सर्व आदिवासी समाज ने की आर्थिक नाकाबंदी, प्रदेश के अनेक जिलों में किया चक्का जाम

जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्युज
बालोद जिले में आर्थिक नाकेबंदी मानपुर चौक दल्ली राजहरा झारन दल्ली आर्थिक नाकेबंदी में आदिवासी अपनी मांगों को लेकर रोड के साथ-साथ ट्रेन पटरी पर भी बैठ गया जिसका नेतृत्व बालोद जिला सर्व आदिवासी उपाध्यक्ष गंगा दर्रो  रेवा रावटे गगराले जनक लाल ठाकुर डौंडी ब्लाक सर्वा आदिवासी  समाज अध्यक्ष मोहन हिडको  डौडी ब्लॉक गोंड समाज अध्यक्ष आत्मा कौर सचिव चंद्रभान गावड़े जस मंडावी कोषाध्यक्ष सर्व आदिवासी महासचिव सुनहेर कोसमा गौतम मानकर सचिव  गजेंद्र रावटे कोषाध्यक्ष दरबार उसेंडी अर्जुन कुमेटी बन्धुटेकाम मंडावी

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सर्व आदिवासी समाज ने विभिन्न मांगों को लेकर प्रदेश भर में आर्थिक नाकेबंदी शुरू कर दी है। इसके तहत अनेक स्थानों पर मुख्य मार्गों को जाम कर दिया गया है, वहीं बालोद जिले के मानपुर में आन्दोलंकारी रेलवे ट्रैक पर बैठ गए।

सुकमा जिले के सिलगेर में हुए गोली कांड में कार्रवाई, पेसा कानून और पदोन्नति में आरक्षण सहित 9 मांगों को लेकर सर्व आदिवासी समाज के बैनर तले आर्थिक नाकेबंदी की घोषणा की गई थी। इसी के तहत प्रदेश कई जिलों में आदिवासियों ने प्रमुख मार्गों को जाम कर दिया है। बलौदा बाजार, बालोद, बिलासपुर, रायगढ़, गरियाबंद, धमतरी, राजनांदगांव, दल्ली राजहरा, कांकेर, नारायणपुर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, सरगुजा सहित आदिवासी बाहुल्य इलाकों में इनका आंदोलन चल रहा है।

ट्रैक पर बैठे, पर नहीं आई रेल गाड़ी

आदिवासी समाज के लोगो ने बालोद में रेल सेवा बाधित करने की नीयत से दिल्ली राजहरा – दुर्ग रेल मार्ग पर जाम लगा दिया, और ट्रैक पर बैठ गए। लोग काफी देर तक बैठे रहे, मगर कोई भी रेलगाड़ी नहीं आयी। पता चला कि रेल प्रबंधन ने इस आंदोलन को देखते हुए इस मार्ग की गाड़ियों को ही कैंसल कर दिया है। जिसके बाद आंदोलनकारी यहां से हट गए और जिले की मुख्य सड़क पर जाम लगा दिया।

जाम से जनजीवन प्रभावित

प्रदेश के कई जिलों में सड़क पर जाम लगा देने से लोगो की आवाजाही प्रभावित हो रही है। यात्री बसों के पहिये भी थम गए हैं। छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बीएस रावटे ने कहा कि जब तक मांग पूरा नहीं होगी तब तक आर्थिक नाकेबंदी जारी रहेगी। बताया जा रहा है कि इस आंदोलन से एक और धड़े ने खुद को अलग रखा हुआ है। इनका आरोप है कि इस आंदोलन का नेतृत्व स्वयंभू अध्यक्ष और अन्य मौका परस्त आदिवासी नेता कर रहे हैं।