सरहद पर पहुंचे कर्मयोगी

[ जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्युज

रायपुर चुनाव होने के पहले सभी सरकार यही कहती है कि हम यहां के जल जंगल और जमीन की रक्षा करेंगे परंतु वास्तविकता तब पता चलता है जब जल जमीन और जंगल के असली रखवाले शहरों की ओर रुख करने लगते हैं अर्थात अपने अधिकार के लिए शहरों पर मोर्चा देना पड़ता है

रायपुर सिलतरा के एक उद्योग गोदावरी का खड़गांव मानपुर मोहला में लौह माइंस है जो पांचवी अनुसूची क्षेत्र में आता है यहां कार्यरत लगभग सात सौ मजदूरों का काम कंपनी ने बगैर सूचना दिए बंद कर दिया है कोरोना काल में हुए लाख डाउन का का फायदा कंपनी ने उठा लिया है 23 मार्च 2020 से मजदूरों का काम बगैर सूचना दिए कंपनी ने बंद कर दिया है मजदूर प्रतिदिन माइंस में तो जाते थे परंतु उन्हें किसी तरह का कोई काम नहीं दिया जाता था वह वहां दिनभर बैठते और शाम को घर वापस आ जाते थे नहीं रजिस्टर पर उनकी हाजिरी होती थी और नहीं किसी तरह का उपस्थिति दर्ज किया जाता था मजदूर इस बात से अनभिज्ञ थे कि उनका काम बंद कर दिया गया है यह बात तो तब पता चला जब माइंस में काम पूरी तरह बंद कर दिया गया।

खडगांव के भीमराज मातलामे का कहना है कि मजदूरों का 10 महीने का वेतन रुका हुआ है लगभग 700 मजदूर कार्यरत थे जिन्हें ₹11000 महीना तनख्वाह व ₹1000 एरियर जमा होता था तथा बोरिया टीबु माइंस के मजदूरों को दीपावली के समय 12% भत्ता अलग दिया जाता था वे कहते हैं कि सभी मजदूर 20 जनवरी को मानपुर से निकले हैं वे सभी राज्यपाल के पास अपनी मांगों को लेकर जा रहे हैं उनका कहना है कि हमारे क्षेत्र को पांचवी अनुसूची के दायरे में रखा जाए वहां अलग कानून ना चलाया जाए ग्राम सभा को ही सर्वोपरि माना जाए सारे सरकारी तंत्र समाप्त किए जाएं स्वशासन की मांग को लेकर हम उनके पास जा रहे हैं तथा छूटे गए हमारे रोजगार के साधन व 23 मार्च से अब तक की तनख्वाह की भी मांग है

भीमराज मातलामे का कहना है कि हम मजदूर कमाते हैं चोर उसे खा जाते हैं
एक मजदूर का कहना है कि 17 गांव के लगभग 700 मजदूर कमलजीत के निर्देशन में कार्य करते थे कमलजीत दल्ली राजहरा से प्रतिदिन आया करते थे और 700 मजदूरों में से 12 को सुपरवाइजर बनाया गया था जो प्रतिदिन सभी मजदूरों की हाजिरी लिया करते थे परंतु 23 मार्च से ना किसी को आदेश दिया गया की हाजिरी ले और नहीं किसी तरह का कोई काम बताया गया जो भी साहब बाहर से आते वह केवल ऑफिस तक ही सीमित रहते थे वह मजदूरों के बीच उपस्थित नहीं होते थे कोई भी मजदूर उनसे मिल नहीं पाता था और क्या काम करना है उसकी जानकारी नहीं हो पाती थी कुछ मजदूर बताते हैं कि गोदावरी प्लांट का क्षेत्र में लगभग तीन माइंस चल रहा था जिसमें से दो माइंस अभी भी चालू है परंतु बोरियाटिबू का माइंस बगैर सूचना के ही बंद कर दिया गया