एओजीएस एशिया ओशिनिया जियोसाइंस सोसाइटी

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जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज़ विश्व के उन विभिन्न देशों का एक वैज्ञानिक समूह है जहाँ प्राकृतिक आपदाएं अधिकतर आती रहती है इन देशों में भूकंप बाढ़ ज्वालामुखी हरिकेन व अन्य प्रकार के आपदाएं सेंसिटिव और एक्टिव रहता है इन आपदाओं के कारण और निवारण तथा शोध के माध्यम से वैज्ञानिक हल निकालने और इसको एक कॉमन प्लेटफॉर्म के जरिये साझा करने और विभिन्न संस्थाओ के बीच वार्ता करने का एक सशक्त माध्यम है इसी का महासभा आगामी जून 2024 मे सॉउथ कोरिया में आयोजित किया जा रहा है जिसमे शोध पत्र पढ़ने तथा विभिन्न देशों और संस्थाओ के बीच आपसी सहयोग तथा वैज्ञानिक वार्ता साझा करने डॉक्टर एन पी देवांगन को आमंत्रित किया गया है। डॉ. देवांगन तकनीकी शिक्षा छत्तीसगढ़ सरकार में उपसंचालक के रूप में कार्यरत हैं डॉक्टर देवांगन चीन के भूकंप मुख्यालय के सलाहकार हुआंग और वूली तथा अरब के प्रोफेसर जेम्स टेरी के साथ कार्य कर रहें हैं कोविड महामारी मॉडलिंग के लिए विख्यात फिलिपीन यूनिवर्सिटी के प्राध्यापक विणा बांगोलान इसमें मुख्य भूमिका निभा रही है एओजीएस का यह सम्मलेन में विभिन्न देशों और संस्थाओं के बीच आपसी सहयोग हेतु वैज्ञानिक वार्ता को सुगम बनाने हेतु डॉक्टर देवांगन को जिम्मेदारी भूकंप मुख्यालय चीन के भूगर्भ शास्त्री डॉक्टर फुकिआंग ने दिया है भारतीय विज्ञान संस्थान बैंगलोर के पेड़ो से प्रेरित होकर डॉक्टर देवांगन का अध्धयन पत्र प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की मुलभुत क्षमता को शोध सभा में प्रस्तुत करने हेतु निमंत्रित किया गया है

उपरोक्त अध्ययन पत्र मे देवांगन ने बताया की पेड़ों का आवरण धरती के वातावरण को नियमित

और संतुलित करने के हेतु अति आवश्यक है पेड़ों के बीच भी आपदाओं की सुचना का आदान प्रदान होता है और यह स्थिर जीवन भी पीड़ा तथा अन्य घटनाओं का अनुभव करते है यद्धपि मानव जैसा नहीं किन्तु इन सूचनाओं का आदान प्रदान भी पेड़ो के समूहों के बीच ससक्त रूप से होता है और यही कारन है की यह स्थिर जीवन के रूप में इस पृथ्वी पर एक लम्बी आयु के रूप में जीवित कर वातत्वरण को संतुलित करते हुए विभिन प्राणी जगत के बीच सामंजस्य भी बनाते है

पेड़ों की कटाई एवं वन्य क्षेत्रो में आयी कमी के कारण जो पर्यावरण संकट वर्तमान मे छायी हुई है उस सम्बन्ध में पेड़ों के तरफ से विश्व समुदाय के समक्ष एक निवेदन पेश किया है जो बहुत ही भावनात्मक किन्तु सत्य है

सर्व शक्तिमान ने बनाया अति सुंदर धरा

बुद्धिमता आश्चर्य और प्राकृतिक कर्तव्य से भरा

निवेदन है विश्व मानव समाज के समक्ष

जीने दो मुझे पूर्ण आयु धरती माता की गोद में

क्युकी मैं तुम्हारी सेवा करता हूँ

मरने / मारने के उपरांत भी