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राष्ट्रीय धुर पंचमी महापर्व शिव तपोभूमि अमरकंटक में लाखों श्रद्धालु लोगों ने बड़ी धूमधाम से मनाया गया

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जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज़ 
विगत लगातार 8 वर्षों की भांति इस वर्ष भी गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति छत्तीसगढ़ गोड़वाना संघ एवं युवा प्रभाग छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में परमश्रद्धेय गोंडवाना गुरूदेव दुर्गे भगत सिदार एवं ममतामई गुरुमाता दुर्गे दुलेश्वरी के सानिध्य एवं आशीर्वाद से रंग पंचमी के पावन पर्व को धुर पंचमी के रूप बड़े धूमधाम से मनाया गया।
जिसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालु लोग आस्था विश्वास के साथ देश के विभिन्न भागों जिसमें छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उड़िसा, झारखंड ,बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र से आदिवासी समाज के एकत्रित हुए। जहां लाखों लोगों को परसा के फूल जिसे टेसू प्लास भी कहा जाता है जो आयुर्वेदिक है के रंगों से रंग खेला गया तथा सभी को एक साथ भोजन भी कराया गया जो अपने आप में एक रिकार्ड है। जिसे गिनीज बुक में दर्ज किया जाना चाहिए।
देश के बारह करोड़ आदिवासियों की संख्या को 1871 से 1951 तक प्रदत्त धर्म कालम में आदि धर्म (गोंडी धर्म) जोड़ने तथा गोंडी भाषा को आठवीं अनुसूची में जोड़ने तथा
प्राकृतिक विपदाओं तथा धरती पर बड़ रहे ग्लोबल वार्मिंग को देखते हुए वनो के विनाश को देखते हुए जंगलों की कटाई पर रोक लगाने संबंधी आग्रह करते हुए आवाज उठाया गया।
छत्तीसगढ़ से गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति छत्तीसगढ़ गोड़वाना संघ प्रमुखों में संयोजक लच्छन मरकाम,संरक्षक सिया मंडावी, अध्यक्ष चंद्रभान नेताम, महासचिव प्रीतम छेदैईहा, कार्य प्रांतीय महासचिव आर.के.कुंजाम,सह सचिव गजानंद नुरूटी कोषाध्यक्ष गौकरण कुंजाम छत्तीसगढ़ गोड़वाना संघ से अध्यक्ष सोनऊ ध्रुवे, महासचिव चन्दन मरकाम, झारखंड से उर्मिला उंराव सुपुत्री पेन वासी कार्तिक उंराव,बिहार से रमेश गोंड़, उत्तर प्रदेश गोरखपुर से जयगांधी धुरवा,सोनू धुरवा एडवोकेट, उड़िसा से बजरंग मांझी, महाराष्ट्र तथा मध्य प्रदेश से आयोजक समिति प्रदेश संयोजक दिलीप सिंह सैयाम, अध्यक्ष प्रेमसिंह श्याम तथा पूरी टीम तथा लाखों की संख्या में लोग शिव तपोभूमि गोंडवाना की उत्पत्ति स्थल अमरकंटक में मां नर-मादा जिसे लोग अपभ्रंश स्वरूप नर्मदा कहते हैं में डुबकी लगाई।