आदिवासी बस्तर नगर पंचायत को ग्राम पंचायत बनाने की मांग को लेकर राज्य भवन तक

जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्युज  पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आने वाले बस्तर नगर पंचायत को ग्राम पंचायत बनाने की मांग को लेकर आदिवासियों ने रायपुर के राजभवन तक 280 किलोमीटर लंबी पदयात्रा निकाली है। आज ये आदिवासी धमतरी पहुंचे जहां उन्होंने अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग बुलंद की।

अनुसूचित क्षेत्र के कानून का उल्लंघन

संघर्ष समिति की अगुवाई कर रहे बुधराम बघेल ने बताया कि पूर्ववर्ती सरकार ने अनुसूचित क्षेत्र में नगर पालिका अधिनियम 1961 के तहत ग्राम पंचायतों को नगर पंचायत बनाते समय संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन किया है। उन्होंने कहा कि 2017 से लगातार बस्तर नगर पंचायत को ग्राम पंचायत बनाने की मांग की जा रही है। मुख्यमंत्री से लेकर सभी जिम्मेदार अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा गया, लेकिन आज तक उनकी मांग पूरी नहीं की गई, जिसकी वजह से इलाके के आदिवासी 280 किलोमीटर पैदल चलकर राज्यपाल से गुहार लगाने जा रहे हैं।

मांग पूरी होने तक राजधानी में होगा आंदोलन

बुधराम बघेल ने बताया कि आदिवासी इलाकों में अपना कानून और रूढ़िवादी परंपराएं होती हैं। बस्तर ग्राम पंचायत को नगर पंचायत बना दिए जाने के चलते उनकी परंपराओं और संस्कृति का ह्रास हो रहा है। यही वजह है कि बस्तर के 7 वार्डों के 500 ग्रामीणों ने अपनी कुलदेवी की कसम खा रखी है, और जब तक रायपुर के राजभवन में मांग पूरी नहीं होगी, वह राजधानी में ही आंदोलन करेंगे।

पदयात्रियों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं की गई तो वे अपने परिवार और पालतू जानवरों को लेकर राजभवन में धरना प्रदर्शन करेंगे। अपना गांव, खेत छोड़कर राजभवन में ही डटे रहेंगे।

पांचवीं अनुसूची के क्षेत्र में सामान्य कानून लागू नहीं

सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष सोहन पोटाई ने बताया कि संविधान में उल्लेख है कि पांचवीं अनुसूची वाले क्षेत्र में सामान्य कानून लागू नहीं होता। यदि आवश्यक हो तो राज्यपाल या राष्ट्रपति से इसके लिए अनुमोदन लेना होता है, लेकिन सरकार द्वारा इस कानून को अनदेखा करके बस्तर ग्राम पंचायत ही नहीं बल्कि बस्तर संभाग में 27 पंचायतो को नगर पंचायत बना दिया गया है। फ़िलहाल बस्तर पंचायत से इसकी शुरुआत की गई है।

सोहन पोटाई ने बताया कि पूरे छत्तीसगढ़ में 84 ट्रायबल ब्लॉक हैं, और जहां भी नगर पंचायत और नगरीय निकाय बना दिए गए हैं, सभी को मिलाकर एक बड़ा आंदोलन खड़ा होगा। दरअसल ग्राम पचायत प्रदेश के पंचायत विभाग के अधीन आते हैं, वहीं अगर उसे नगर पंचायत में तब्दील कर दिया जाये तो वह नगरीय निकाय के अधीन आ जाता है। इस वजह से वहां के कायदे-कानून भी बदल जाते हैं।

छत्तीसगढ़ के अनुसूचित जाति बाहुल्य वाले इलाके पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आते हैं। इसके तहत बनाये गए कानून की अनदेखी करते हुए कई जिलों में नगर पंचायत अथवा नगर पालिकाओं का गठन कर दिया गया है। अब जागरूकता आने के बाद अनुसूचित इलाकों के लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है।
गौरतलब है कि इन पदयात्रियों ने संविधान की किताब अपने हाथ रखी है, वे इस को बस्तर के विधायकों और सांसदों को पढ़ने के लिए नारेबाजी भी कर रहे हैं। बहरहाल देखना है कि बस्तर के नगर पंचायत से शुरू हुई इस मुहिम को कितनी सफलता मिलती है