 3, ग्रंथपाल आदि के पदों पर की जा रही भर्ती में आरक्षण रोस्टर का पालन किए जाने ।एकलव्य विद्यालय व स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल में प्रतिनियुक्ति ना करके सीधी भर्ती में आरक्षण की मांग, सभी विभागों के नियुक्तिए पदोन्नति से भरे जाने वाले रिक्त पदों बैकलाग पदों, रोस्टर ,बैकलाग रोस्टर की जांच तत्काल गठित स्थायी समिति से कराने जाने, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के अधिकारियोंए कर्मचारियों के लंबित शिकायत,विभागीय जांच,निलंबन,स्थानांतरण, पदोन्नति के प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करने कमेटी गठित करने,अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के अनुकंपा नियुक्ति के लंबित प्रकरणो में तत्काल संज्ञान लेकर अनुकंपा नियुक्ति दिलाए जाने , पांचवी अनुसूची क्षेत्र में संपूर्ण रुप से पेसा एक्ट को लागू किया जावे,अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति वर्ग के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति हेतु ढाई लाख की आय सीमा निर्धारित की गई है। अनुसूचित जाति, जनजाति का निर्धारण जन्म से ही होता है। इसलिए आय सीमा की बाध्यता समाप्त करने, संविदा भर्ती एवं आउटसोर्सिंग पर पूर्ण रूप से रोक लगाकर सीधी भर्ती किये जाने,वर्ष 2000 से लेकर 2020 तक बैकलॉग की पदों की गणना कर सीधी भर्ती के लिए विज्ञापन निकाले जाने,आरक्षण को संविधान के नौवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर भारतीय संविधान संशोधन हेतु भारत सरकार को प्रेषित किया जाने सहित अन्य मुद्दों को सम्मिलित किया गया है।