किसानों को कृषि अनुसंधान एवं उन्नत प्रौद्योगिकी से जोड़ने से होगा प्रदेश का बेहतर आर्थिक विकास: श्री बघेल

जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्युज

मुख्यमंत्री ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में लगभग 30 करोड़ रूपए लागत के विकास कार्याें का लोकार्पण किया

कृषि विज्ञान केन्द्र रायपुर, कृषि महाविद्यालय रायगढ़, एवं उद्यानिकी महाविद्यालय जगदलपुर के नवनिर्मित भवन, नॉलेज सेंटर, फाईटोसेनेटरी लैब तथा अक्ती जैवविविधता संग्रहालय का शुभारंभ

आठ नवीन फसल प्रजातियों एवं किसानों के नाम संदेश का प्रसारण भी किया

रायपुर, 08 अक्टूबर, 2021। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ कृषि के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्य के रूप में विकसित हो रहा है। राज्य सरकार की अधिकांश योजनाएं कृषि एवं कृषकों के विकास पर केन्द्रित हैं। यहां कृषि के क्षेत्र में हो रहे वैज्ञानिक अनुसंधानों को किसानों के खेतों तक पहुंचाकर उन्हें आर्थिक रूप सशक्त बनाने का कार्य किया जा रहा है। श्री बघेल ने कहा कि महात्मा गांधी की ग्राम स्वराज की अवधारणा छत्तीसगढ़ के गांवों में साकार हो रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में कृषि अनुसंधान एवं आधुनिक कृषि तकनीकों को किसानों के खेतों तक पहुंचाने, खाद्य प्रसंस्करण तकनीक से उपज का मूल्य बढ़ाने एवं ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित व्यवसाय से लोगों को जोड़ने में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने आज यहां इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में लगभग 30 करोड़ रूपये की लागत से निर्मित भवनों एवं अन्य विकास कार्याें का उद्घाटन एवं लोकार्पण करते हुए इस आशय के विचार व्यक्त किये।

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने में आज से कृषि विश्वविद्यालय में प्रारंभ हो रही फाईटोसेनेटरी लैब का महत्वपूर्ण योगदान होगा। गांवों के रूरल इंडस्ट्रियल पार्क में अब कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित प्रसंस्करण तकनीक का उपयोग किया जाएगा। गौठानों में गोबर से जैविक खाद के निर्माण, बिजली उत्पादन और वैल्यू एडीशन के कार्य में वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जिस अक्ती जैव विविधता संग्रहालय का लोकार्पण किया गया है, उसमें धान की लगभग 24000 किस्मों, तिंवरा की 1009, अलसी की 2000 किस्मों का प्रदर्शन किया गया है। इस संग्रहालय में विभिन्न किस्मों की कुल 30,878 किस्मों का प्रदर्शन किया गया है। इसके अलावा किसान भाइयों की लगभग 500 से अधिक प्रजातियों का पंजीयन भारत सरकार में कराया गया है। ये प्रजातियां भी जैव विविधता संग्रहालय में प्रदर्शित की गई हैं। इन प्रजातियों का उपयोग नयी प्रजातियों के विकास के लिए होगा। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय बनने के बाद से आज तक विभिन्न फसलों की कुल 154 प्रजातियों का विकास किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की कृषि-उपज और कृषि-उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भी हमारी सरकार निरंतर काम कर रही है। अब तक छत्तीसगढ़ के कृषि उत्पादों तथा खाद्य पदार्थों के प्रमाणीकरण की सुविधा उपलब्ध नहीं थी, लेकिन विश्वविद्यालय में फाइटोसेनेटरी प्रयोगशाला के लोकार्पण के बाद किसान भाइयों को यह सुविधा भी उपलब्ध हो जाएगी। फसल प्रमाणीकरण के बाद वे अपनी उपज और उत्पादों की बिक्री विदेशों में भी कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा अनेक मोबाइल एप तैयार किए गए हैं, जिनसे किसान भाई नयी-नयी जानकारी प्राप्त कर अपनी समस्याओं का समाधान कर सकते हैं। छत्तीसगढ़ शासन की योजनाओं के बारे में भी वे जानकारी लेकर अपनी आय बढ़ा सकेंगे।

मुख्यमंत्री श्री बघेल ने आज यहां इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित नवनिर्मित कृषि विज्ञान केन्द्र भवन, अक्ती जैवविविधता संग्रहालय, नवनिर्मित नॉलेज सेंटर भवन एवं रिकार्डिंग स्टूडियो तथा फाइटोसेनेटरी प्रयोगशाला का लोकार्पण किया। कृषि विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित समारोह में श्री बघेल ने उद्यानिकी महाविद्यालय, जगदलपुर एवं कृषि महाविद्यालय, रायगढ़ के नवनिर्मित महाविद्यालय भवन, बालक छात्रावास एवं कन्या छात्रावास भवनों का उद्घाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने 16 कृषि महाविद्यालयों में निर्मित ई-क्लासरूम का वर्चुअल उद्घाटन भी किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित धान से प्रोटीन, ग्लूकोज एसं शुगर सीरप निर्माण तकनीक का लोकार्पण किया तथा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित आठ नवीन फसल किस्मों को प्रसारित किया। समारोह की अध्यक्षता कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी मंत्री रविन्द्र चौबे ने की तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री सत्यनारायण शर्मा, विधायक, रायपुर ग्रामीण, छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र शर्मा, शाकम्बरी बोर्ड के अध्यक्ष श्री राम कुमार पटेल, मुख्यमंत्री के कृषि सलाहकार श्री प्रदीप शर्मा, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रबंध मण्डल सदस्य श्री बोधराम कंवर, श्री आनंद मिश्रा, श्रीमती वल्लरी चन्द्राकर, कृषि उत्पादन आयुक्त, छत्तीसगढ़ शासन डॉ. कमलप्रीत सिंह, एवं इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति डॉ. एस.के. पाटील उपस्थित थे। कार्यक्रम में विधायक श्री प्रकाश नायक, श्री रेखचंद जैन सहित अनेक कृषि वैज्ञानिक और प्राध्यापक वर्चुअल रूप से शामिल हुए।

कृषि मंत्री श्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ कृषि के क्षेत्र में सबसे समृद्ध राज्य बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि राज्य के बजट से लगभग 25 से 30 हजार करोड़ रूपए धान खरीदी के माध्यम से किसानों को पहुंचा रहे हैं। कृषि विश्वविद्यालय में विकसित अधोसंरचना किसानों, वैज्ञानिकों और छात्रों के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगी। कार्यक्रम में कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.के. पाटिल ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि पिछले दो वषों में छत्तीसगढ़ में 10 नये कृषि महाविद्यालय प्ररंभ हुए हैं जो राज्य सरकार की कृषि विकास तथा कृषि शिक्षा को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्हांेेने कहा कि आज विद्यार्थियों की संख्या के मामले में साढ़ेतीन हजार विद्यार्थियों की दर्ज संख्या के साथ इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय देश में प्रथम स्थान पर है।

मुख्यमंत्री श्री बघेल इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में प्रवास की शुरूआत यहां 1 करोड़ 41 लाख रूपये की लागत से नवनिर्मित कृषि विज्ञान केन्द्र भवन के लोकार्पण के साथ हुई। उन्होंने यहां साढ़े नौ करोड़ रूपये की लागत से निर्मित उद्यानिकी महाविद्यालय जगदलपुर के नवनिर्मित भवन, बालक छात्रावास एवं कन्या छात्रावास का उद्घाटन किया। श्री भूपेश बघेल ने साढ़े नौ करोड़ रूपये की लागत से ही निर्मित कृषि महाविद्यालय, रायगढ़ के नवनिर्मित भवन, बालक छात्रावास एवं कन्या छात्रावास का भी लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत 6.65 करोड़ रूपये की लागत से निर्मित फाइटोसेनेटरी प्रयोगशाला का लोकार्पण किया। इस प्रयोगशाला के प्रारंभ होने से छत्तीसगढ़ से खाद्य पदार्थाें के निर्यात हेतु फसलों एवं खाद्य पदार्थाें में हेवीमेटल्स, कीटनाशक तथा विषाक्त तत्वों की जांच की जा सकेगी। श्री बघेल ने कृषि विज्ञान केन्द्र भवन के टेक्नोलॉजी पार्क में राज्य के विभिन्न कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा विकसित नवीन कृषि प्रौद्योगिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण तकनीकांे का अवलोकन किया।

मुख्यमंत्री श्री बघेल ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत 1.40 करोड़ रूपये की लागत से निर्मित नॉलेज सेन्टर एवं रिकार्डिंग स्टूडियो का उद्घाटन किया एवं यहां से उन्होंने किसानों के नाम संदेश का प्रसारण किया। इस नॉलेज सेन्टर का निर्माण कृषि की आधुनिक तकनीक एवं ज्ञान को डिजीटल रूप में तैयार करने, ऑडीयो विजूअल रिकार्डिंग एवं ऑडीयो विजुअल सामग्री के प्रसारण हेतु किया गया है। इस सेन्टर में फिल्म निर्माण हेतु स्टूडियो तथा छोटे आडिटोरियम की व्यवस्था भी की गई है। श्री बघेल ने आर.एल. रिछारिया प्रयोगशाला में धान की 24 हजार 750 पारंपरिक प्रजातियों एवं अन्य फसलों की 6 हजार 125 प्रजातियों के जनन द्रव्य संग्रहण हेतु निर्मित अक्ती जैवविविधता संग्रहालय का उद्घाटन किया। इस संग्रहालय में धान एवं अन्य फसलों की 30 हजार 875 प्रजातियों को भौतिक रूप से प्रदर्शन किया गया है तथा उनके विशिष्ट गुण एवं विस्तृत जानकारियां डिजीटल रूप में प्रदर्शित की गई हैं। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कृषि महविद्यालय रायपुर, राजनांदगांव, जगदलपुर, अम्बिकापुर, बिलासपुर, भाटापारा, कवर्धा, बेमेतरा, कोरिया, जांजगीर-चांपा तथा उद्यानिकी महाविद्यालय जगदलपुर एवं राजनांदगांव में 1 करोड़ 28 लाख रूपये से नवनिर्मित ई-क्लास रूम का वर्चुअल उद्घाटन किया। श्री बघेल ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित चांवल से प्रोटीन, ग्लूकोज, शुगर सीरप के निर्माण की तकनीक का लोकार्पण भी किया। मुख्यमंत्री इस अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित 8 नवीन फसल प्रजातियों को जारी करेंगे जिनमें धान की बौनी विष्णुभोग, बौनी सोनागाठी, छत्तीसगढ़ धान-1919, छत्तीसगढ़ तेजस्वी धान, मक्के की सी.जी. अगेती संकर मक्का, सोयाबीन की छत्तीसगढ़ सोयाबीन-1115, करायत की सी.जी. करायत-1 तथा गूसबेरी की सी.जी. केप गूसबेरी-1 प्रजातियां शामिल हैं। कार्यक्रम के दौरान संचालक अनुसंधान डॉ. आर.के. बाजपेयी, निदेशक विस्तार डॉ. एस.सी. मुखर्जी, निदेशक शिक्षण डॉ. एस.एस. सेंगर, अधिष्ठाता छात्रकल्याण डॉ. जी.के. श्रीवास्तव सहित विश्वविद्यालय प्रशासन के वरिष्ठा अधिकारी, विभागाध्यक्ष एवं कृषि वैज्ञानिक उपस्थित थे।

(संजय नैयर)
सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी