सुगम स्वास्थ्य योजना से गर्भवती महिलाओं की राह हुयी सुगम

दूरस्थ क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में प्रसव कराना हुआ आसान

दंतेवाड़ा , 10 नवम्बर। जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गयी दो अभिनव पहलों के कारण जिले में नक्सल प्रभावित दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं की राह अब सुगम हो गयी है | अब उनको एम्बुलेंस के आभाव में अस्पताल न पहुँच पाने के कारण घर पर प्रसव कराने का जोखिम नहीं लेना पड़ रहा है जिसका असर आंकड़ों में भी साफ़ नजर आ रहा है |
पिछले साल के जुलाई, अगस्त और सितम्बर माह के एच.एम.आई.एस. (हेल्थ मैनेजमेंट एंड इन्फोर्मेशन सिस्टम) के संस्थागत और घरेलू प्रसव के आंकड़ों की तुलना विभाग द्वारा जारी किये गए इस वर्ष के आंकड़ों से की जाए तो यह ज्ञात होता है कि विगत तीन महीनों में संस्थागत प्रसवों में प्रतिमाह लगभग 14% की औसत दर से वृद्धि हुयी है वहीं घरेलू प्रसवों में प्रतिमाह लगभग 33% की औसत दर से कमी दर्ज की गयी है।
एक नजर संस्थागत एवं घरेलू प्रसव के आंकड़ों पर –
माह
संस्थागत प्रसव
घरेलू प्रसव
2019-20
2020-21
2019-20
2020-21
जुलाई
449
498
49
34
अगस्त
422
483
43
34
सितम्बर
380
461
63
34

इन दो पहलों से हुयी गर्भवती महिलाओं की राह सुगम
सुगम स्वास्थ्य योजना- बिना समय गंवाए जल्द से जल्द गर्भवती महिलाओं एवं आकस्मिक मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए सुगम स्वास्थ्य योजना की शुरुआत हुई थी । इसमें गांवों में ही उपलब्ध वाहन मालिकों से समन्वय स्थापित कर स्वास्थ्य विभाग द्वारा पंजीयन कराया गया है। यह योजना दूरस्थ व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों जहाँ पर एंबुलेंस नहीं पहुँच सकती है वहां के लिए बहुत ही लाभदायक है जिसका असर आंकड़ों में भी दिख रहा है। इस योजना के अंतर्गत वाहन मालिकों को मरीजों को अस्पताल पहुँचाने के लिए भाड़ा भी दिया जा रहा है।

हेल्थ कॉल सेंटर से प्रसूताओं को मिली राहत- जिले में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लॉकडाउन के बीच जुलाई माह में पहला हेल्थ कॉल सेंटर खोला गया था। इस हेल्थ कॉल सेंटर के माध्यम से स्थानीय बोली हल्बी एवं गोंडी में गर्भवती महिलाओं उनके प्रसव से 5 दिन पूर्व ही यह जानकारी दी जाने लगी कि उनकी संभावित प्रसव तिथि नजदीक आ गयी है और उनको शीघ्र ही अस्पताल आना चाहिए इसके द्वारा उन्हें प्रसव के पहले ही अस्पताल लाकर भर्ती कराया जा रहा है। इस व्यवस्था से अब तक कई महिलाओं का सुरक्षित संस्थागत प्रसव हुआ है।

इस सम्बन्ध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ वीरेन्द्र ठाकुर ने बताया, “सुगम स्वास्थ्य एवं हेल्थ कॉल सेंटर योजना जिले के लिए काफी लाभप्रद रही है इसके लागू होने से एंबुलेंस न पहुँच पाने के कारण मरीज़ को होने वाले जोखिम को कम करने में मदद मिली है साथ ही इन दोनों योजनाओं के प्रभाव से संस्थागत प्रसवों में वृद्धि हुयी है जबकि घरेलू प्रसवों की संख्या में लगातार कमी देखी जा रही है। साथ ही शासन की योजनाओं के सफल क्रियान्वयन से भी संस्थागत प्रसव में लगातार वृद्धि हो रही है इस क्षेत्र में हम लगातार बेहतर कार्य करने का प्रयास कर रहे हैं ताकि माँ एवं बच्चे के स्वास्थ्य को बेहतर किया जा सके जिसमें जिला प्रशासन के साथ ही महिला एवं बाल विकास विभाग का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहता है।“

अब तक इतने हुए लाभान्वित
सुगम स्वास्थ्य के तहत अक्टूबर माह तक निजी वाहनों के द्वारा 104 मरीजों को अस्पताल तक पहुँचाया गया व वाहन मालिकों को इस सेवा कर बदले 29,200 रुपये का भुगतान किया गया है। निजी वाहनों से सर्वाधिक 40 मरीज जिला अस्पताल दंतेवाड़ा लाये गए जबकि कटे कल्याण जैसे दुर्गम व अति संवेदनशील विकासखंड में 22 मरीजों ने इस योजना का लाभ लिया। इसके अतिरिक्त कुआकोंडा विकासखंड में 17,गीदम में 16 व दंतेवाड़ा विकासखंड में 9 मरीज सुगम स्वास्थ्य योजना से लभान्वित हुए।

क्यों जरूरी थी यह पहल
सुगम स्वास्थ्य योजना प्रारंभ करने का प्रमुख कारण दूरस्थ एवं अंदरूनी गाँव तक मरीजों को निजी वाहनों के माध्यम से स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाकर संस्थागत प्रसव दर में वृद्धि करना व दुर्घटना, सर्पदंश जैसी आपातकालीन स्थिति में होने वाली मृत्यु के दर में कमी करना है। जिले के अंदरूनी गांवों में समस्या सबसे ज्यादा है। मोबाइल नेटवर्क या मोबाइल के नहीं होने से कई बार ग्रामीण एंबुलेंस के लिए सूचना ही नहीं दे पाते थे। इसलिए यह योजना बेहद कारगर है ।

पहले क्या थी स्थिति
एंबुलेंस के नहीं पहुंचने पर पहले मरीजों को खाट में ही लेकर ग्रामीण कई किमी पैदल निकल जाते थे। अस्पतालों से गांवों की दूरी अधिक हो जाने के कारण ऐसे मरीजों की हालत और भी ज्यादा बिगड़ जाती थी। इस योजना की शुरुआत हो जाने से ऐसे मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। साथ ही गाड़ी का किराया भी प्रशासन के द्वारा वहन किया जा रहा है ,ताकि मरीज के परिजनों पर आर्थिक दबाव न पड़े। साथ ही अब मरीज को अस्पताल तक पैदल लेकर जाने की जरूरत भी नही पड़ रही है ।