अजजा शासकीय सेवक विकास संघ पदोन्नति में आरक्षण को लेकर करेगा बड़ा आंदोलन


छ.ग.उच्च न्यायालय द्वारा पदोन्नति में आरक्षण नियम 2003 को निरस्त कर दो माह में माननीय सुप्रीम कोर्ट एम.नागराज केस एवं जर्नेल केस में पारित आदेश के शर्तों का पालन करते हुये नये पदोन्नति नियम 02 माह में बना लेने की छूट दी गई थी पर उक्त शर्तों का पालन किये बिना सामान्य प्रशासन विभाग व्दारा दिनांक 30 अक्टुबर 2019 को नये नियम तैयार कर लागू किया गया जिसे चुनोैती देने के कारण 100 बिंदु के रोस्टर नियम पर दिनांक 09.12.2019 को इसे सर्वोच्च न्यायालय के न्याय दृष्टांत के विपरीत होना बताकर पी-5 पदोन्नति के लिये 100 बिंदु के रोस्टर पर रोक स्थगन का आदेश देते हुये आरक्षण के बिना सरकार वरिष्ठता के आधार पर नियम कानून का पालन करते हुये नियमित पदोन्नति दे सकती है, कहा गया है। परन्तु नियम एवं कानून का पालन किये बिना मात्र वरिष्ठता के आधार पर विभिन्न विभागों में पदोन्नति दी जा रही है जबकि आरक्षण अधिनियम-1994 एवं नियम-1998 तथा पदोन्नति नियम-2003 एवं समय-समय पर हुए संशोधन प्रभावी है। मात्र रोस्टर नियम-5 जिसके अनुसार 100 बिंदु का रोस्टर तैयार किया गया है, को स्थगित किया गया, समाप्त नहीं किया गया है। ऐसी स्थिति में प्रदेश में लागू पदोन्नति नियम-2003 समय-समय पर शासन द्वारा जारी निर्देश/आदेश के अनुसार आरक्षित पदों को किसी भी तरीके से अनारक्षित वर्गों से नहीं भरा जावेगा। इस महत्वपूर्ण प्रावधान का उल्लंघन करते हुए न्यायालय के आदेश का गलत व्याख्या करते हुए आरक्षित अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग के रिक्त पदों को अनारक्षित वर्ग सामान्य एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के अधिकारी/ कर्मचारीयों से पदोन्नति द्वारा भरा जा रहा है, जबकि होना यह चाहिए कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित रिक्त पदों को न्यायालय के अंतिम आदेश तक सुरक्षित रखा जाकर शेष बचे पदों को वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति द्वारा भरा जा सकता है, परन्तु सामान्य प्रशासन विभाग/विधि विभाग/महाधिवक्ता से कोई दिशा-निर्देश या अभिमत जारी किए बिना विभिन्न विभागों द्वारा नियम विरूद्व आरक्षित रिक्त पदों को एवं बैकलाग रिक्त पदो को सामान्य एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के अधिकारी/कर्मचारी से भरा जा रहा है, जिससे आरक्षित अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग के अधिकारी/कर्मचारी के पदोन्नति पर आरक्षण संबंधी भारतीय संविधान अनुच्छेद-16(4)(क), 85 वाॅं संविधान संशोधन, 2001 पदोन्नति में परिणामिक वरिष्ठता,16(4)(ख) संविधान संशोधन 2000 बैकलाग रिक्ति को 50 प्रतिशत कोटा से अतिरिक्त होना बताया गया है, एवं अनुच्छेद-335 का 82 वाॅं संविधान संशोधन 2000 का स्पष्ट उल्लंघन किया जा रहा है और ऐसा कर आरक्षण अधिनियम/नियम का उल्लंघन किया जा रहा है, जिस पर तत्काल रोक लगाया जाकर आरक्षित पदों पर पदोन्नत सामान्य/अन्य पिछड़ा वर्ग के अधिकारी/कर्मचारी की पदोन्नति तत्काल निरस्त किया जावे और विधि विभाग/सामान्य प्रशासन विभाग के दिशा-निर्देश नियम के बिना हो रहे पदोन्नति की कार्यवाही पर रोक लगाई जावे। वर्तमान पदोन्नति व्यवस्था से अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति वर्ग के अधिकारी/कर्मचारियों को अपूरणीय क्षति हो रही है जिसे पूरा कर पाना संभव नहीं होेगा, क्योंकि जो अनारक्षित वर्ग के सामान्य/अन्य पिछड़े वर्ग के अधिकारी/कर्मचारी आरक्षित पदो के विरूद्व पदोन्नत हो गए है, उन्हें हटाये जाने पर न्यायालय का शरण लेंगे और स्थगन प्राप्त कर लेंगे। जैसा कि फर्जी जाति के मामलों पर जो स्थगन लिए है उसे आज तक स्थगन नहीं हटाया जा सका है।

छ.ग. पदोन्नति नियम 2003 के नियम 06 के उप नियम 16 के संबंध में यह स्पष्ट किया गया है, कि रोस्टर का बिंदु आरक्षित ही रहेगा उपरोक्त व्यवस्था तब तक रहेगा जब तक उक्त आरक्षित बिंदु के लिए संबंधित वर्ग का व्यक्ति पदोन्नति के लिए विचार हेतु पात्रता ग्रहण नहीं कर लेता। लेकिन विभिन्न विभागों में इसका लगातार उल्लंघन कर अधिकारियों द्वारा पदोन्नति दी गई है। ऐसे अधिकारियों के खिलाफ धारा 6 में उल्लेखित प्रावधानों के अनुसार दंडित कराने, मुकदमा चलाने की अनुमति निर्देश दिए जाने की मांग किए हैं ।
इस ज्वलंत मुद्दे को लेकर अजजा शासकीय सेवक विकास संघ छत्तीसगढ़ द्वारा कईयों बार माननीय मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ को विभिन्न मौकों पर अवगत कराया गया है। आज तक इस पर कोई सकारात्मक पहल नहीं होने से अनुसूचित जनजाति वर्ग के शासकीय सेवकों में सरकार के प्रति हताशा से एवं नाराजगी है।
संघ के प्रांताध्यक्ष आर एन ध्रुव द्वारा पुनः महामहिम राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उइके जी, केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री श्री अर्जुन मुंडा जी, राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुसूचित जाति, जनजाति आयोग भारत सरकार नई दिल्ली, माननीय श्री भूपेश बघेल जी मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन, डॉ प्रेमसाय सिंह टेकाम आदिम जाति कल्याण मंत्री छत्तीसगढ़, अनुसूचित जाति, जनजाति आयोग छत्तीसगढ़, आदिवासी समाज के सभी मंत्री, सांसद एवं विधायक गण छत्तीसगढ़, चीफ सेक्रेटरी छत्तीसगढ़ को पत्र लिखकर निवेदन किए है कि जब तक माननीय उच्च न्यायालय में स्थगन समाप्त नहीं हो जाता तब तक किसी भी हालत में अनुसूचित जाति, जनजाति के लिए आरक्षित रिक्त पदों को नहीं भरा जाये उसे सुरक्षित रखा जावे और जितने सामान्य वर्ग के कर्मचारी अनुसूचित जाति, जनजाति केे लिये आरक्षित रिक्त पदों पर नियम विरूद्ध पदोन्नत हुये हैे,उसे तत्काल पदावनत किया जावे। कोरोना काल में जब लोग अपने अपने घरों में इस आपात स्थिति से बचने के लिए सुरक्षित थे। ऐसे समय में अनुसूचित जनजाति वर्ग के पदों के विरुद्ध हजारों की तादाद में अनारक्षित वर्ग के अधिकारी कर्मचारियों की पदोन्नति देने वाले अधिकारी के खिलाफ आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा 6 के कंडीका 2 परंतुक शासन से मुकदमा चलाने पूर्व मंजुरी क शर्त/ प्रावधान को विलोपित कर धारा 6 के तहत दंडात्मक कारवाई प्रारंभ करने का निर्देश तत्काल दिए जाने की मांग की गई। मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में संघ उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा। जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।