सिविल न्यायालय के समकक्ष अधिकार महिला आयोग को प्राप्त है।*

जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्युज

*पुलिस थाना, न्यायालय एवं महिला आयोग में कब और कैसे कार्यवाही किया जाये*

*पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के छात्राओं के लिए वेबिनार।*

रायपुर 16अगस्त 2021/राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा प्रायोजित वेबिनार श्रृंखला के तहत छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग द्वारा आज आयोजित वेबिनार में पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के शारीरिक विभाग की अध्यक्ष रीता वेणु गोपाल के साथ विश्वविद्यालय के 50 प्रोफेसर और छात्र-छात्राओं ने इस वेबिनार में भाग लिया।
आज का विषय ‘‘पुलिस थाना, न्यायालय एवं महिला आयोग में कब और कैसे कार्यवाही किया जाये‘‘ पर वेबिनार आयोजित किया गया। इस वेबिनार में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक, श्रीमती हमीदा सिद्दीकी, उच्च न्यायालय अधिवक्ता, श्रीमती वर्षा मिश्रा (डीएसपी), अभय कुमार देवांगन, उपसंचालक महिला एंव बाल विकास मुख्य वक्ता रहे।
आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने सम्पूर्ण विषय को समेकित करते हुये जानकारी दिया। महिला आयोग में एक साल में 62 जनसुनवाई हुई है, (इन सुनवाई में दोनों पक्षों को सुना जाता है, समझाइश दिया जाता है।) एक साल में आयोग में 1,401 प्रकरणों की सुनवाई हो चुकी है जिसमें से 410 प्रकरणों में सुनवाई कर उन्हें नस्तीबद्ध किया जा चुका है। महिला आयोग में केवल महिलाओं का आवेदन ही लिया जाता है। पूरी सुनवाई निःशुल्क होती है किसी भी महिला को कोई खर्च वहन नहीं करना पड़ता। महिला आयोग के आदेशों को चुनौती केवल उच्च न्यायालय में ही दिया जा सकता है। किसी भी सरकारी दफ्तर, कोई भी संस्थान जहां पर 10 या 10 से अधिक सदस्य काम करते हैं वहां पर आंतरिक परिवाद समिति का गठन किया जाना आवश्यक है। इसमें 50 महिला सदस्य का होना आवश्यक है।
वक्ता हमीदा सिद्दीकी अधिवक्ता ने बताया कि – महिलाओं को अपनी संपत्ति पर अधिकार तो है ही उनका अपने शरीर पर भी अधिकार है। महिलाएं काम करने जाती है बहुत से पुरूष इस बात को स्वीकार नहीं कर पाते है उनको हर तरह से रोकने का प्रयास करते है उनके काम में बाधा उत्पन्न करते है, उन्हें आगे बढ़ने से रोका जाता है। बलात्कार के मामलों में निर्भया केस के बाद इस पर व्यापक संशोधन हुआ जिसमें बहुत से प्रावधान जोड़े गये, जिससे महिलाओं को बहुत फायदा हुआ है। महिलाएं अपने अधिकारों को समझें यदि उसके विरूद्ध कुछ अपराध होता है तो वह तुरंत रिपोर्ट करें। (ससुराल में हो या काम करने के स्थान पर) धारा 498 के केस में आपको दहेज के सामान की लिस्ट और किसने आपके साथ क्या किया है, उसकी विस्तृत जानकारी देनी होगी। जिसके आधार पर आपकी शिकायत दर्ज होगी। यदि आप शिकायत दर्ज कराती है तो उसके साथ शिकायत से संबंधित सम्पूर्ण दस्तावेज, गवाहों को अपने साथ रखें और चालान की कॉपी आवश्यक रूप से रखें। राज्य में महिला उत्पीड़न से संबंधित शिकायत हेल्पलाइन नंबर 1091, 112, 181 इनका इस्तेमाल अधिक से अधिक किया जाना चाहिये।

वर्षा मिश्रा डीएसपी ने बताया कि – महिलाओं के साथ 4 प्रकार के शोषण होते है – शारीरिक, मानसिक, आर्थिक, लैंगिक। इनमें 10 लैंगिक केस होते है और 90 केस हिस्ट्री वाले होते है जो पहले से चले आ रहे होते है। अगर आपके साथ ऐसा कुछ होता है तो उसका पुनः अवलोकन करें और उसे एक आवेदन के रूप में लिखकर दे। कई बार ऐसा होता है कि महिला मौखिक में सभी बातें बता नहीं पाती है, इसलिए सभी तथ्यों की विस्तृत जानकारी आवेदन के रूप में दे सकती है। क्योंकि जो आवेदन होता है वहीं एफआईआर के रूप में दर्ज होता है। अक्सर यह होता है कि महिला इस बात से घबराती है कि उसके नाम का उल्लेख होगा, महिला अपराधों में गोपनीयता बरती जाती है, उसके नाम का कहीं पर उल्लेख नहीं होता है। वर्तमान में ऑनलाईन आवेदन भी किया जा सकता है अपने एफआईआर को पुनः पढ़ सकते है। यदि कोई बात छूटी हो तो उसे पुनः लिखवाने के बाद संतुष्ट होकर हस्ताक्षर करें, सारे बातें खुलकर विवेचक को बताये, थाना प्रभारी के संपर्क में रहें, आवेदन करने में जो भी विलम्ब का कारण है उसे अवश्य बताये, अपने केस को मजबूत बनाने की कोशिश करें। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण निःशुल्क सेवा प्रदान करता है। इसमें कुछ भी समस्या आती है तो आप वरिष्ठ अधिकारियों से सलाह ले सकती है।

अभय देवांगन ने बताया कि – महिला आयोग एक ऐसी संस्था है जो पूरी तरह से निःशुल्क कार्य करती है, यहां पर एक आवेदन मात्र देना पड़ता है। सिविल न्यायालय के समकक्ष अधिकार महिला आयोग को प्राप्त है, जिससे किसी भी व्यक्ति को न्यायालय जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। महिला आयोग इतना अधिक प्रभावशाली है कि महिलाओं से संबंधित दहेज प्रताड़ना, घरेलू हिंसा, कार्यस्थल पर प्रताड़ना से संबंधित एवं अन्य शोषण से संबंधित मामलों पर आवेदन कर सकते है। महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों के लिये हर तरह के मामलों पर न्याय दिलाने का प्रयत्न किया जाता है। महिला आयोग में परिवार परामर्श से सलाह भी लिया जा सकता है।

महिला आयोग की इस वेबिनार श्रृंखला की खासियत यह है कि सभी भाग लेने वाले सदस्यों को पूरी श्रृंखला सुनने के पश्चात् उनके प्रश्न मंगाये जाते है और प्रश्नों के उत्तर वक्तागण और अध्यक्ष द्वारा दिये जाते है। जिसमें पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के सभी छात्र छात्राओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।