आपके PF जमा पर कितना मिलेगा ब्याज और कैसे जुड़ता है इंटरेस्ट रेट? ऐसे करें कैलकुलेट

दुनिया

on June 18, 2021

By Jiwrakhan lal Ushare cggrameen nëws

कर्मचारियों के लिए PF बुढ़ापे के लिए अच्छे भविष्य के लिए की जा रही बचत का सबसे अच्छा तरीका है. क्या आपको पता है कि पीएफ पर ब्याज पर किस तरीके से कैलकुलेट होता है.आप पीएफ में सालाना कितना पैसा जमा कर सकते हैं.

एंप्लॉयी प्रॉविडेंट फंड रिटायरमेंट के लिए बचत करने का एक जरिया है. किसी कंपनी में 20 या अधिक एंप्लॉयी होने पर EPF में योगदान देना होता है. इसमें एंप्लॉयी की ओर से बेसिक सैलरी का 12 प्रतिशत जमा होता है और एंप्लॉयर 8.33 प्रतिशत एंप्लॉयीज पेंशन स्कीम और 3.67 प्रतिशत EPF में जमा करता है. मासिक ऑपरेटिंग बैलेंस के आधार पर इंटरेस्ट दिया जाता है जिसे फाइनेंशियल ईयर के अंत में फंड में जोड़ा जाता है.

PF का वर्तमान इंटरेस्ट रेट क्या है?

EPF पर इंटरेस्ट रेट मार्केट की स्थिति पर निर्भर करता है. इस पर वर्तमान इंटरेस्ट रेट 8.5 प्रतिशत है जो पिछले फाइनेंशियल ईयर के समान है.

इंटरेस्ट कैलकुलेशन

एक एंप्लॉयी की बेसिक सैलरी और डियरनेस अलाउंस को 15,000 रुपये और इंटरेस्ट रेट 8.5 प्रतिशत मानने पर इंटरेस्ट को इस तरह कैलकुलेट किया जा सकता है.

बेसिक सैलरी और DA = 15,000 रुपये

EPF में एंप्लॉयी का योगदान = 15,000 रुपये का 12% = 1,800 रुपये

EPS में एंप्लॉयर का योगदान = 15,000 रुपये का 8.33% = 1,250 रुपये

EPF में एंप्लॉयर का योगदान = 15,000 रुपये का 3.67% = लगभग 550 रुपये

कुल योगदान = 2,350 रुपये

वर्तमान इंटरेस्ट रेट = 8.5% प्रतिवर्ष

इंटरेस्ट मासिक ऑपरेटिंग बैलेंस पर कैलकुलेट किया जाता है और इस वजह से प्रति माह इंटरेस्ट होगा = 8.5% /12 = 0.7083%

पहले महीने के लिए EPF पर कोई इंटरेस्ट नहीं

दूसरे महीने का योगदान = 2,350 रुपये

कुल EPF बैलेंस = 4,700 रुपये.

EPF योगदान इंटरेस्ट = 4,700 रुपये * 0.7083% = 33.29 रुपये.

PF में सालाना कितना कर सकते हैं जमा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल में ही बताया था कि टैक्स फ्री PF कॉन्ट्रीब्यूशन की लिमिट कर्मचारियों के लिए बढ़ाकर 5 लाख सालना कर दी है. इससे पहले बजट में इस लिमिट को 2.5 लाख रुपये सालाना किये जाने का प्रस्ताव रखा गया था, जिसे बाद में बदल दिया गया.

PF में कितना कर सकते हैं जमा

कर्मचारियों को पीएफ बेसिक सैलेरी का 12 फीसदी अंशदान करना होता है. प्राइवेट कर्मचारियों को पीएफ का अंशदान बढ़ाने का विकल्प कम होता है लेकिन सरकारी कर्मचारियो के पास इस लिमिट को बढ़ाने का विकल्प होता है.