9 जून महानायक विरसा मुडां शहादत दिवस पर आप एक दीपक एक वृक्ष आवश्य लगाये

जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्युज

महानायक बिरसा मुडां ने अपनी अन्तिम साँसें 9 जून 1900 को आंग्रेजों द्वारा जहर देकर मार दिया गया जब डा. एन्डर सन उन्हें इंजेक्शन दे रहेंगे थे तो उनके हाथ काप रहें थे बिरसा ने कहा था डॉक्टर का काम है जिंदगी देना लेना नहीं । डॉक्टर एन्डर सन रोने लगे ओर कहा मैं मजबूर हूँ अग्रैजी हुकूमत का आदेश है तब बिरषा ने कहा था कि डाक्टर मेरी एक ख्वाहिश हैं जो तुम्हें पूरा करना जब मैं मोत के गले लग जाऊं तो मेरे पूरे शरीर को ढंक देना किन्तु मेरे पैरों को खुला रखना जिससे कि समाज को बहुत चलना वाकी हैं
आज देश की जो स्थिति है, आदिवासी समाज की समस्याएं हैं, उसे बिरसा ने पहले भांप लिया था। यह बताता है कि बिरसा कितने दूरदर्शी थे। इसलिए उन्हें भगवान बिरसा कहा जाता है। आजादी के बाद हमने बिरसा मुंडा की शहादत को तो याद रखा, लेकिन हम उनके मूल्यों, आदर्शों एवं प्रेरणाओं से दूर होते गये। हमारी सत्ताएं उसी व्यवस्था की पोषक होती गयीं, जिनके विरुद्ध उन्होंने लड़ाई लड़ी।

जब तक सूरज चाँद रहेगा
महानायक बिरसा मुंडा आपका नाम रहेगा