निर्दोष आदिवासियों का नरसंहार रोकने आगे आए

जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्युज
छत्तीसगढ़ के विभिन्न हिस्सों रायगढ़, बलौदाबाजार, धमतरी, दुर्ग आदि में आदिवासियों के जमीन पर पर्यावरण संरक्षण को नजरअंदाज करते हुए बड़े-बड़े बांध, उद्योग स्थापित कर उन्हें बेघर किए गये।बांध, उद्योग लगाने के नाम पर आदिवासियों का बेतहाशा शोषण हो रहा है। लेकिन कभी किसी ने व्यापक पैमाने पर इसका विरोध नहीं किये। जिसके कारण आज समुचित व्यवस्थापन नहीं होने से आदिवासी अपने जमीन से वंचित होकर दर-दर भटक रहे हैं।
लेकिन बस्तर की बात कुछ अलग ही है ।बस्तर के आदिवासी बहुत साहसी हैं- जल-जंगल-जमीन से लगाव है। इतिहास गवाह है बस्तर के आदिवासी मातृभूमि की रक्षा हेतु हमेशा बाहरी तत्वों का विरोध करते रहे हैं। इसी कारण बस्तर को पूर्व मुख्यमंत्री डीपी मिश्रा के समय से बड़ी-बड़ी नरसंहार का सामना करना पड़ रहा है। जो निरंतर जारी है…।
शिक्षा हेतु स्कूल, बेहतर स्वास्थ्य हेतु अस्पताल, आंगनबाड़ी, कोऑपरेटिव सोसाइटी की मांग करने वाले
सिलगेर बस्तर में निर्दोष आदिवासियों का नरसंहार सरकारी तंत्र के बर्बरता पूर्वक व्यवहार मानवीय रूप से कठोर निंदनीय हैं। दुनिया में जब ऑक्सीजन के लिए हाहाकार मचा हुआ है तो आज यही आदिवासी अपनी जान को जोखिम में डालकर विकास के नाम पर जंगल को काटने वाले उद्योगपतियों से वनों को बचाकर पूरे विश्व में पर्यावरण को संतुलित रखने का कार्य कर रही है।
आज बस्तर के खनिज संपदा, जैव विविधता, पर्यावरण को बचाने के लिए बस्तर के साथ-साथ पूरा देश आदिवासियों के साथ खड़ा है।
अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष, राष्ट्रीय सचिव गोंडवाना गोंड़ महासभा आर एन ध्रुव द्वारा अपील किया गया कि यही सही वक्त है।आओ हम हम सब मिलकर उन्हें न्याय दिलाने में साथ दें।पर्यावरण संरक्षण के लिए कृत संकल्पित निर्दोष आदिवासियों का नरसंहार को रोकने आगे आए।