आरी डोंगरी कच्चे खदान अपने चहेतों को दिलाने प्रतिबद्ध भूपेश सरकार 15 मई से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे कोमल हुपेंडी (आप पार्टी प्रदेश अध्यक्ष)

On  जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्युज

टेंडर की प्रक्रिया ऑफलाइन क्यों?

पिछली बार सरकार की किरकिरी के बाद टेंडर हुआ कैंसिल

एक तरफ पूरा देश कोरोना माहामारी से लड़ रहा है वहीं छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार अपने चहेतों को आरी डोंगरी आयरन ओर की खदान सौंपने की गुपचुप तैयारी में लगी हुई है।

आरी डोंगरी खदान के लिए दुबारा टेंडर जारी, चहेतों को टेंडर देने इस बार भी नए नियम का पेंच, CMDC में डी डी जमा करने पर ही टेंडर भरने की होगी पात्रता

रायपुर। छत्तीसगढ़ में “आयरन ओर” के एक खदान का ठेका अपने लोगों को दिलाने के लिए सरकार का एक तबका एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए है। पिछली बार नियम कायदों को ताक पर रखकर इस टेंडर की प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश की गयी, मगर बड़े अधिकारियों के हाथ खड़ा कर लेने के चलते टेंडर को निरस्त करना पड़ा।

जानिए आरी डोंगरी के खदान के बारे में

आरी डोंगरी का “आयरन ओर” का यह खदान कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर तहसील के कचही गांव के अंतर्गत 167 हेक्टेयर भूभाग में फैला हुआ है। जिसे किसी कंपनी को ठेके पर देने का फैसला राज्य सरकार ने किया है। इसी के तहत छत्तीसगढ़ मिनरल्स डवलपमेंट कारपोरेशन CMDC ने इस वर्ष के प्रारम्भ में एक टेंडर निकाला था, मगर बाद में इस टेंडर को निरस्त करना पड़ा।

ठेका लेने अपनाये गए सारे हथकंडे

रायपुर- एक दौर था जब लोग किसी भी काम का ठेका पाने के लिए सारे हथकंडे अपनाया करते थे, मगर जब से शासकीय कामकाज में पारदर्शिता आयी है, और टेंडर भरने की प्रक्रिया ऑनलाइन हुई है तब से ठेका हथियाने का काम लगभग कम हो गया है, मगर आरी डोंगरी के खदान के लिए पिछली बार वो सारे हथकंडे अपनाये गए जिसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता। इस खदान के लिए पिछली बार जो नियम बनाये गए थे उसके मुताबिक टेंडर फॉर्म की कीमत का डिमांड ड्राफ्ट CMDC के नवा रायपुर स्थित कार्यालय में जमा करने के बाद उसकी पावती टेंडर फॉर्म ऑनलाइन भरते समय लगानी थी। मगर संबंधित समयावधि में कोई ठेकेदार डीडी लेकर CMDC के कार्यालय में घुस ही नहीं पाया, केवल जिन चहेतों को ठेका देना था वे ही अंदर जा सके। दरअसल आरी डोंगरी के खदान के टेंडर भरने के लिए पिछली बार जो तिथि तय की गयी थी उस दौरान CMDC कार्यालय के चारों और बाकायदा सुरक्षा घेरा बनाकर रखा गया था, और लोगों को घुसने से रोकने के लिए बाउंसर भी रखे गए थे।

बवाल के बाद टेंडर हुआ था कैंसि

पछली बार इस खदान के टेंडर के लिए अनेक लोगों ने अपनी किस्मत आजमाने का प्रयास किया, मगर CMDC के इर्द गिर्द जिस तरह की गुंडागर्दी की गई, उसके चलते वहां अनेक लोगों के झगड़े भी हुए और अच्छे रसूखदार लोगों को वापस लौटना पड़ा, और वे टेंडर नहीं भर सके। बाद में इस मामले की उच्च स्तरीय शिकायत हुई और विभाग के बड़े अधिकारियो ने हाथ खड़े कर दिए तब मजबूरन इस टेंडर को कैंसिल करना पड़ा।

सरकार को राजस्व का होता नुकसान

पिछली बार आरी डोंगरी के “आयरन ओर” खदान के लिए जिन चहेतों को टेंडर फॉर्म भरने की पात्रता हासिल हुई, बताया जाता है उन्होंने टेंडर में काफी कम दर भरा था। अगर तब उन्हें खदान संचालन का ठेका दे दिया गया होता तब सरकार को लगभग 5 सौ करोड़ रु राजस्व का नुकसान होता। हालाँकि इस खदान के लिए दूसरा टेंडर जारी हो गया है, मगर इस बार भी टेंडर की प्रक्रिया फिर से चर्चा में है।

आरी डोंगरी के खदान के लिए इस बार जारी टेंडर में केवल इतना अंतर है की इस बार यह टेंडर खनिज विभाग से संबंधित बोर्ड की स्वीकृति के बाद जारी हुआ है। आनन फानन में निकाले गए इस टेंडर के लिए डीडी जमा करने की तिथि 1 मई से लेकर 10 मई तय की गई है। जीएसटी को मिलाकर डीडी कुल 59 हजार रूपये का बनाकर जमा करना है, और उसकी पावती ऑनलाइन टेंडर भरते समय अटैच करनी होगी। इस बार भी लोग यही सवाल उठा रहे हैं कि जब टेंडर फॉर्म की कीमत जमा करने के लिए दूसरे ऑनलाइन माध्यम हैं तब इस बार भी कार्यालय आकर डीडी जमा करने का नियम क्यों बनाया गया है, वह भी ऐसे वक्त पर जब पूरे प्रदेश में कोरोना फैला हुआ है, सभी प्रमुख स्थानों और दूसरे राज्यों में भी लॉक डाउन लगा हुआ है। ऐसे में जब सारे काम ऑनलाइन हो रहे हैं, CMDC अपने ठेके देने के लिए इस तरह ऑफ लाइन मोड पर काम करना चाहता है।इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार येन केन प्रकारेण आरी डोंगरी खदान का टेंडर अब भी अपने चहेतों को देने के लिए प्रतिबद्ध है।
जनसुनवाई में करीब 1300 मजदूर रखने की बात हुई थी, अभी केवल 196 मजदूर को कम देने की बात प्रशासन कर रही है।
आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कोमल हुपेंडी ने सरकार से मांग की है कि टेंडर प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन किया जाए।टेंडर फॉर्म की कीमत हो चाहे अमानत राशि का भुगतान हो डिजिटल माध्यम से स्वीकार किया जाए।अगर सरकार टेंडर प्रक्रिया को पूर्णतः ऑनलाइन नहीं करती है तो हुपेंडी अनिश्चित कालीन अनशन पर बैठेंगे।