नल से जल की आपूर्ति 66% स्कूलों और 60% आंगनवाड़ी केंद्रों तक पहुंची


10 महीनों में नल जल कनेक्शनों में हुई 18 गुना वृद्धि से ‘जल जीवन मिशन’ ने
बच्चों के स्वास्थ्य और स्वच्छता को बेहतर बनाने में दिया भारी योगदान

कोविड-19 महामारी के दौर में स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और आश्रमशालाओं में बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य और स्वच्छता प्रदान करने के लिए उन्हें स्वच्छ नल जल उपलब्ध कराने हेतु 2 अक्टूबर 2020 को एक विशेष अभियान छेड़ा गया, ताकि इन संस्थानों में नल से जल की आपूर्ति की व्यवस्था हो सके। और, अभियान शुरू होने के 10 महीनों से भी कम की अवधि में देशभर के गांवों में स्थित 6.85 लाख स्कूलों (66%) और 6.80 लाख आंगनवाड़ी केन्द्रों (60%), 2.36 लाख (69%) पंचायत भवनों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में नल जल आपूर्ति की व्यवस्था कर दी गई है। नौ राज्यों : हिमाचल प्रदेश, पंजाब, गुजरात, आंध्रप्रदेश, गोवा, सिक्किम, तमिलनाडु, केरल, हरियाणा तथा संघ राज्य क्षेत्र अंडमान और निकोबार द्वीप समूह ने कोविड-19 महामारी और उसके परिणामस्वरूप बार-बार लगे लॉकडाउन से उत्पन्न हुए अवरोधों के बावजूद अपने यहां के सभी स्कूलों, आश्रमशालाओं और आंगनवाड़ी केंद्रों में नल से जल पहुंचाने की व्यवस्था कर दी है। स्कूलों और आश्रमशालाओं के एक बार फिर खुल जाने पर वहां बच्चों को अब उपलब्ध होने वाले साफ नल जल से बेहतर स्वास्थ्य, स्वच्छता और साफ-सफाई रखने में भारी मदद मिलेगी।
बच्चों के लिए साफ पानी सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सभी राज्यों/ सं.रा.क्षे. से अपील की थी कि वे प्रत्येक स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र में यह सुविधा नल जल कनेक्शन के माध्यम से प्राथमिकता के आधार पर पहुंचाएं। प्रधानमंत्री की परिकल्पना को साकार करने के लिए केंन्द्रीय जल शक्ति मंत्री, श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने देशभर में बच्चों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की तत्काल आवश्यकता को देखते हुए, तथा इस बारे में जागृति फैलाने के लिए 2 अक्टूबर 2020 को 100-दिवसीय अभियान की शुरुआत की थी। राष्ट्रीय जल जीवन मिशन ने सभी राज्यों/ सं.रा.क्षे. से संपर्क कर यह सुनिश्चित करने को कहा कि अभियान के दौरान ग्राम सभाओं का आयोजन कर सभी स्कूलों, आश्रमशालाओं, आंगनवाड़ी केंद्रों, ग्राम पंचायत इमारतों और स्वास्थ्य केंद्रों तथा आरोग्य केंद्रों में नल जल उपलब्ध कराने के लिए प्रस्ताव पारित किया जाए।
इस तीव्र अभियान के फलस्वरूप 10 महीनों से भी कम समय में 6.85 लाख स्कूलों और 6.80 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों में पीने के लिए और ‘मिड-डे मील’ पकाने के लिए नल से जल पहुंचने लगा है; 6.18 स्कूलों में शौचालयों में नल का पानी उपलब्ध है तथा 7.52 स्कूलों में नल के पानी से हाथ धोने की व्यवस्था हो चुकी है। नल जल की आपूर्ति से न केवल बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद मिलती है बल्कि उन्हें पानी से फैलने वाली बीमारियों से भी बचाया जा सकता है। पानी की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए, तथा इस्तेमाल हो चुके पानी के शोधन के लिए 91.9 हजार स्कूलों में वर्षा-जल संचन तथा 1.05 लाख स्कूलों में ‘ग्रे वॉटर’ (गंदला पानी) प्रबंधन प्रणालियां स्थापित की जा चुकी हैं। इन प्रयासों से न केवल जल की उपलब्धता बढ़ेगी बल्कि सीखने की इस उम्र में बच्चों में जल प्रबंधन के बारे में जिज्ञासा पैदा होगी और उन्हें इस दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।
गंदे पानी और आस-पास स्वच्छता के अभाव के कारण बच्चों को पेचिश, दस्त, हैजा और टाइफाइड, आदि बीमारियों की चपेट में आने की आशंका बनी रहती है। इससे उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। जिन इलाकों में पेयजल के मूल स्रोत आर्सेनिक, फ्लोराइड, भारी धातुओं, आदि से दूषित हैं वहां ऐसे पानी को लंबे समय तक पीते रहने से भी स्वास्थ्य को भारी नुकसान पहुंच सकता है। अतः इस विशेष अभियान के तहत स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में स्वीकृत गुणवत्ता वाला साफ पानी पीने और ‘मिड-डे मील’ पकाने के लिए; हाथ धोने के लिए तथा शौचालयों में उपलब्ध कराया जा रहा है।
कोविड-19 महामारी की रोकथाम के लिए बार-बार साफ पानी से हाथ धोने की आवश्यकता को भी ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय जल जीवन मिशन सभी स्कूलों, आश्रमशालाओं और आंगनवाड़ी केंद्रों में शीघ्रातिशीघ्र सुरक्षित नल जल की आपूर्ति किए जाने पर जोर दे रहा है, ताकि इन संस्थानों के बच्चों, अध्यापकों, कर्मचारियों तथा देखभाल करने वाले सभी व्यक्तियों के हितों का ध्यान रखा जा सके।
15 अगस्त 2019 को ‘जल जीवन मिशन’ की घोषणा के समय देश के कुल 18.98 करोड़ ग्रामीण घरों में से मात्र 3.23 करोड़ (17%) घरों में ही पीने के पानी का नल कनेक्शन था। जबकि कोविड-19 महामारी, और उसके कारण लगे अनेक लॉकडाउन के बावजूद, ‘जल जीवन मिशन’ ने पिछले 23 महीनों में 4.57 करोड़ नल जल कनेक्शन उपलब्ध कराए हैं। इसके फलस्वरूप आज देश के 7.80 करोड़ (41.14%) ग्रामीण घरों में नल से जल प्राप्त हो रहा है। गोवा, तेलंगाना, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा पुदुचेरी अपने यहां के सभी ग्रामीण घरों (100%) में नल से जल पहुंचा कर ‘हर घर जल’ बन गए हैं। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ संबंधी प्रधानमंत्री, श्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना के ही अनुरूप ‘जल जीवन मिशन’ का भी सिद्धांत है कि ‘कोई छूट न जाए’ और प्रत्येक गांव के प्रत्येक परिवार को नल जल कनेक्शन निश्चित रूप से उपलब्ध कराया जाए। इसी का परिणाम है कि आज देश के 74 जिलों और लगभग 1.05 लाख गांवों में प्रत्येक ग्रामीण घर में नल जल है और वे ‘हर घर जल’ बन गए हैं। जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन की अध्यतन स्थिति JJM डैश्बोर्ड https://ejalshakti.gov.in/jjmreport/School/JJMSchool_India.aspx पर उपलब्ध है।
प्रत्येक व्यक्ति के लिए पेय जल की गुणवत्ता की जानकारी के लिए वॉटर क्वालिटी प्रबंधन सूचना तंत्र Water Quality Management Information System (WQMIS), तैयार किया गया है। इसके अंतर्गत कोई भी दूषित पानी का सैम्पल मिलने पर सम्बंधित अधिकारी को एक ऑटमैटिक अलर्ट भेजा जाता है ताकि संज्ञान लेकर तुरंत उसे ठीक किया जा सके। यह पोर्टल https://neer.icmr.org.in/website/main.php वेबलिंक पर उपलब्ध है।

कई डिवेलप्मेंट एजेंसीस जैसे UNOPS, UNICEF और WHO आदि जल जीवन मिशन के बारे में जागरूकता बढ़ाने, जल संचयन, तथा हाथों की नियमित धुलाई आदि WASH इंटर्वेन्शंज़ के माध्यम से स्कूलों में इस दिशा में सहयोग कर रही हैं।
‘जल जीवन मिशन’ के अंतर्गत स्थापित होने वाली जल आपूर्ति सुविधाओं का प्रचालन और रखरखाव ग्राम पंचायत तथा/ अथवा उसकी उप-समिति अर्थात ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति या पानी समिति द्वारा किया जाता है।
प्रधानमंत्री, श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 15 अगस्त 2019 को लालकिले की प्राचीर से घोषित ‘जल जीवन मिशन’ देश के प्रत्येक ग्रामीण घर में 2024 तक नल कनेक्शन के माध्यम से पीने का शुद्ध पानी पहुंचाने के उद्देश्य से राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों के सहयोग से चलाया जा रहा है। पांच साल के इस मिशन के लिए 3.60 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।