देव न्यायालय-सुप्रीम कोर्ट माई भंगाराम जी का स्थान,

केशकाल -जिला कोंडागांव(बस्तर)यहाँ होती है देवतावों कि भी पेसी होता है देवी देवताओं का न्याय समाधान-जहाँ दिया जाता है देवी, देवतावों को दंड ,सनातन संस्कृति के सभी देवी देवताओं की होती है उपस्थिति और समाधान ,देवतावों की शक्ति और सत्यता की होती है परीक्षा असत्य होने पर दंड स्वरुप नष्ट करने का विधान(सजा) ,,छत्तीसगढ़, उड़ीसा, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र के लगभग 25 हजार देव स्थान का ये न्यायालय है,, पीढ़ियों का हिसाब और न्याय, दंड, समाधान स्थल ,,,केसकाल को दक्षिण का द्वार भी कहते हैं ,इस पूरी सभ्यता का संचालन देवी देवता से संचालित है ,यह सनातन संस्कृति के लिये गौरव है कि युगों की मान्यता सतयुगीन का प्रमाण और संचालन आज भी है ,और प्रमाणित भारतीय मान्यताओं के जितने भी आराध्य देवी/देवता हैं और उनका सामाजिक प्रभाव और पारिवारिक प्रभाव कारण उनके समाधान के लिए लगता है माई भंगाराम जी का कोर्ट और होती है सुनवाई अपराधी को दिया जाता है दंड, आर्थिक या कार्मिक,, देवी/देवता को असत्य मनगढंत पाए जाने पर यही नष्ट किया जाता है,, भारतीय जन मानस अपने अतीत से और ग्रंथो से अपरिचित है यहाँ आपको 4रो वेद के दर्शन हो जाएंगे मानव सभ्यता और विकास में आज भी भारतीय दर्सन यथार्थ और प्रामाणिक है यह अदभुत है मनुष्य की परेशानियों के आध्यात्मिक कारण और उनका हल ये चमत्कार है जो कई पीढ़ियों के प्रभाव और उनका कारण बताते हुए उनका निदान किया जाता है यह वैज्ञानिक जीवन पद्धति में अविश्वसनीय सा लगता है किंतु विश्व की धर्म भूमि भारत मे उसके गर्भ स्थल में सतयुग लगभग 20 हजार साल पुरानी या उससे भी पुरानी संस्कृति-परंपरा का आज भी निर्वहन होता  जय माई भंगाराम