आरक्षण में अब आगे क्या?
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्युज

छत्तीसगढ़ में आरक्षण पर राज्य सरकार और राजभवन के बीच जारी है। ये संघर्ष खुले तौर पर अब मीडिया के सामने भी स्वीकारा जाने लगा है। वैसे इस सप्ताह फिर आरक्षण मामले में काफी कुछ हुआ। हाईकोर्ट में राज्य शासन की ओर से याचिका लगाई गई। राज्य सरकार की ओर वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा ने पैरवी की। जिसके बाद जस्टिस रजनी दुबे की सिंगल बेंच ने नोटिस जारी किया। छत्तीसगढ़ शासन की ओर से सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि विधानसभा में विधेयक पारित होने के बाद राज्यपाल सिर्फ सहमति या असमति दे सकते हैं, लेकिन बिना किसी वजह के बिल को इस तरह से लंबे समय तक रोका नहीं जा सकता। जिस लेटर को कांग्रेस के ऑफिशियल ग्रुप में एक पत्र डाला गया। जिसके बाद फिर राजभवन ने 10 फरवरी को बयान जारी करते हुए कहा कि ‘छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने आरक्षण संशोधन विधेयक पर हस्ताक्षर ना होने के संबंध में राजभवन सचिवालय को जारी नोटिस पर रोक लगा दी है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने राजभवन सचिवालय को आरक्षण संशोधन विधेयक पर हस्ताक्षर ना होने के संबंध नोटिस जारी किया था। उक्त नोटिस के विरुद्ध राजभवन सचिवालय द्वारा उच्च न्यायालय में रिकॉल एप्लीकेशन फाईल किया गया था।
रिकॉल एप्लीकेशन के माध्यम से उच्च न्यायालय में दलील दी गई कि भारत के संविधान में उल्लेखित अनुच्छेद 200 के अनुरूप विधानसभा द्वारा पारित किसी विधेयक को राज्यपाल अनुमति दे सकता है, रोक सकता है, राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित रख सकता है। राज्यपाल के प्रतिनिधि के रूप में सचिव को भी इस आशय नोटिस जारी नहीं किया जा सकता है।’
वैसे संविधान के विद्वान बताते हैं कि संविधान के अनुच्छेद 361 में अपवाद है। जिसके मुताबिक भारत के संविधान के अनुच्छेद 361 के अनुसार, अपने कार्यकाल के दौरान राज्यपाल के खिलाफ अदालत में आपराधिक कार्यवाही नहीं की जा सकती है। राष्ट्रपति या राज्यपाल, कार्यालय में किसी भी अदालत को अपनी शक्तियों के प्रयोग और निष्पादन के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार नहीं हैं। देखना ये है कि आरक्षण का मामला और कितने ही विवादों और बयानी संघर्ष को जन्म देता नज़र आयेगा?
आरक्षण के विवाद के बीच अनुसुइया चलीं गईं मणिपुर
आरक्षण के गरमाये मामले के बीच छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों के राज्यपाल बदल दिए गए हैं। अब छत्तीसगढ़ की राज्यपाल रहीं अनुसुइया उइके को मणिपुर का राजपाल बनाकर भेजा गया है। वहीं, बिश्वभूषण हरिचंदन को छत्तीसगढ़ का नया राज्यपाल बनाया गया है। राज्यपाल बदले जाने के बाद ये तय है कि राजभवन सचिवालय के काज तो वैसे ही औपचारिकताओं के बीच जारी रहेंगे, वहीं जो तेवर राज्यपाल रहीं अनुसुइया उइके का रहा है, उसे राज्य के लोग और विशेष रुप से राजनीतिक दल के लोग भूले नहीं भूल पाएंगे।

