छत्तीसगढ़

सर्व जन का लोकप्रिय पर्व , 18 दिसंबर मंदिरवा म का करे जईबो ,अपन घटही के देवो ल मनाइबो

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जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज़ 
मनखे मनखे एक बरोबर,का संदेश देने वाले देश विदेश में 50 लाख से अधिक निवास रत सतनामी समाज के प्रवर्तक ,युग पुरुष तथा छत्तीसगढ़ ,मध्यप्रदेश ,उड़ीसा महाराष्ट्र ,उत्तरप्रदेश ,जम्मू ,सहित देश के अधिकांश हिस्सों में मौजूद सर्व जन समाज में लोकप्रिय संत शिरोमणि गुरुघासी दास बाबा के जन्मदिन 18 दिसम्बर को धूमधाम से पर्व का आयोजन किया जाता हैं
महामानव क्रांतिकारी परिवर्तन के लिए विचारों से अहिंसा के रास्ते में चलकर ,निर्भीक ,निडर ,अन्याय से डटकर मुकाबला करने वाले समाज की स्थापना करने वाले भारत के प्रथम अनुयायी संत का जन्म वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य के जिला बिलाईगढ़ सारंगगढ़ के गिरोधपुरी गॉव में 18 दिसम्बर 1756 को पिता महगू दास माँ अमरौतिन के कोख में जन्म लिया ,वर्तमान स्थिति में समाज में ब्याप्त भुखमरी,असमानता , छुवाछुत ,भेदभाव ,कुरूतिया ,पाखंड ,नशा ,मूर्ति पूजा को दिनचर्या में देखकर मन विचलित हुआ और वाड़ी के संदेश से अहिंसा का मार्ग पर चलकर लोगों में संदेश देने सत्य के राह पर चलकर आगे बढ़े ,जगह जगह संदेश के माध्यम से वैज्ञानिक आधार पर हरेक विषमताओं का तर्क शील नीति का पालन करते हुए भ्रमण किया और समाज सुधार हेतु उनकी कही वाड़ी आज भी लोकप्रिय हैं ,और आज यह एक भारत के लोकप्रिय पर्व में परिवर्तित हो चुका है ,आज यह त्योहार जनमानस का पर्व में तब्दील हो चुका है ,समाज में उनके संदेशो को पहुंचाने संविधान के रचनाकार बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के प्रेरणा से महासमुंद जिला के नकुलदास ढिढि ने 1936 के लगभग में लोकनृत्य पंथी से सुरुवात कर जनमानस में संदेश देने में सफल हुआ ,ज्ञात हो संत गुरुघासी बाबा के कहे शब्द मनखे मनखे एक बरोबर ,का संदेश भारतीय संविधान के प्रथम शब्द ,हम भारत के लोग ।प्रेरित हैं ,मंदिरवा म का करे जईबो धर्मनिरपेक्ष भारत के निर्माण में समाहित है ।
देश विदेश में प्रख्यात यह संत का प्रसार आज मानव समाज में सुधार का रास्ता अख्तियार कर लिया ,बाबा गुरुघासी दास के ब्यक्ति,व समाज तक सीमित न होकर सर्व जन समाज का लोकप्रिय पर्व में तब्दील हो चूका हैं , 1962 से लगभग सामाजिक न्याय के लिए समाज में ब्याप्त कुरीतियों और समानता के लिए उनकी यादों को सहेजने छ ग राज के मूँगेली जिला के मारू कापा अब लालपुर गॉव में लाखों की उपस्थिति में 18 दिसंबर को सतनाम मेला का आयोजन प्रत्येक वर्ष होता है , आयोजन अब देश के सतनामी समाज के निवासरत लोगों ने गॉव गॉव में 18 से 31 दिसंबर तक मनाने की परंपरा ,रिवाज में बदल गई है ,राजनीतिक दलों के लिए सतनामी समाज की भूमिका निर्णायक भूमिका अदा करती हैं , प्रभाव का अंदाजा इसी में लगता है ममता मयि मिनीमाता छ ग की प्रथम महिला संसद होने का दर्जा हासिल हैं जो अनारक्षित संसद की सीट रायपुर लोकसभा से लगातार संसद रही ,जिनकी नामों पर हसदेव नदी पर मिनी माता बांगो बांध स्थापित हैं ,जिनकी पानी से लाखों लोगों के पेट भरता है और बिजली से प्रकाश मिलती हैं तत्कालीन नव निर्मित छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री अजित जोगी ने विधानसभा भवन का नाम रखा तथा जन्म स्थली गॉव गिरोधपुरी में विश्व का सबसे बड़ा जय स्तंभ बनाने की घोषणा कर वजट में शामिल किया जिसे आज प्रसिद्ध पर्यटन स्थल के लिए जाना जाता है,आज भी सन्त बाबा गुरुघासीदास बाबा के वंसज मंत्री ,विधायक के पद पर विराजित हैं।
राजनीतिक भूमिका का संदेश निहित है संत शिरोमणि बाबा गुरुघासीदास के नाम पर 1984 में अविभाजित मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंग जी ने तत्कालीन विधायक बंसीलाल घृतलहरे व मा डॉ खेलन राम जांगड़े के साथ मिलकर बिलासपुर में विश्व विद्यालय की नींव रखी और उन्हीं के कार्यकाल में केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिया ,आज गुरुघासी दास केंद्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर में देश भर के विद्यार्थियों का जमावाड़ा है ,शिक्षा ग्रहण कर देश विदेश मेंप्रमुख जगहों पर सर्विस कर रहे हैं
पर विडम्बना है आज भी उक्त विश्व विद्यालय में सन्त शिरोमणि बाबा गुरुघासीदास के नामपर एक शोध पीठ नहीं है ,न ही उनके जीवन पर आधारित शोध हेतु पीठ का अभाव है ,
ज्ञात हो कई जानकारों ने बाबा गुरुघासी दास के नाम पर जुड़े शब्द दास का मतलब दीनहीन ,गरीब ,गुलाम ,सेवक ,कमजोर वर्ग की धारणा को भिमोत्सव समिति द्वारा आयोजित संविधान महोत्सव 2023 में आमंत्रित मुख्य वक्ता ,अतिथि विश्व विख्यात भाषा वैज्ञानिक प्रो डॉ राजेन्द्र प्रसाद सिंह ने अपने उद्बोधन में स्पष्ट किया कि दास का मतलब द्रष्टा और द्रष्टा का अर्थ दिब्य ज्ञान ,दर्शन कराने वाले ,दार्शनिक लोग बताकर धारणा को समाप्त कर दिया ।
समारोह को युवा शोधकर्ता डॉ नरेश कुमार साहू ने स्प्ष्ट किया कि बाबा गुरुघासी दास की दिब्य वाड़ी से प्रेरित होकर तत्कालीन रायपुर जिला के तेलासीपुरी गॉव में निवासरत तेली ,यादव,कुर्मी लोगों के सतनाम का मार्ग पर चलने जाति परिवर्तन किया जो आज गुरूपंच सरनेम का उपयोग करते हैं ,समारोह में संचानल करने वाले कृष्णकुमार नवरंग ने बताया कि सतनामी समाज के निवासी गॉव में ऐसा कोई ऐसा गॉव नहीं जहाँ एक माल गुजार न हुवा हो ,आज भी है ,
विश्व के इतिहास के अध्ययन में ऐसा पहली बार पढ़ने ,देखने को मिलता है जब कोई एक ब्यक्ति की प्रतिभा ,रहन सहन ,वेश भूषा ,को देखकर राजा का दर्जा दिया हो ,यह मिशाल हासिल हुवा बाबा गुरुघासी दास के पुत्र बालक दास को ,जिनकी प्रतिभा पर अंग्रेजों ने राजा का सम्मान दिया ,आज उनके बलिदान भूमि औराबांधा मूँगेली को भा ज पा के घोषणा पत्र में शामिल कर अधिग्रहित कर सतनामी समाज को सौंपने का वचन दिया है ,
आज उनकी यादों का दिन हैं ,सत्य पथ पर संकल्प लेने का दिन हैं,वर्तमान समय में ब्याप्त नशा ,ब्यभिचार,को समाप्त कर एक सीधे तौर पर आय ए एस ,आय पी एस बनाने तथा बाबा गुरुघासी दास के बताए मार्ग को आगे बढ़ाने का संकल्प लें