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घर बैठे कैसे बनाएं शराब ? लॉकडाउन में सल्फी, ताड़ी और महुएँ के पेड़ का महत्व समझ में आया कई लोगों को , इस मानसून सीजन नशीले पेड़ पौधों के रोपण का चलेगा अभियान , अब लोग गूगल गुरु से पूछ रहे है घर पर शराब बनाने का तरीका

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By  Jiwrakhan lal ushare cggrameen nëws

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दिल्ली वेब डेस्क / लॉकडाउन में शराब दुकानें और बार बंद है | हालांकि अवैध शराब के कारोबारियों का धंधा फल-फूल रहा है | लगभग चौगनी कीमत अदा कर बड़ी मुश्किल से शराब मुहैया हो रही है | शराब के शौक़ीन कहने लगे है कि ब्लेक में भी शराब जिसे मिल जाये वो शख्स भाग्यशाली है | लॉकडाउन के बाद से अल्कोहल प्रेमियों के लिए परेशानियां बढ़ गईं हैं | हालांकि सिगरेट, बीड़ी, पान, गुटका खाने वाले लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है | इस बीच लॉकडाउन ने लोगों को पेड़ों का महत्व समझा दिया है | खासतौर पर सल्फी , ताड़ी और महुएँ के पेड़ों का | जिनके घरों या आसपास में इनके पेड़ लगे है , समाज में उनकी पूछ परख बढ़ गई है |

छत्तीसगढ़ के बस्तर में सल्फी का पौधा बहुतायत में पाया जाता है | इसे यहां की देशी बियर के नाम से भी जाना जाता है | सल्फी का पेड़ सुबह शाम अपना रस छोड़ता है | इसका रस नशीला होता है | कई लोग इसका आयुर्वेदिक उपयोग भी करते है | लेकिन यहां की एक बड़ी आबादी इसे नशे के रूप में उपयोग करती है | जिसके घर-आंगन में सल्फी के जितने अधिक पेड़ होते है , वह व्यक्ति उतना ही धनवान माना जाता है | यह पेड़ यहां के आदिवासियों की आय का स्त्रोत भी है | सल्फी के पेड़ पर मिट्टी अथवा स्टील का पात्र लगा दिया जाता है | इसकी शाखाओं से निकलने वाला रस इन पात्रों में इक्क्ठा होता है | फिर दूध के बर्तनों की तरह इसे अपने कंधे या गाड़ियों में लादकर आदिवासी हाट बाजारों में इसकी बिक्री करते है | महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में ताड़ी के वृक्ष से भी इसी तरह का निकलने वाला रस नशे के रूप में प्रयुक्त होता है | जबकि जंगलों में भरपूर मात्रा में लगे महुएँ के पेड़ से उतपन्न होने वाले महुएँ के फल से देशी शराब बनाई जाती है | 

दरअसल देश भर के अधिकांश हिस्सों में शराब दुकानें बंद हैं | इसकी वजह से ग्रे मार्केट में शराब की कीमतें चौगुनी से अधिक हो गई हैं | कई राज्यों में शराब चोरी-छिपे भी बिकती हुई नजर आई है वो भी बढ़ी हुई कीमतों के साथ | इसके अलावा लॉकडाउन के दौर में जब अल्कोहल की लत जेब पर भारी पड़ने लगी तो कई लोगों ने अल्कोहल छोड़ने का फैसला किया है | लेकिन कई लोग इस मामले में आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर रहे हैं | वो ‘घर में ही अल्कोहल बनाने की विधियों में जुटे है |’ भले ही आपको यकीन नहीं आ रहा हो , यह सच है | जी हां, कई लोग घर में ही अल्कोहल बनाने का तरीका खोज रहे हैं | इसके लिए वे ऑनलाइन सर्च कर रहे हैं | देश भर में कोरोना वायरस लॉकडाउन के दौरान ‘होममेड अल्कोहल बनाने का तरीका’ सर्च किया जा रहा है | यू ट्यूब हो या गूगल गुरु , दोनों के सामने यही सवाल मुँह बाये खड़ा है |

गूगल ट्रेंड्स के मुताबिक, 22 से 28 मार्च के दौरान भारत में सबसे ज्यादा ‘घर पर शराब बनाने का तरीका’ को ऑनलाइन सर्च किया गया, उसी सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशव्यापी लॉकडाउन लगाया था | आबकारी अधिकारियों का कहना है कि मार्च के आखिर में ग्रे-मार्केट विक्रेता शराब की दोगुना कीमत वसूल रहे थे | उनका मानना है कि दुकानें बंद होने से कई लोग अवैध शराब की ओर रुख कर रहे हैं | वहीं, अवैध बिक्री को रोकने के लिए छापामार कार्रवाई भी जारी है | दूसरी तरफ कई लोगों ने बताया कि बाजार में शराब की कीमतों में उछाल ऐसा है कि उन्होंने 170 रुपये की व्हिस्की की बोतल के लिए 700 रुपये तक का भुगतान किया है. उनका कहना है कि कई लोग शराब के लिए अधिक कीमत चुकाने के लिए तैयार हैं, लेकिन फिर भी उनको शराब नहीं मिल रही है | लिहाजा इस मानसून में कई लोगों ने फैसला किया है कि वे अपने घरों ही नहीं बल्कि आसपास में सल्फी , ताड़ी और महुएँ के पौधे लगाएंगे | ताकि लोगों को जरूरत के हिसाब से छाया भी मिल सके और फल फूल से उनका गला भी तर-बतर हो जाये | 

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