सामाजिक जागरूकता से ही अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे विलुप्त होने के कगार खड़े पक्षियों की रक्षा हो सकेगी


इंसान के प्रति चिड़ियों के सुरक्षा का भाव का उदाहरण देखने में आया है। लगातार पिछले 5 वर्षों से घर के प्लेजर दुपहिया वाहन में लिटी चिड़िया ने अपना घोंसला बना लिया है। वह अंडे देती हैं, बच्चे पैदा होते हैं और फिर उड़ जाते हैं। जो भविष्य में बड़े होकर सृजन चक्र का हिस्सा बनेंगे।
पिछले वर्षों की भांति इस वर्ष भी अप्रैल में लिटी चिड़िया ने घोसला बनाया। लिटी चिड़ियों द्वारा घोसला बनाने तक तो ठीक है क्योंकि चिड़ियों द्वारा तिनका इकट्ठा करने के दौरान गाड़ी का उपयोग इधर-उधर आने-जाने के लिए कर सकते हैं । लेकिन जैसे ही लिटी चिड़िया अंडे देती है गाड़ी को लॉक डाउन करना पड़ता है और जब तक बच्चे बड़े हो ना जाए तब तक गाड़ी का बिल्कुल उपयोग नहीं कर पाते हैं।
रुद्री के रहने वाले आरएन ध्रुव की गाड़ी में पिछले 5 वर्षों से मार्च-अप्रैल महीने में चिड़िया ने अपना आशियाना बनाया है। उन्होंने कहा कि हमें यह बात इसलिए शेयर करना पड़ रहा है कि हमारे आसपास बहुत सारी चिड़िया एवं वन्य प्राणी रहते हैं । ये चिड़िया आपके आसपास ही रहना चाहते हैं और आपको बिगर हानि पहुंचाए पेड़-पौधों, फलो ,साग- भाजी में लगने वाले कीट पतंगों को खाकर अपना जीवन यापन करते हैं या यूं कहें कि हम सबके लिए अप्रत्यक्ष रुप से कीटनाशक दवाइयों के रूप में अपना कार्य निरंतर निभाते रहते हैं। हम सब देखते हैं कि हमारे आस-पास बहुत सारे पक्षी जिसमें कोइली, पड़की, फुलचुक्की आदि हम सबके घरों के आसपास वृक्षों में निर्बाध रूप से विचरण करते हैं। अपने सु-मधुर आवाज से हम सबको ताजगी दिलाते हैं प्रकृति के नजदीक पहुंचाने का कार्य करते हैं। कभी-कभी ये पक्षी हम सबके इतने करीब पहुंच चुके होते हैं कि सभी मानव में अपनेपन का भाव इन पक्षियों को नजर आता है । इसी का फायदा उठाकर शिकारी इन पक्षियों का शिकार करते हैं। जिसका हम सबको पता ही नहीं चलता। यदि समाज में जागरूकता आए और कोई भी शिकारी आपके आसपास पक्षियों का शिकार करते हुए दिखे तो उन्हें तत्काल मना करें। निसंदेह निश्चित ही हम इन पक्षियों का जो धीरे-धीरे विलुप्त होते जा रहे हैं अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं उनकी हम सुरक्षा कर सकेंगे। मेरा दावा है कि आपके आसपास भी इन पक्षियों की चहचहाहट गूंजने लगेगा । यदि हम ऐसा करने में सफल हो गए तो शहर में भी हमें ग्राम्य जीवन के दर्शन होंगे।