कृषि अनुसंधानों को किसानों तक पहुंचाने में कृषि मड़ई जैसे आयोजन महत्वपूर्ण: राज्यपाल

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अन्तर्राष्ट्रीय कृषि मड़ई एग्री कार्नीवाल 2022

किसानों की तरक्की के लिए जरूरी है नवीन कृषि अनुसंधान और तकनीक: श्री रविन्द्र चौबे

पांच दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय कृषि मड़ई ‘‘एग्री कार्नीवाल 2022’’ का समापन

रायपुर, 18 अक्टूबर 2022। छत्तीसगढ़ की राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने कहा है कि विभिन्न विश्वविद्यालयों तथा अनुसंधान संस्थानों में हो रहे अनुसंधान कार्याें का लाभ किसानों तथा आम जनता को मिलना चाहिए, तभी उनकी सार्थकता है। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित नवीन कृषि प्रौद्योगिकी, नवीन फसल प्रजातियों, कृषि यंत्रों एवं अन्य अनुसंधानों से छत्तीसगढ़ के किसान लाभान्वित हो रहे हैं और निरंतर विकास की राह पर बढ़ रहे हैं। सुश्री उइके ने कहा कि नवीन कृषि अनुसंधानों एवं प्रौद्योगिकी को किसानों एवं आम जनता तक पहुंचाने में एग्री कार्नीवाल जैसे आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्यपाल सुश्री उइके आज यहां इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा राज्य शासन के कृषि विभाग, छत्तीसगढ़ बायोटेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसायटी, अन्तर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान, मनीला (फिलीपींस), राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), कंसल्टेटिव ग्रुप ऑफ इन्टरनेशनल एग्रीकल्चरल रिसर्च, कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा), एनएबीएल तथा अन्य संस्थाओं के सहयोग से आयोजित पांच दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय कृषि मड़ई ‘‘एग्री कार्नीवाल 2022’’ के समापन समारोह को मुख्य अतिथि की आसंदी से संबोधित कर रही थी। उन्होंने इस अवसर पर कृषि विश्वविद्यालय द्वारा संचालित अनुसंधान गतिविधियों का जायजा भी लिया। उन्होंने कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय रायपुर में नवस्थापित स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण भी किया। समापन समारोह की अध्यक्षता कृषि मंत्री श्री रविन्द्र चौबे ने की।
राज्यपाल सुश्री उइके ने कहा कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है, इसके बड़े भू-भाग पर धान की खेती की जाती है। इससे छत्तीसगढ़ को विशेष पहचान तो मिली है, लेकिन केवल एक फसल पर जरूरत से अधिक निर्भर होने के बजाय विविध फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देना होगा। छत्तीसगढ़ में लघु धान्य (मिलेट) की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो कि सराहनीय प्रयास है। हमारे किसानों को समन्वित कृषि को प्राथमिकता देना जरूरी है। इसके लिए उद्यानिकी फसलें, सब्जियां, पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, कुक्कुट पालन आदि का समावेश किया जाना चाहिए, तभी हमारे ग्रामीण क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास संभव हो सकेगा। छत्तीसगढ़ आदिवासी बहुल एवं कृषि प्रधान राज्य है। यहां की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है। अभी भी ग्रामीण अंचलों में धान की रोपाई और फसलों की कटाई महिलाएं ही करती हैं। खेती में नवीनतम कृषि तकनीक, मशीनरी, उन्नत बीज, आधुनिक तरीके से खेती और सिंचाई के उन्नत उपायों को अपनाने के लिए किसानों को प्रेरित किया जाए और उन्हें कृषि मशीनरी रियायती दरों पर किराए में उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए। यहां के आदिवासी अपने जीवन यापन हेतु वनोपज और कृषि पर मुख्य रूप से निर्भर हैं। इनके उत्थान हेतु कार्य करना एवं इन्हें मुख्य धारा में शामिल करना हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्हांेने आशा व्यक्त की कि कृषि मड़ई के जरिए राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हो रहे कृषि अनुसंधान, फसल की नई प्रजातियों की खोज, कृषि क्षेत्र में उद्यमिता विकास का लाभ यहां के कृषक भाई-बहनों और स्व सहायता समूहों को मिलेगा और हम सब मिलकर अपनी वसुंधरा को हरा-भरा रखेंगे, तभी वह भी हमें खुशहाल और समृद्ध रखेगी।
समापन समारोह को संबोधित करने हुए कृषि मंत्री श्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि खेती किसानी की सफलता के लिए तीन बातें महत्वपूर्ण होती है – किसान की मेहनत, कृषि संसाधन और नवीन अनुसंधान। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा अपनी स्थापना के बाद से ही निरंतर किसानों के विकास के लिए नये-नये अनुसंधान कार्य किये जा रहे हैं, नवीनतम कृषि प्रौद्योगिकी विकसित की जा रही है तथा इन्हें कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से किसानों के खेतों तक पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पांच दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय कृषि मड़ई के माध्यम से राज्य के हजारों किसान नवीन कृषि अनुसंधानों से रूबरू हुए हैं और निश्चित तौर से वे इसका लाभ उठायेगें। श्री चौबे ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों के हित में लगातार नई-नई योजनाएं संचालित की जा रही हैं, इस खरीफ वर्ष में किसानों से 110 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की जाएगी। उन्होंने कहा कि कल 17 अक्टूबर को राज्य सरकार द्वारा राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत प्रदेश के किसानों के खातों में लगभग 2 हजार करोड़ रूपये की राशि और प्रधानमंत्री कृषक समृद्धि योजना के तहत लगभग 200 करोड़ रूपये की राशि स्थानांतरित की गई है। इस प्रकार किसानों को 22 सौ करोड़ रूपये की आर्थिक सहायता प्राप्त हुई है। श्री चौबे ने एग्री कार्नीवाल के सफल आयोजन के लिए कुलपति डॉ. चंदेल तथा उनके सभी सहयोगियों को बधाई और शुभकामनाएं दी।
कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह ने एग्री कार्नीवाल के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस प्राकर के आयोजनों में अन्तर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर के कृषि वैज्ञानिकों के शामिल होने से उनके अनुभवों का लाभ यहां के वैज्ञानिकों और किसानों को मिलना निश्चित है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा कृषि शिक्षा, कृषि अनुसंधान एवं कृषि विस्तार सेवाओं के माध्यम से राज्य में कृषि एवं कृषकों के विकास हेतु सार्थक प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों, स्कूली बच्चों तथा आम नागरिकों को कृषि विश्वविद्यालय द्वारा किये जा रहे अनुसंधानों एवं विकास गतिविधियों से अवगत कराने के लिए पांच दिवसीय एग्री कार्नीवाल का आयोजन किया गया जिसमें लगभग 20 हजार किसानों, 4 हजार स्कूली बच्चों तथा हजारों की संख्या में आम नागरिक शामिल हुए। उन्होंने कहा कि एग्री कार्नीवाल के दौरान कृषि से जुड़े विभिन्न विषयों तथा गतिविधियों पर विविध आयोजन किये गए जिनमें उन्होंने बताया कि इस दौरान आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय कार्यशाला में भारत, युगांडा, जिम्बाम्बे, मेडागास्कर, सेनेगल, इथोपिया, नामीबिया, घाना, माली, सेशेल्स, फिलीपींस, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका आदि देशों से आए कृषि वैज्ञानिकों ने कृषि अनुसंधान एवं विस्तार हेतु गहन विचार-विमर्श किया गया। डॉ. चंदेल ने बताया कि पांच दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय कृषि मड़ई में प्रतिदिन विभिन्न कार्यक्रमों – छत्तीसगढ़ से कृषि एवं उद्यानिकी उत्पादों के निर्यात हेतु क्रेता-विक्रेता सम्मेलन, नवाचार, स्टार्टअप एवं उद्यमिता पर कार्यशाला, छत्तीसगढ़ में लघु वनोपज प्रसंस्करण एवं निर्यात पर कार्यशाला, जैव विविधता संरक्षण एवं कृषक प्रजातियों के पंजीयन कार्यशाला एवं प्रदर्शनी, परीक्षण प्रयोगशालाओं की मान्यता हेतु जागरूकता कार्यशाला तथा फार्म टेक एशिया अन्तर्राष्ट्रीय कृषि मेला एवं प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। मेले में आने वाले किसानों एवं शालेय विद्यार्थियों को अनुसंधान प्रक्षेत्र का भ्रमण एवं 23 हजार से अधिक संग्रहित धान द्रव्य का अवलोकन कराया गया। इस अवसर पर आई.जी.के. राबी एवं छत्तीसगढ़ बायोटेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसायटी द्वारा नवीन स्टार्टअप एवं नवाचारी विचार हेतु तीन प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया डॉ. एस.व्ही. वेरूलकर को प्रथम पुरस्कार 25 हजार रूपये, श्री देवेश पटेल को द्वितीय पुरस्कार 15 हजार रूपये और तृतीय पुरस्कार श्री रीतेश कुमार टांक को 10 हजार रूपये की नगद राशि एवं प्रशस्ति पत्र से पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र शर्मा, राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री एन. वेंकटेश्वरण, केनिया के कृषि वैज्ञानिक डॉ. रूथ मुसाली, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक विस्तार डॉ. अजय वर्मा, निदेशक शिक्षण डॉ. एस.एस. सेंगर, निदेशक प्रक्षेत्र एवं बीज डॉ. एस.एस. टुटेजा, अधिष्ठाता डॉ. के.एल. नंदेहा, डॉ. विनय पाण्डेय, डॉ. ए.के. दवे, डॉ. एम.पी. ठाकुर, डॉ. आर.एन. सिंह, अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. (मेजर) जी.के. श्रीवास्तव, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक, वैज्ञानिक, विद्यार्थी एवं बड़ी संख्या में प्रगतिशील कृषक उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के संचालक अनुसंधान डॉ. विवेक त्रिपाठी द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया।