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कृषि विश्वविद्यालय के नवनियुक्त कुलपति डाॅ. गिरीश चंदेल ने पदभार ग्रहण किया

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जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्युज
दिनांक 25 फरवरी, 2022। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के नवनियुक्त कुलपति डाॅ. गिरीश चंदेल ने आज यहां पदभार ग्रहण किया। निवृतमान कुलपति डाॅ. एस.एस. सेंगर ने डाॅ. चंदेल को कार्यभार सौंपा। छत्तीसगढ़ की राज्यपाल एवं इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की कुलाधिपति सुश्री अनुसुईया उइके द्वारा इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय अधिनियम, 1987 (क्रमांक 20 सन् 1987) की धारा 14 की उपधारा (1) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए प्लान्ट मौलिक्युलर बायोलाॅजी एवं बायोटेक्नोलाॅजी विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. गिरीश चंदेल को इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति का दायित्व सौंपा गया है। डाॅ. चंदेल द्वारा पदभार ग्रहण किये जाने के अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री जी.के. निर्माम, संचालक अनुसंधान सेवाएं डाॅ. पी.एल. चन्द्राकर, निदेशक विस्तार डाॅ. आर.के. बाजपेयी, अधिष्ठाता छात्र कल्याण डाॅ. जी.के. श्रीवास्तव, सह संचालक अनुसंधान डाॅ. विवेक त्रिपाठी सहित विश्वविद्यालय प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि डॉ. गिरीश चंदेल, देश के प्रख्यात पौध प्रजनक और जैव प्रौद्योगिकी वैज्ञानिक हैं। छत्तीसगढ़ के सिमगा, हथबंद के ग्राम-कुकरा चुन्दा के मूल निवासी डॉ. चंदेल को कृषि शिक्षा, अनुसंधान और विस्तार प्रबंधन का 30 वर्षों का अनुभव है, जिसमें 07 वर्षों का अनुभव विशेष रूप से सूखे और पोषण अनुसंधान के लिए अत्याधुनिक स्टेट ऑफ आर्ट बुनियादी सुविधाओं के निर्माण और पोषण प्रबंधन पर रहा है। डाॅ. चंदेल ने धान की पांच बायोफोर्टिफाईड फसल प्रजातियों – सी.जी. जिंक राइस, सी.जी. जिंक राइस -2, जिंको राइस एम.एस. (जिंक की अधिक मात्रा वाली प्रजातियों)  प्रोटेजिन (प्रोटीन की अधिक मात्रा वाली प्रजाति) तथा सी.जी. मधुराज-55 (कम शर्करा वाली प्रजाति) विकसित की हैं। छत्तीसगढ़ बायो प्रमोशन सोसायटी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के रूप में उनका प्रदेश में भारत सरकार एवं छत्तीसगढ़ शासन के सहायोग से 30 करोड़ रूपये की लागत से स्थापित बायोपार्क एवं 13 करोड़ रूपये की लागत से निर्माणाधीन बायोटेक इन्क्यूबेशन सेन्टर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। भारत सरकार की सहायता से बस्तर के छह जिलों में 4.5 करोड़ रूपये लागत की बायोटेक किसान हब परियोजना के क्रियान्वयन में भी उनकी अहम भूमिका रही है। कृषि विश्वविद्यालय के जर्मप्लाज्म बैक में संग्रहित धान की 24 हजार प्रजातियों की डी.एन.ए. फिंगर प्रिंटिंग कार्य में भी डाॅ. चंदेल का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
डॉ. चंदेल को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अनुसंधान एवं विकास कार्यों का वृहद अनुभव है। उन्होंनेे इंटरनेशनल जेनेटिक इंजीनियरिंग एवं बॉयोटेक्नोलॉजी सेंटर में पी एच.डी. फेलो तथा इंटरनेशनल राईस रिसर्च इंस्टीट्यूट में विजिटिंग वैज्ञानिक के रूप में कार्य किया है। उन्हें अनेक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय फैलोशिप एवं सम्मान भी प्राप्त हुए हैं जिनमें इंटरनेशनल राईस रिसर्च इंस्टिट्यूट मनीला, फिलिपिंस से डाॅक्टोरेट फौलोशिप, एन.ई. बोरलाॅग फैलोशिप, यू.एस.ए. यंग साईंटिस्ट अवार्ड, आउट स्टैंडिंग अचिव्हमेन्ट यूनिवर्सिटी अवार्ड आदि प्रमुख हैं। डाॅ. चंदेल अनेक प्रतिष्ठित समितियों में सदस्य भी रहें हैं। वे भारत सरकार के बायोटेक्नोलाॅजी विभाग द्वारा गठित टास्क फोर्स एवं मानव संसाधन विकास टास्क फोर्स के सदस्य हैं। डाॅ. चंदेल द्वारा अंतर्राष्ट्रीय स्तर के 50 रिसर्च पेपर एवं 3 पुस्तकों के चैप्टर का प्रकाशन भी किया गया है।