राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत परिवार-केंद्रित कार्यशाला*

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जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्युज

*निमहांस के प्रशिक्षक ने परिवार और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंधों की बारीकियों को समझने के सिखाये गुर*

*कोविड-19 के बाद की चुनौतियों पर है ज़ोर*

*रायपुर, 10 मार्च:* मानसिक स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए `परिवार संवर्धन’ विषय पर दो-दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला गुरुवार को यहां शुरू हुई। कार्यशाला में लगभग तीन दर्जन प्रशिक्षक ज़मीनी स्तर पर मनो-सामाजिक देखभाल और अन्य सेवाओं को नए तरीके से ढालना सीख रहे हैं, खासकर कोरोना के बाद आने वाली मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियों के परिपेक्ष्य में।
कार्यशाला का आयोजन राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (NMHP) द्वारा नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एण्ड न्यूरो स्कीनकेस (निमहांस), बेंगलुरु, के सहयोग से किया जा रहा है। यह पहली बार है कि छत्तीसगढ़ में मनोवैज्ञानिकों, सामुदायिक नर्सों और मनोरोग सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए इस तरह का परिवार-केंद्रित प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। इस तरह के अभ्यास से उन्हें अपने परिवारों और उन लोगों के साथ बेहतर ढंग से निपटने में मदद मिलेगी जिन्हें वह प्रशिक्षण पूरा करने के बाद सेवा प्रदान करेंगे।
प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए, डॉ जयकुमार, सह – प्राध्यापक, निमहांस, ने कहा कोरोना से उत्पन्न मुद्दों के कारण परिवार बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। उन्हें परिवार के सदस्यों को खोने का दुःख झेलना पड़ा और स्वास्थ्य सम्बन्धी तकलीफें उठानी पड़ी। साथ ही आर्थिक नुकसान और बाधित दिनचर्या का भी सामना करना पड़ा । उन्होंने कहा इस से उपजा तनाव अक्सर एक खतरनाक मोड़ लेता है और गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है।
“पारिवारिक जीवन संवर्धन को तीन प्रमुख भागों में विभाजित किया जा सकता है – तनाव को कम करना, प्रतिकूल परिस्थितियों से मुकाबला करने की क्षमता में बढ़ोतरी करना और उनके रुख को अधिक लचीला बनाना। हम इसे उन प्रतिभागियों में मजबूत कर रहे हैं जो बारी-बारी से मरीजों को उनके संबंधित क्षेत्रों में प्रशिक्षण और परामर्श देंगे। यह प्रशिक्षण मॉड्यूल व्यावहारिक रूप से लागू होता है, कुछ ऐसा जिसे वे बिना शब्दजाल के लोगों को आसानी से समझा सकते हैं। इस तरह संदेश समाज में गहराई तक जाता है और मुकाबला करने के तंत्र में सुधार होता है। ”
डॉ.जयकुमार ने परिवार की अवधारणा और इसके विभिन्न आयामों को समझाने के लिए कई अभ्यासों का इस्तेमाल किया। उन्होंने प्रतिभागियों को संयुक्त, एवं एकल अभ्यासों जैसे प्रत्येक परिवार के प्रकार के लिए विशिष्ट समाधान प्रदान करने के बारे में बताया। प्रतिभागियों ने भी बातचीत की और अपने विचार साझा किए जिसमें उन्होंने बताया वह बदली हुई वास्तविकता को कैसे देखते हैं।

*जब हम मैदान पर लौटेंगे तो प्रशिक्षण महत्वपूर्ण होगा: प्रतिभागी*

बिलासपुर की सामुदायिक नर्स एंजेलीना वैभव लाल ने कहा हालांकि वह एक व्यक्ति के जीवन में परिवार के प्रभाव के बारे में जानती थीं, सत्र के पहले दिन उन्होंने जो सीखा वह था कि किस हद तक किसी के सामाजिक-मनोवैज्ञानिक व्यवहार को प्रभावित करता है .
रायगढ़ के एक वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी पी. अतीत राव ने कहा पारिवारिक जीवन के विभिन्न आयाम जो उन्होंने पहले दिन के दौरान सीखे, वह रोगियों को समाधान प्रदान करने में मदद करेंगे। “उदाहरण के लिए, हमें एक परिवार के भीतर शक्ति-संतुलन के बारे में बताया गया था कि यह एक एकल परिवार में मुखिया के हाथों में कैसे केंद्रित होता है या यह एक संयुक्त परिवार में कैसे अधिक वितरित होता है। ये अंतर्दृष्टि इस बात की कुंजी है कि व्यवहार कैसे आकार लेते हैं और कैसे पारिवारिक संबंधों को बेहतर बनाया जा सकता है और बंधनों को मजबूत किया जा सकता है। यह अंततः सभी के लिए बेहतर मानसिक स्वास्थ्य की कुंजी होगी, ” उन्होंने कहा।
रायगढ़ की मनोरोग नर्स निशा पटेल ने कहा कि कार्यक्षेत्र के अलावा प्रशिक्षण प्रशिक्षकों के लिए उनके निजी जीवन में भी उपयोगी होगा।———-