संवैधानिक हितों की रक्षा हेतु हजारों की तादाद में आरक्षित वर्ग द्वारा किया गया जंगी प्रदर्शन*

जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्युज
अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ छत्तीसगढ़ द्वारा आंदोलन के चौथे चरण में रायपुर के बूढ़ा तालाब से विराट रैली प्रदर्शन कर सरकार को विभिन्न संवैधानिक मांगों के संबंध में ध्यान आकृष्ट कराएं।
*प्रमुख मांग:-*
छत्तीसगढ़ के विभिन्न विभागों में पदोन्नति आरक्षण नियम की धज्जियां उड़ाते हुए हाईकोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या करके नियम विरुद्ध कोरोना काल में हजारों की तादाद में असंवैधानिक पदोन्नति की गई है। जिससे आदिवासी समाज एवं अनुसूचित जाति वर्ग के अधिकारी / कर्मचारी पदोन्नति से वंचित हो रहे हैं ।इस संबंध में जब तक माननीय उच्च न्यायालय में स्थगन समाप्त नहीं हो जाता तब तक किसी भी हालत में अनुसूचित जाति/ जनजाति के लिए आरक्षित रिक्त पदों को नहीं भरे जाने, उसे सुरक्षित रखे जाने और जितने सामान्य वर्ग के कर्मचारी अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए आरक्षित पदों पर नियम विरुद्ध पदोन्नत हुए हैं उसे तत्काल पदानवत किया जाकर पदोन्नति नियम 2003 एवं आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा 06 नियम 1998 एवं समय-समय पर जारी निर्देशों का उलंघन कर नियम विरुध्द पदोन्नति देने वाले अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही एवं धारा 6 आरक्षण अधिनियम 1994 के तहत दंडात्मक कार्यवाही किये जाने के साथ आरक्षण बहाली हेतु विधानसभा मानसून सत्र में विधेयक पारित किया जावे।
ज्ञात हो वर्ष 2019 में हाईकोर्ट ने अपने निर्णय के अनुसार छत्तीसगढ़ पदोन्नति अधिनियम 2003 के बिंदु क्र 5 को स्थगित किया। पदोन्नति नियम 2003 को रद्द नहीं किया है।

जिसमें अनुसूचित जनजाति के 32%और अनुसूचित जाति के 12% आरक्षण का प्रावधान है।और राज्य शासन को निर्देशित किया कि राज्य में अनुसूचित जाति, जनजाति को प्रतिनिधित्व के आधार पर पदोन्नति सुनिश्चित करें।जिसमे ऍम नागराज एवं जनरैल सिंह के फैसले का परिपालन हो। हाईकोर्ट द्वारा नियमानुसार पदोन्नति दिए जाने की बात कही गई है । लेकिन छत्तीसगढ़ के विभिन्न विभागों में अपने अपने विवेक से वरिष्ठता के आधार पर बिना आरक्षण रोस्टर का पालन किए..रोस्टर से भरे जाने वाले पदों को भी सामान्य वर्ग से पदोन्नति देकर भर रहे हैं। जिसके कारण आरक्षण की अवधारणा ही खत्म हो गया है। …….
छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल के अधिकारी इससे एक कदम आगे बढ़कर पदोन्नति के लिए अपने स्वयं से नियम पारित कर 50-50%वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति दे रहे है। इन अधिकारियों को मालूम है कि पावर कंपनी में टॉप के सभी कैडरों चीफ इंजीनियर , सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के अधिकारी वरिष्ठ है और इस पदोन्नति से टॉपमोस्ट पदों पर अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों का प्रभुत्व हो जायेगा। ऐसा सोचकर पावर कंपनी के संचालक मण्डल ने 50-50% का फार्मूला अपनाया है। उपरोक्त फार्मूला के अनुसार अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के वरिष्ठ लोगों को 50% पद मिला और 50%पद पर सामान्य लोग आ गए। जबकि उक्त स्थान पर वरिष्ठता के आधार पर अनुसूचित जाति/ अनुसूचित के अधिकारी पदोन्नत होते..
इसके अतिरिक्त बैकलॉग के पदों पर सामान्य वर्ग के लोगों को पदोन्नति प्रदान किया जा रहा है। जिससे अनुसूचित वर्ग के विशेष कर अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों को बहुत नुकसान हो रहा है।
इसलिए पदोन्नति में आरक्षण के संबंध में जब तक माननीय न्यायालय में स्थगन समाप्त नहीं हो जाता तब तक किसी भी हालत में अनुसूचित जाति/ जनजाति के लिए आरक्षित रिक्त पदों को नहीं भरा जाए उसे सुरक्षित रखा जावे और जितने सामान्य वर्ग के कर्मचारी अनुसूचित जाति जनजाति के लिए आरक्षित पदों पर नियम विरुद्ध पदोन्नत हुए हैं उसे तत्काल पदानवत किया जावे और कई महीनों से लंबित शासन द्वारा पदोन्नति के लिए बनाई गई पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट के साथ अपना पक्ष हाईकोर्ट में अविलम्ब प्रस्तुत करवाया जावे..,
फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी करने वालों को तत्काल सेवा से बर्खास्त कर उनके खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही हो।
फर्जी जाति प्रमाण पत्र धारियों को जिला प्रमुख एवं अन्य महत्वपूर्ण पदो से तत्काल हटाने राज्य शासन के आदेश का पालन करवाई जावे।
न्यायालय से स्थगन हटाने विधि विभाग से समीक्षा करवाने पैरवी के लिये वरिष्ठ अधिवक्ताओं , विधि अधिकारियों की समिति गठित कर सुप्रीम कोर्ट के न्याय दृष्टांतों के आधार पर स्थगन हटवाने महाधिवक्ता को निर्देश दिया जावे।
सभी विभाग में आरक्षण की मानिटरिंग हेतु स्थाई समिति एवं नोडल अधिकारी की नियुक्ति हो।
छत्तीसगढ़ में संचालित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में शिक्षक व कर्मचारी के लगभग 12000 पदों की भर्ती में स्कूल शिक्षा विभाग के भर्ती नियम 2019, संविदा नियम 2012 के तहत व्याख्याता की संचालक लोक शिक्षण व शिक्षक की संयुक्त संचालक स्तर से भर्ती किया जाकर राज्य/ संभाग/ जिला स्तर का आरक्षण नियम का पालन किया जावे। जिससे अनुसूचित जाति ,जनजाति वर्ग के योग्य बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सके।
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए स्कॉलरशिप हेतु निर्धारित ढाई लाख की आय सीमा की बाध्यता मध्य प्रदेश की भांति यहां भी समाप्त किया जावे।
छात्रवासों,आश्रमों स्कुलों को पूर्व की तरह आदिम जाति अनु.जाति कल्याण विभाग में पूर्व की तरह शिक्षा विभाग से अलग किया जावे।
अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन को मानीटर करने राज्य संरक्षण कक्ष की स्थापना किया जावे।
अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार के प्रकरणों मे अन्य राज्यों की तरह नियमित संवर्ग के वरिष्ठ अभियोजन अधिकारियों से पैरवी करवाकर पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाई जावे ।
अनुसूचित जनजाति वर्ग के कई अधिकारी कर्मचारी निलंबित हैं इन्हें बिना दंड दिए विभागीय जांच प्रकरणों को प्रशासकीय विभाग द्वारा स्वयं के स्तर से ही समाप्त किए जाएं।अनुसूचित जनजाति वर्ग के अधिकारी कर्मचारीयों के विभागीय जांच,निलंबन,अपराधिक प्रकरणों के शीघ्र निराकरण किया जावे।
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के बैकलाग पदों की जानकारी सभी विभागों को देने व रिक्त पदों को भरने विशेष भर्ती अभियान प्रारंभ किया जावे।
संघ के प्रांताध्यक्ष आर एन ध्रुव द्वारा सर्व आदिवासी समाज, आरक्षित वर्ग के विभिन्न सामाजिक संगठन, आरक्षित वर्ग के अधिकारी कर्मचारियों को बूढ़ा तालाब रायपुर में आहूत विराट प्रदर्शन रैली कार्यक्रम में संवैधानिक हितों की रक्षा हेतु दो हजार से अधिक वाहनों में पचास हजार की तादाद में शांतिपूर्ण ढंग से उपस्थिति प्रदान करने पर हार्दिक आभार व्यक्त किए हैं ।