चाहतों को लाभ पहुंचाने असली हकदार को कर रहे हैं वंचित

जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्युज छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल आरक्षित वर्ग अधिकारी कर्मचारी संघ द्वारा आंदोलन के पहले चरण में दिनांक 30/3/ 2021 मंगलवार को पूरे प्रदेश में सामूहिक आकस्मिक अवकाश(मास सीएल)छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी में माननीय उच्च न्यायालय के द्वारा पदोन्नति में आरक्षण के संबंध में दिनांक 9:12 2019 को दिए गए स्थगन आदेश के बाद से ही न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देश की रेगुलर पदोन्नति जारी रहेगी जिसका स्पष्टीकरण माननीय न्यायालय ने अपने आदेश दिनांक 8 /१ 2020 को भी स्पष्ट किया है कि गलत व्याख्यान कर पावर कंपनी में विगत 1 वर्षों से भी ज्यादा समय से अनुसूचित जाति जनजाति के वरिष्ठ लोक सेवकों को पदोन्नति से वंचित किया जा रहा है वर्ष 2020 में प्रारंभिक के 6 महीने में अनुसूचित जाति जनजाति के लोग सेवकों को जो भी वरिष्ठता सूची में वरिष्ठ थे उनको छोड़कर सामान्य वर्ग के लोक सेवक जो वरिष्ठ सूची में कनिष्ठ थे को लगातार प्रगति कर न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करते रहे जब संघ ने इस बात को विभिन्न मंत्रियों एवं मुख्यमंत्री महोदय से लगातार संपर्क कर संज्ञान में लाया तब कहीं छह माह पश्चात तत्कालीन अध्यक्ष छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी के सुबोध साहू ने नियम विरुद्ध किए जा रहे पद्धति पर रोक लगा दी पावर कंपनी के नए अध्यक्ष श्री अंकित आनंद के पदभार ग्रहण करने के उपरांत से ही सामान्य वर्ग के लोगों ने उन पर पदोन्नति शुरू करने का दबाव बनाया गया जिसके फलस्वरूप उन्होंने अपने अधिकार से परे जाकर बोर्ड ऑफ डायरेक्टस में ऐसे रेसोलुशन पास कराया जिस का आदेश 19 /३/2021 को जारी किया गया जो कि उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है साथ ही माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों के दिनांक 9:12 2019 एवं 8-1-2020 की अवमानना है साथ ही उच्च न्यायालय के slp सिविल नम्बर 27039 /2020 विजय सिंह कोर्राम छत्तीसगढ़ शासन आदेश दिनांक 22/ 1/ 2021 एवं slp नम्बर 3000 /2021 निरंजन कुमार एवं अन्य बनाम छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी में पदोन्नति में आरक्षण पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश पारित किया जिसे माननीय उच्च न्यायालय के अधिवक्ता श्री अंचल कुमार मात्रे भी अपनी अभिमत देकर स्पष्ट किया है उल्लेख है कि छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा पदोन्नति नियम हेतु दिनांक 23/10/ 2019 को अध्यादेश जारी कर 30-10-2019 के पदोन्नति हेतु अनुसूचित जाति हेतु 13 परसेंट एवं अनुसूचित जनजाति हेतु 32 परसेंट आरक्षण का प्रावधान किया गया था जिसके माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 9-12-2019 को स्टे लगा दिया लगा ना कि उसे अपास्ट किया अर्थात अनुसूचित जनजाति के पदों पर स्थगन किया गया उन पदों पर कोई भी प्रगति नहीं हो सकेगी परंतु साथ ही यह व्यवस्था दी गई की वरिष्ठता के आधार पर रेगुलर पदोन्नति जारी रहेगी अत नाआरक्षित पदों पर जो कि किसी भी वर्ग के लिए आरक्षित नहीं है एवं इन पदों पर वरिष्ठता के आधार पर किसी भी प्रवर्ग को पदोन्नति की जा सकती है माननीय उच्च न्यायालय के इस व्यवस्था की गलत व्याख्या करते हुए पावर कंपनी के आदेश क्रमांक 19/3/2021 के द्वारा जिन पदों पर स्टे लगा है उन पदों पर भी नियम विरुद्ध पदोन्नति का रास्ता साफ कर दिया गया है साथ ही अनुसूचित जाति, जनजाति के लोक सेवकों के लिए जो वरिष्ठता सूची में वरिष्ठ हैं 50 परसेंट केपिन आदेश जारी कर दिए जो कि संविधान के विरुद्ध एवं उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है यहां यह बताना आवश्यक होगा कि अगर इस आदेश के तहत पदोन्नति की जाती है तो अनुसूचित जाति, जनजाति के चंद लोक सेवा के ऊपर के पदों (मुख्य अभियंता, अतिरिक्त मुख्य अभियंता) पर पदोन्नति हो जाएंगे जबकि नीचे के पदों पर 80% से 90% रिक्त पदों सामान्य वर्ग के लिए पदोन्नति हो जाएगी जो कि अनुसूचित जाति जनजाति वर्गों के लोग सेवकों के साथ सरासर अन्याय होगा। इस अन्याय पूर्ण एवं नियम विरुद्ध पदोन्नति रोकने हेतु संघ ने पावर कंपनी प्रशासन से कई बैठक की। माननीय मंत्री जी अमरजीत भगत के साथ भी अध्यक्ष महोदय की बैठक हो चुके है। इस बाबत ज्ञापन भी माननीय राज्यपाल महोदय एवं माननीय मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन को भी दिया जा चुका है फिर भी कंपनी प्रशासन पदोन्नति करने की पूरी तैयारी कर चुका है एवं कभी भी नियम विरुद्ध पदोन्नति आदेश जारी हो सकते हैं जिससे क्षुब्ध होकर छत्तीसगढ़ पावर कंपनी लगभग 3500 अनुसूचित जाति जनजाति के लोक सेवक मंगलवार दिनांक 30/03/2021 को पूरे छत्तीसगढ़ में सामूहिक अवकाश लेकर विरोध करेंगे आगे भी इस आंदोलन को वृहद करने की रूपरेखा तैयार की जाएगी अगर इस विरोध स्वरूप छत्तीसगढ़ में धान उत्पन्न होते हैं तो इसकी संपूर्ण जवाबदारी कंपनी प्रशासन की होगी।