साधु के भेष मे आदिवासियों की संस्कृति व हक अधिकार को खत्म करने कि, की जा रही षडयंत्र का हुआ पर्दाफाश*

जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्युज

देवदाहरा- डोकला पारंपरिक नार्र व्यवस्था के सरहद सीमा अंतर्गत आती है। ग्राम पंचायत डोकला सरपंच, ग्राम-पटेल, कोटवार, गायता सिरहा, देवपंच को कावंरिया द्वारा डोकला से जल ले जाने की कोई सुचना/जानकारी नही है। गांव मे कोई भी नवीन कार्य करने से पुर्व पेन कड़ा मे पारंपरिक रूप से सेवा अर्जी की जाती है। ग्राम सभा- डोकला के बिना अनुमति से पेन ठाना(देव स्थल) से पानी/माटी उठाना ग्राम की रूढ़ि प्रथा व पारंपरिक संस्कृति को दूषित किया जाना स्पष्ट होता है।
जबकि अनुच्छेद 13(3)(क), व अनुच्छेद 19(5)(6) (ट्राईबल क्षेत्र मे ट्राईबल संस्कृति,रीति,रिवाज, बोली-भाषा को प्रभावित करने वाले बाह्य संस्कृति को वर्जित करता है) का स्पष्ट उलंघन है।

शासनसाधु के भेष मे आदिवासियों की संस्कृति व हक अधिकार को खत्म करने कि, की जा रही षडयंत्र का हुआ पर्दाफाश* प्रशासन का गोल गोल जवाब भी तथाकथित साधु से मिला होना प्रतीत होता है। ऐसे ही अधिकारियों के कारण आदिवासियों की रूढ़ि पारंपरिक संस्कृति की सुरक्षा व हक अधिकार की बातें सिर्फ संवैधानिक किताबों से धरातल तक पहुँचने मे समय लगता है और पाखंडवाद को बढ़ावा मिलता है।