फतेहपुर से एनजीओ एवं बाहरी लोगों को ग्रामीणों ने खदेड़ा, सरगुजा जिले से नही निकली पैदल यात्रा*

जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्युज

*अंबिकापुर; अक्टूबर 5  बाहरी एनजीओ द्वारा सरगुजा जिले के ग्रामीणों को बरगलाकर प्रतावित पैदल यात्रा को फतेहपुर के ग्रामीणों ने कल सिरे से खारिज कर दिया। आलोक शुक्ला, उमेश्वर आर्मो एवं उनके साथियों द्वारा अपने निजी स्वार्थ के लिए बुलाई गई पैदल यात्रा का स्थानीय ग्रामीणों के भरपूर विरोध का सामना करना पड़ा। इस वजह से यात्रा को कोरबा जिले के मदनपुर में स्थानांतरित वहां के भोले भाले ग्रामीणों को बरगलाकर यात्रा प्रारंभ करना पड़ा।
इसके पूर्व 2अक्टूबर को इन्ही के द्वारा राजनीतिक संरक्षण में अयोजित सम्मेलन में ग्रामिणो ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखाते हुए बाहर जाने को कहा इससे सम्मेलन के विफल होने पर उनके खिसियाए सदस्यों द्वारा ग्रामीणों को धमकाने की कोशिश भी की गईं । वहीं दूसरी ओर इनके सारे हथकंडे और तमाम कोशिशों के बावजूद पैदल यात्रा के लिए भी सरगुजा क्षेत्र के ग्रामीणों ने एकजुट होकर यात्रा में शामिल न होकर यात्रा का बहिष्कार किया। अंततः तथाकथित एनजीओ कोरबा जिले के मदनपुर में जाकर वहां के सीधे साधे गामीणो को लालच देकर यात्रा निकालने के लिए मजबूर होना पड़ा।

उल्लेखनीय है कि हसदेव क्षेत्र के करीब 1800 वर्ग किलोमीटर फैला हुआ क्षेत्र है जिसमें से केवल 5 या 6 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में भारत सरकार ने अपने राज्यों व देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए कोयला खनन हेतु की अनुमति प्रदान की है। तथाकथित एनजीओ के द्वारा अपने निजी स्वार्थ के लिए हमेशा भ्रामक तथ्य फैलाया जाता है कि संपूर्ण हसदेव क्षेत्र की स्थिति खराब होने वाली हैं जबकि सत्य यह है कि कोयला खनन शुरू होने से राज्य के उर्जा जरूरत को पूरा करने में और रोजगार, स्वास्थ्य, चिकित्सा एवं संरचना विकास इत्यादि में सभी ग्रामों भरपूर सुविधा हुई है। यहां तक कि जो ग्रामीण युवा अपने रोजगार के लिए बाहरी प्रदेशों को रूख करते थे उन्हे आज उन्ही के ग्रामों में नौकरियां मिली हैं। वहीं हजारों लोगों को मुआवजा मिलने से वे सभी अपने परिवार के सार्थक भरण पोषण भी कर रहें हैं। यहीं नहीं संपूर्ण करोना काल में यह एनजीओ ग्रामीणों के मदद करने में नदारद रहे एवं ग्रामीणों को कोई सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई।

देश की आर्थिक एवं सामाजिक प्रगति में बाधा उत्पन्न करने के उद्देश्य से ऐसे तथाकथित एनजीओ को राशि उपलब्ध कराकर भ्रामक तथ्य फैला कर देश के विकास को अवरुद्ध करने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों को स्थानीय प्रगति से प्राप्त होने वाली सुविधाओं जैसे आजीविका, व्यवसाय एवं अन्य विभिन्न स्रोतों से होने वाले बहुत से लाभ को अवरुद्ध कर इन भोले भाले ग्रामीणों को दयनीय दशा में रखने के उद्देश्य से ऐसे तथाकथित एनजीओ कार्यरत हैं। स्थानीय ग्रामीण इन बातो को समझने लगे हैं और इसीलिए ऐसे स्वार्थी तत्वों का विरोध भी प्रारंभ हो चुका है और इसीलिए बाहरी दलालों को,या एनजीओ को नकारते हुए विगत 2 एवं 4 अक्टूबर को इनके द्वारा आयोजित सम्मेलन को भी सरगुजा के स्थानीय ग्रामीणों ने बहिष्कार कर एक करारा जवाब भी दिया है जिससे तिलमिलाकर एनजीओ अन्य क्षेत्रों के ग्रामीणों को बरगलाने में प्रयासरत हैं।

यह स्थानीय प्रशासन को समझना होगा कि, तथाकथित सामाजिक कार्यकर्ता और अराजक तत्व भ्रम न फैला पाएं और इनकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखते हुए इसकी विस्तृत जांच की जाए। सीधे साधे ग्रामीणों को पैदल सैकड़ो किलोमीटर चलने पर मजबूर करने वाले एवं स्वयं वाहन में बैठकर ग्रामीणों को बरगला रहे ऐसे स्वार्थी तत्वों पर कार्यवाही की जाने चाहिए।