राष्ट्रीय आदिवासी समन्वय समिति भारत के तत्वाधान में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन जन्तर मंतर में आदिवासी धर्म कॉलम ” पुनर्स्थापित
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज भारत देश 2026 2027 में जनगणना होने जा रहा है, लेकिन आजादी के बाद से जनगणना प्रपत्र में हमारे स्वतंत्र “आदिवासी धर्म कॉलम” (आदिवासी धर्म/ Tribal Religion) को षड्यंत्र के तहत 1961 में हटा दिया गया, ताकि भारत देश में आदिवासियों का पहचान और अस्तित्व पुरे तरह से समाप्त हो जाए ! इसी स्वतंत्र धर्म कॉलम (आदिवासी धर्म/Tribal Religion) का जनगणना प्रपत्र में पुनर्स्थापित करने के मांग को लेकर दिनांक 25/02/2026 बुधवार को जंतर – मंतर नई दिल्ली में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया गया भारत के सभी राज्यों के समस्त आदिवासी भाईयों और बहनों हजारों कि संख्या इस धरना प्रदर्शन में उपस्थित थे,, जनगणना प्रपत्र में स्वतंत्र धर्म कॉलम (आदिवासी धर्म/Tribal Religion) का पुनर्स्थापित करने कि मांग को मजबूती प्रदान करने कि प्रयास करने का निर्माण लिया गया इस अवसर पर भारत देश के हर राज्य से आदिवासी बड़ी संख्या में उपस्थित थे महाराष्ट्र झारखंड उत्तराखंड उड़ीसा छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश तेलंगाना तमिलनाडु देश के सभी राज्यों के आदिवासी अपनी मांगों को लेकर जंतर मंतर में उपस्थित थे
झारखण्ड से देव कुमार धान, गीताश्री उरांव, प्रेमशाही मुंडा, अभयभूट कुंवर, सर्जन हॉसदा, चंदन होनहागा, दर्शन गंझु, आसोतोष सिंह चेरो, हरि नारायण महली। गुजरात से लालू भाई बसावा, उत्तम भाई बसावा। राजस्थान से डॉ. हीरा मीना। छत्तीसगढ़ से विनोद नागवंशी, रमेश ठाकुर लोकेश्वरी नेताम महेंद्र नेताम। मध्यप्रदेश से -भूवन सिंह कोराम। महाराष्ट्र से विश्वनाथ बाकड़े, प्रहलाद सिडाम। उड़ीसा से मंगला खलको। उत्तर प्रदेश से बबलू धाँगर। बिहार से सुदामा उराँव। पश्चिम बंगाल से मोती लाल सोरेन, मैनेजर साह मरकाम, भरत प्रसाद खरवार, राजेश कोल, जनार्दन कोड़ा एवं अन्यान्य।आदिवासी धर्म कोड को जनगणना प्रपत्र में शामिल करने की मांग को लेकर आज दिनांक 25 फरवरी को जंतर मंतर नई दिल्ली में एक दिवस धरना प्रदर्शन आंदोलन सम्पन्न हुआ

