लो नि वि में अजा,अजजा वर्ग के वरिष्ठता सूची से छेड़छाड करवाने का किया जा रहा है प्रयास


छत्तीसगढ़ लोक निर्माण विभाग में विगत 25 वर्षो से स्थापित वरिष्ठता सूची जिसमें अनुसूचित जाति,अनुसूचित जाति एवं अन्य वर्ग के अभियंताओं के वरिष्ठता क्रम दर्ज है तथा प्रतिवर्ष अपडेट होकर प्रकाशित होता है एवं संबंधितों को प्रदाय किया जाता है इस वरिष्ठता सूचीक्रम को दैनिक वेतन भोगी से नियमित हुये उप अभियंताओं द्वारा साजिश के तहत पीछे करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि टर्न से पहले पदोन्नति का लाभ प्राप्त किया जा सके। इन दैनिक वेतन भोगी से नियमित हुये उप अभियंताओं की नियुक्ति विभाग में विधिवत नहीं हुआ है अर्थात इन्होंने किसी भी प्रकार के भर्ती के विज्ञापन हेतु आवेदन नहीं दियें हैं और न ही प्रतियोगिता परीक्षा और न ही साक्षात्कार दिये हैं । विभाग के नीचे स्तर के तत्कालीन अधिकारियों द्वारा अपने सगे-संबंधियों को उपकृत करने के लिये बिना किसी संवैधानिक नियुक्ति के कार्य पर नियमित उप अभियंताओं के तकनीकी सहायक के रूप में रखा गया था, जिनका युक्तियुक्त तरीके से भुगतान किया जाता था । आज 20 से 25 वर्ष पश्चात संवैधानिक प्रक्रिया के तहत शासन द्वारा नियुक्त अनुसूचित जाति,अनुसूचित जाति एवं अन्य वर्गो के उप अभियंताओं का वरिष्ठता क्रम के आधार पर पदोन्नति होने के आसार बने है तब इन आधे से अधिक दैनिक वेतन भोगी से नियुक्त हुये उप अभियंताओं द्वारा माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष दैनिक वेतन भोगी से नियुक्ति का शपथप़त्र देकर तदर्थ नियुक्ति बताकर दैनिक वेतन भोगी के रूप में विभाग में आने की तिथि से वरिष्ठता पाने की षडयंत्र किया जा रहा है। यदि प्रकरण की गंभीरता को गहराई से समझे बिना गलती से भी इन अभियंताओं को वरिष्ठता क्रम में आगे किया जाता है तो अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के 250-300 अभियंताओं का भविष्य चौपट हो जाएगा और शासन के समस्त विभागों में यही सिलसिला चालू हो जायेगा। परिणाम स्वरूप इनके साथ हुए घोर अन्याय के खिलाफ धरना प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष आर एन ध्रुव द्वारा महामहिम राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उइके जी, माननीय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी, लोक निर्माण विभाग मंत्री छत्तीसगढ़ शासन को पत्र लिखकर अनुसूचित वर्ग के अधिकारी कर्मचारियों के हितों की रक्षा करते हुए त्वरित न्याय की मांग किए हैं।
म.प्र. के एक पारित निर्णय का हवाला
मध्यप्रदेश में सन 1986 में श्री सतीश कुमार मण्डलोइ का तदर्थ (एडहाक) नियुक्ति विधिवत विज्ञापन प्रसारित कर चयन समिति का गठन कर अधिकृत सक्षम अधिकारी द्वारा स्वीकृत रिक्त पद पर किया गया था। जिसका नियमितीकरण हेतु श्री सतीश कुमार मण्डलोइ द्वारा म.प्र. राज्य एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल इंदौर में याचिका दायर किया गया था चूंकि तदर्थ नियुक्ति विधिवत हुआ था । इसलिए 1994 मे नियमितिकरण का निर्णय पारित हुआ था । इसी को आधार बनाकर माननीय उच्च न्यायालय में 60 उप अभियंताओं द्वारा याचिका दायर किया गया है। जबकि इनका नियुक्ति तदर्थ (एडहाक) न होकर दैनिक वेतन भोगी से नियमित के रूप में हुआ है ।
तीन अभियंताओं को किया जा चूका है रिवर्ट
श्री सतीश कुमार मण्डलोई के इस केस को आधार बनाकर विगत 3-4 वर्षो में विभाग के 3 उप अभियंताओं द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में याचिका दायर किया गया था जिसमें वो सफल भी हो गये थे लेकिन पुनः शासन के समिति द्वारा अमान्य करने के कारण वरिष्ठता क्रम से रिवर्ट भी किया जा चुका है ।