आरक्षण नियमों के विरुद्ध काम करने वाले अधिकारियों ,कर्मचारियों अब सौ बार सोचना होगा ।

जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्युज
फर्जी जाति प्रमाणपत्र का जारी होना,फिर नौकरी पाना ,यह सब शासन की कमजोर नीति, नियम का परिणाम है ।

नियम की कठोरता व कार्यवाही की तत्परता से निजात मिल सकती थी

कठोर नियम के अभाव में आज भी आरक्षण नियमों का गलत ब्याख्या कर पदोन्नति व सीधी भर्ती बदस्तूर जारी है

फर्जी व आरक्षण नियमों के विरुद्ध काम करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के लिये कठोर सजा हेतु प्रावधान करने की मांग पर गवर्नमेंट एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन छ ग के पत्र पर प्रावधान हेतु कार्यवाही शुरू
आरक्षण नियमों के विरुद्ध काम करने वाले अधिकारियों ,कर्मचारियों अब सौ बार सोचना होगा ।

             हक अधिकार व सम्मान की रक्षा हेतु  प्रतिबद्ध प्रदेश का एकमात्र संगठन  *गवर्नमेंट एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन छ ग* के मुहिम मा  हाई कोर्ट के अंतिम निर्णय तक आरक्षण विहीन नियमित पदोन्नति पर रोक ,सहित ,150 अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में ब्याख्याता के संविदा भर्ती को एकल विद्यालय, एकल पद में भर्ती कर ,अनुसूचित जाति ,अनुसूचित जनजाति  को नियुक्ति से रोकने सरकार के नीति के विरोध सहित पांच सूत्रीय मांग को लेकर 05 जनवरी से शुरू आंदोलन के तीसरे चरण में 03 फरवरी को  रायपुर  में प्रांतीय धरना देकर   01 मई 21 से अनिश्चित कालीन हड़ताल का एलान हो चुका है 
    *इसी बीच हड़ताल के साथ साथ महामहिम राज्यपाल महोदया को छ ग लोक सेवा(अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण) अधिनियम 1994 की धारा 06 में संशोधन तथा धारा 17 के तहत स्थाई समिति की गठन हेतु ज्ञापन दिया गया था* । ज्ञात हो संगठन के प्रांताध्यक्ष कृष्ण कुमार नवरंग ने ज्ञापन में स्पष्ट किया कि शिक्षा कर्मियों की पदोन्नति 2006 में सभी जिला पंचायत व 21 मई 20 17 को बस्तर तथा अप्रैल 2018 को बेमेतरा जिला पंचायतों ने रोस्टर के अनारक्षित  प्रवर्ग को सामान्य वर्ग के लिये  आरक्षित मानकर पदोन्नति दी है साथ ही गृह विभाग ,विधुत मंडल के नियुक्ति प्राधिकारी के द्वारा पदोन्नति नियम की धारा 05 की उपधारा (1)के अधीन सौंपे गए दायित्व का  उलंघन कर मनमानी पूर्वक योग्यता वरिष्ठता को दरकिनार कर अनुसूचित जाति व जनजाति के योग्य व मेघावी प्रतिभा शाली शिक्षक को पदोन्नति देने से मना कर सामान्य वर्ग के कनिस्ट अयोग्य को पदोन्नति दी है जिसे राज्य स्तरीय जांच टीम  बी एन मिश्रा  व अन्य ने सामान्य प्रशासन विभाग के नियमों को अनदेखी कर सही ठहराया है ।
      इसी तरह सामान्य प्रशासन विभाग ने 267 फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर नियुक्ति कर्मचारियों व अधिकारियों को बर्खास्त करने का निर्देश दिया है 
    *महामहिम राज्य पाल को सौंपे ज्ञापन में मांग की गई कि प्रावधान नियम में संशोधन कर आरक्षण नियम की मनमानी पूर्वक ब्याख्या कर भर्ती व पदोन्नति देने वालो अधिकारी को सामान्य प्रशासन विभाग या शासन के मंजूरी के बिना प्रत्येक जिला में फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई  कर 07 वर्ष की सजा सहित 50 हजार की जुर्माना का प्रावधान करने की मांग पर अवर सचिव GAD कक्ष 03 को भेजकर कार्यवाही करने का पत्र लिखकर सूचना देने का पत्र भेजा है* 

    इस तरह छ ग एकमात्र संगठन जो आरक्षण सहित उनके अधिकारों के लिए न्यायालय सहित सड़क में उतरकर संघर्ष करने  की काम करती है और यह भरोसा दिलाती है आगामी दिनों में संघर्ष जारी रहेगी 

          *कृष्ण कुमार नवरंग* 
                   प्रांताध्यक्ष