आदिवासियों के लिए अफसरों की समिति:CS की अध्यक्षता में 9 अफसरों को समाधान का जिम्मा, PESA लागू करने के जिए जरूरी उपाय भी सुझाएंगे; सरकार का असंतोष दूर करने का

सामान्य प्रशासन विभाग ने समिति का गठन कर दिया है। अब मुख्य सचिव इसकी बैठकों की तारीख तय करेंगे। - Dainik Bhaskar

जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्युज सामान्य प्रशासन विभाग ने समिति का गठन कर दिया है। अब मुख्य सचिव इसकी बैठकों की तारीख तय करेंगे।

छत्तीसगढ़ में आदिवासी समाज खासकर बस्तर की जनजातियों के असंतोष को दूर करने के लिए सरकार ने सीनियर अफसरों की एक समिति बनाई है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली इस समिति में 8 सदस्य हैं। इस समिति को असंतोष के समाधान का जिम्मा दिया गया है। समिति के अफसर PESA यानी “पंचायत – (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) कानून’ को लागू करने के लिए जरूरी उपाय भी सुझाएंगे। इसको लेकर सामान्य प्रशासन विभाग ने सोमवार शाम समिति के गठन का आदेश जारी कर दिया।

समिति में मुख्य सचिव को अध्यक्ष बनाया गया है। गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य विभाग, वित्त विभाग, सामान्य प्रशासन विभाग, आदिम जाति विकास विभाग और स्कूल शिक्षा विभाग के प्रभारी सचिव इस समिति के सदस्य होंगे। वहीं बस्तर संभाग के आयुक्त को भी इस समिति में सदस्य के तौर पर शामिल किया गया है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बताया है, सचिवों की उच्च स्तरीय समिति आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों एवं प्रमुखों से विचार-विमर्श करेगी। उनके सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक विकास के साथ-साथ आदिवासी समाज के संवैधानिक हितों के संरक्षण के लिए अपनी रिपोर्ट बनाएगी।

अफसरों की समिति अपनी रिपोर्ट आदिवासी मामलों की मंत्रिमंडलीय उप समिति को देगी। मंत्रिमंडलीय उप समिति यह रिपोर्ट मंत्रिपरिषद में प्रस्तुत करेगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पिछले सप्ताह सर्व आदिवासी समाज बीपीएस नेताम गुट के प्रतिनिधियों से चर्चा के बाद इन समितियों के गठन की घोषणा की थी।

समिति को दिया गया यह काम

  • अनुसूचित जनजाति समुदाय के संवैधानिक अधिकारों से जुड़े आवेदनों पर विचार करेगी।
  • PESA कानून से संबंधित नियम, उसके लिए जिन कानूनों काे खत्म करना है उसका अध्ययन कर सुझाव देगी।
  • फर्जी जाति प्रमाणपत्र पर सरकारी नौकरी कर रहे लोगों के खिलाफ शिकायतों पर विचार।
  • सीधी भर्ती और पदोन्नति में आरक्षण संबंधी आवेदनों पर विचार करेगी।
  • यह समिति वन अधिकार कानून, नक्सल पीड़ितों को आसानी से सहायता दिलाने और अत्याचार निवारण कानून के तहत लिए आवेदनों पर भी सुझाव देगी।

दूसरे विभागों से आए सुझावों को देख समिति करेगी सिफारिश
सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के मुताबिक, यह समिति मुख्यमंत्री और दूसरे विभागों की ओर से आए सुझावों को भी देखेगी। कहा गया है, ऐसे सुझावों पर विचार कर समिति अपनी सिफारिश मुख्यमंत्री को देगी।

मुख्यमंत्री का संवाद अब भी जारी
आदिवासी समाज की शिकायतें दूर करने की कोशिश में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का संवाद अब भी जारी है। सोमवार रात उन्होंने राजनांदगांव, धमतरी, बालोद, गरियाबंद और महासमुंद जिले से आए आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों से चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा, राज्य सरकार आदिवासियों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार आदिवासी समाज को उनके संवैधानिक और कानूनी अधिकार देने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। इससे पहले मुख्यमंत्री बस्तर संभाग के सात जिलों से आए आदिवासी और पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधियों से ऐसी ही चर्चा कर चुके हैं।