छत्तीसगढ़ सरकाररायपुर

ग्रामीण चिकित्सा सहायको से मुख्य चिकित्सा अधिकारीयो द्वारा मरीजो का उपचार करवाने के विरूद्ध माननीय न्यायालय मे अवमानना पिटीशन

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जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्युज
माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर मे दायर याचिका कं्र 930/2001 , डब्लू.पी.आई.एल 32/20212 एवं डब्लू.पी.एस. 2849/2013 मे पारित निर्णय दिनांक 04.02.2020 एवं शासन के आदेश दिनांक 16.02.2020 के परिपालन मे कार्य करने हेतु संघ के द्वारा बार-बार उच्चाधिकारीयों को पत्राचार किया गया था ,लेकिन निर्णय आने के लगभग 11 माह व्यतित हो जाने के बाद भी माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय का खुला अवमानना करते हुए ग्रामीण चिकित्सा सहायको तृतीय वर्ग कर्मचारीयो के द्वारा लोगो के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड करते हुए , बडे बुजुर्ग , गर्भवती महिलाओ ,शिशुओ , आदि का ईलाज कर दवाओं की मात्रा उल्टा सीधा देते हुए लोगो के जान के साथ लगातार खेल रहे है , मंहगी-मंहगी ब्राण्डेड दवाईयां व अपने योग्यता से बाहर जाते हुए प्राईवेट लेब व डायग्नास्टिक सेंटर हेतु बडी-बडी जांच जैसेः- सीटी-स्कैन, एम.आर.आई., एक्स-रे आदि लिखकर प्रायवेट संस्थानो मे जांच करने हेतु दबाव डालकर कमीशनखोरी कर रहे है ,अपने आप को चिकित्सक ,विशेषज्ञ ,बताकर मेडिकल सर्टीफिकेट बांट रहे है , व अपने नाम के आगे डाक्टर उपसर्ग का उपयोग कर रहे है , मेडीकोलगल जैसे केस का परीक्षण कर रहे है, ग्रामीण महिलाओ का गर्भ गिराने का ठेका ले रहे है , मानसिक रोगीयो का ईलाज करते हुए अतिसंवेदनशील दवाईयां जैसे डायजीपाम,ओलानजेपाइन,क्लोजेपाम,फलूआक्जेटीन, आदि लिखकर कर मरीजो के जान के साथ खिलवाड कर रहे है, जबकि इन प्रकार के दवाईयों के इस्तेमाल के लिए कम से कम एम.बी.बी.एस. की डीग्री अनिवार्य है, लेकिन ग्रामीण चिकित्सा सहायक (तृतीय वर्ग कर्मचारीय) से सी.एम.एच.ओ. द्वारा ईलाज करने की छूट दी गई है जो कि स्पष्टतः माननीय उच्च न्यायालय एवं शासन के आदेश का घोर अवहेलना लगातार कर रहे है और मरीजो के जान के साथ खिलवाड करने का छूट दिया गया है। शासन के आदेश मे ग्रामीण चिकित्सा सहायक (तृतीय वर्ग कर्मचारी) को ग्रामीण क्षेत्र मे ही कार्य करने हेतु आदेशित किया गया है , लेकिन उच्चाधिकारीयों के सांठ-गांठ से शहरी क्षेत्र मे जमे हुए जिसमे कि आर्थिक लेन-देन से इंकार नही किया जा सकता है। , उच्चाधिकारीयों द्वारा आर.एम.ए. को चिकित्सक
का विकल्प बताकर भर्ती किया जा रहा है, व शासन से विभीन्न कार्यक्रमो के तहत मिलने वाले प्रोत्साहन राशियों का वितरण चिकित्सको के समतुल्य बताकर किया जाकर राशियो का बंदरबाट करते हुए अन्य सक्षम संवर्ग के कर्मचारीयों के साथ भेदभाव किया जा रहा है । इन सभी प्रकार के अनियमितताओ मे उच्चाधिकारीयों का पूर्ण रूप से सांठगांठ प्रतीत होता है, जो कि माननीय न्यायालय के सम्मान को ठेस पंहुचाने वाला है। इसी बात से क्षुब्ध होकर संघ द्वारा माननीय उच्च न्यायालय के शरण मे जाकर न्याय के गुहार लगाते हुए 4 अवमानना केस दायर किया था ,जिसमे माननीय न्यायालय द्वारा सुनवाई करते हुए दिनांक 15.12.2021 को पारित निर्णय मे कहा है कि दिनांक 04.02.2020 को पारित निर्णय की प्रति सचिव स्वास्थ्य के संज्ञान मे लाने हेतु आदेशित किया गया है , जिसके परिपालन मे माननीय न्यायालय के निर्णय को अमल मे लाने हेतु अभ्यावेदन प्रस्तुत कर अनुरोध किया गया है। उक्त अभ्यावेदन मे कार्यवाही नही होने के स्थिति में संघ माननीय न्यायालय के शरण में जाकर पुनः याचिकिा दायर करने के लिए बाध्य होगा ।