राजधानी में जुटे प्रदेशभर के स्वास्थ्य संयोजक, सरकार से नियमितीकरण और वेतन विसंगति की कर रहे मांग

स्वास्थ्य संयोजक कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष टार्जन गुप्ता ने बताया कि हमारी दो सूत्री माँग है, पहले वेतन विसंगतियों को दूर किया जाए और दूसरा नियमितीकरण किया जाए, क्योंकि स्वास्थ्य सेवा जनता की प्राथमिक सेवाएँ तो स्वास्थ्य कर्मचारी सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए. उन्होंने बताया कि जब प्रदेश में बीजेपी की सरकार थी तो हम लोगों ने 47 दिन का हड़ताल किया था.

उस दौरान घोषणा पत्र के अध्यक्ष टीएस सिंहदेव ने उनकी मांगों को घोषणा पत्र में शामिल करते हुए कहा था कि कांग्रेस सरकार आने के बाद इन मांगों को पूरा किया जाएगा. आज 2 साल से ज़्यादा हो चुका है और हमारी माँगें पूरी नहीं हुई है. अब हम लोगों का सब्र का बाँध टूट गया है. आज का हमारा प्रदर्शन सरकार को ध्यान दिलाने के लिए है, अगर हमारी माँगें पूरी नहीं की गई तो अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे. उन्होंने कहा किइससे कोरोना वैक्सीनेशन का कार्य प्रभावित होगा क्योंकि इसे स्वास्थ्य संयोजक ही लगाते हैं.

स्वास्थ्य संयोजकों के आंदोलन को समर्थन देने पहुँचे कर्मचारी संघ के अध्यक्ष विजय झा ने कहा कि सरकार कर्मचारियों की माँगों को अनदेखा कर रही है. चाहे कोई भी विभाग का हो ख़ुश नहीं हैं, क्योंकि सरकार के घोषणा पत्र में शामिल किया गया है, बावजूद दो साल से माँगे पूरी नहीं हुई है. विभागीय मंत्रियों के पास जाने पर कहते हैं कि फंड नहीं है, तो वहीं छोटे-छोटे कामों में करोड़ों करोड़ रुपया फूंक दिया जा रहा है, जिसका एक उदाहरण बूढ़ा तालाब है. एक दिवसीय विरोध-प्रदर्शन का हम समर्थन करते हैं, और आगे अनिश्चितकालीन हड़ताल करना पड़े तो भी हमारा समर्थन रहेगा.

स्वास्थ्य संयोजकों का ये होता है काम

प्रदेश के 5200 उपस्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ्य संयोजक पदस्थ हैं जो कि सामान्य बीमारियों की प्राथमिक उपचार, टीकाकरण , प्रसव, कुष्ठ मरीज़ों को दवाई उपलब्ध कराने के साथ साथ राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों का संचालन करते हैं. वर्तमान समय में फ्रंटलाइन वर्करों को कोरोना वैक्सीन लगाया जा रहा है.