ग्रामीण विशेषछत्तीसगढ़

भूलन परदेसी के गाँव जमनीपाली में … एक शाम सुमन नेताम के नाम

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जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज 

अस्सी के दशक में एनटीपीसी जमनीपाली कालोनी में एक नाम हरेक कालोनीवासी के जुबान पर रहता था : वह था “भूलन परदेसी”. एनटीपीसी कोरबा परियोजना की त्रैमासिक गृह पत्रिका थी “सर्जना ”. इसमें छत्तीसगढ़ी में एक धारावाहिक स्तम्भ “ माटी के अंचरा “ प्रकाशित होता था. स्तंभकार था “भूलन परदेसी” जिसमें हलके फुल्के हास्य-व्यंग के साथ छत्तीसगढ़ के लोक जीवन और एनटीपीसी के लोक सन्देश का चित्रण होता था. भूलन परदेसी इतना लोकप्रिय हो गया कि, आदिवासी समाज जिसमें गोंडों की बहुलता थी वे आपस में सुख-दुःख में बैठने लगे. सगाना पिकनिक होने लगा. चूँकि एनटीपीसी भारत सरकार का सार्वजनिक उद्यम था इसलिए कालोनी में मिनी इण्डिया का दर्शन होता है जिसमे विभिन्न प्रान्त के विविध संस्कृति और भाषा भाषी लोग रहते हैं. इसलिए विविधता के बीच एक अनौपचारिक, अलिखित किन्तु एक सुदृढ़ सामाजिक संगठन का अनायास ही निर्माण हो गया. इसके ध्रुव बिंदु थे स्मृतिशेष शिवसिंह गोंड और भूलन परदेसी. संगठन के शक्तिशाली शलाका थे सर्वश्री मदन सिदार, उदय सिदार, समय सिंह गोंड, धरम सिंह कंवर, घनश्याम सिंह कंवर फिरतू राज, दुकालू राज, रामाधीन गोंड, कोमल सिंह ठाकुर, एस के ध्रुव, महेंद्र सिदार, पुनीराम गोंड, जगदीश सिदार, शिव गोविन्द मरकाम, लक्ष्मण नेताम पी. एल. खैरवार, शांतनु सिदार, आदि. छत्तीसगढ़िया लोग सांस्कृतिक रूप से एक जुट होने लगे… तब आया एम्प्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन “ प्रगति क्लब’ के जनरल सेक्रेटरी का चुनाव. यह चुनाव विधायक के चुनाव जैसे ही रंग, ढंग, चाल और ढाल के साथ लडा जाता है. साथियों ने भूलन परदेसी को चुनाव में खड़ा कर दिया. मुख्य रणनीतिकार में सर्वश्री शिवसिंह गोंड, मदन सिदार टी.पी. देवांगन, सीताराम साहू रहे. कामगार यूनियन के नेता इस चुनाव में सक्रीय रहते थे. धुरंधर प्रत्याशी और उनके रणनीतिकार हमें महत्त्व नहीं देते थे, लेकिन चुनाव में बने रहने के लिए प्रोत्साहित करते थे ताकि वोट बटने से उन्हें लाभ मिले. चुनाव में भूलन परदेसी को विजयश्री मिली. तब कालोनीवासियों को पता चला कि इनका कोई सामाजिक संगठन है. गोंडवाना समाज से प्रेरित होकर अन्य जातीय संगठन… साहू समाज कुर्मी समाज, यादव समाज का आदि का निर्माण हुआ. और एनटीपीसी कोरबा में छत्तीसगढ़िया वाद प्रारंभ हुआ. आज एनटीपीसी जमनीपाली में गोंडवाना समाज के कई प्रतीक हैं. कालोनी के गोपालपुर गेट पर बूढ़ादेव ठाना है. बगल में वीर नारायण सिंह की प्रतिमा स्थापित है. कालोनी के यमुना विहार में “गउरा चौंरा” भी है जहां प्रत्येक वर्ष पारंपरिक गउरा तिहार होता है.
एनटीपीसी जमनीपाली के जमीन से दो सशक्त राजनैतिक शक्ति का बीजांकुर प्रस्फुटित हुआ. एक… दादा हीरासिंह मरकाम के गोंडवाना समग्र क्रांति आन्दोलन जो कालांतर में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का रूप लिया. दूसरा… मा. काशीराम जी के DS4… दलित शोषित समाज संघर्ष समिति जो आगे चलकर बहुजन समाज पार्टी में रूपांतरित हुआ. दोनों संगठन समाज के वंचित वर्ग… आदिवासियों और दलितो के आवाज बने. तत्कालीन परिस्थिति में WCL, MPEB, Balco के तुलना में NTPC युवा प्रतिष्ठान था. और उसके employee बेहतर समयदानी, सक्रीय, सक्षम और साधन संपन्न थे. एनटीपीसी अधिकांश लोग उस समय बेचलर थे. दादा किसी भी साथी के रुम में ठहर जाते थे और उनके ही बाइक के पीछे बठकर गाँव गाँव घूमते थे. DS4 से जुड़े साथी साईकिल पर घूमते थे. इस तरह से दोनों आन्दोलन के जनाधार और धनाधार जमनीपाली में मौजूद था.
ऐसे जमनीपाली के सेवानिवृत्त वरिष्ठ जनो का स्नेह मिलन समारोह का आयोजन किया श्रीमती मिन्त्रा सुमन नेताम ने. अवसर था उनके सेवा निवृत्ति के पार्टी का, दिन था 11 अगस्त, 2024 स्थान कल्याण मंडप एनटीपीसी जमनीपाली. सुमन नेताम SECL बलगी प्रोजेक्ट से विगत 31 जुलाई को नर्सिंग ऑफिसर के पद से रिटायर हुई है. उनके पतिश्री ठाकुर राम नेताम पहले ही एनटीपीसी से रिटायर हो गए हैं. उनके पुत्री नागपुर में डाक्टर हैं पुत्र MBA हैं और स्वयं का एग्रो बिजनेस है. सुमन जी आदिवासी शक्तिपीठ कोरबा की सशक्त सांस्कृतिक और पुनेमी स्तम्भ हैं उन्होंने रायपुर में तत्कालीन छत्तीसगढ़ शासन के मंत्री परिषद् के समक्ष मेरे पुत्र के पारंपरिक सगाना रीति से विवाह संपन्न कराने में सहभागिता निभाई थी.
स्नेह मिलन समारोह में नेताम दंपत्ति को गउरा ठाना से पूजा कर करमा दल के साथ नाचते गाते कल्याण मंडप तक लाया गया. जिसमे सभी आमंत्रित अतिथि गण सपरिवार सम्मिलित हुए. मा. लखन देवांगन केबिनेट मंत्री उद्योग, वाणिज्य और श्रम विभाग ने अपनी उपस्थिति देकर कार्यक्रम को गरिमा प्रदान किया. मंचीय सांस्कृतिक कार्यक्रम की कड़ी में अतिथियों तथा उनके परिजनो ने शानदार लोक नृत्य प्रस्तुत किया. सर्व आदिवासी समाज मातृशक्ति समूह सक्ती और आदिवासी शक्तिपीठ कोरबा ने अपनी विशिष्ठ अंदाज में सांस्कृतिक प्रस्तुति से सबका दिल जीत लिया. कार्यक्रम का सफल सञ्चालन मदन सिदार ने किया.

इस स्नेह मिलन कार्यक्रम में बिलासपुर से रमेश चन्द्र श्याम समय सिंह गोंड,
जगदीश प्रसाद सिदार, पाली से रामनाथ पुलस्त, सक्ती से हेम नारायण गोंड, उदय सिदार गणेश राम सिदार, डभरा से मदन सिदार, पलारी से आर के ध्रुव, राजनंदगांव से लक्ष्मण नेताम, भाटापारा से राजेश्वरी ध्रुव, कोरबा से छेदीलाल गोंड, शांतनु सिदार, राधे श्याम राज जैसे वरिष्ठ लोग सपरिवार उपस्थित रहे. शक्तिपीठ कोरबा से निर्मल सिंह राज, कृष्णा राजेश बी एम. धुर्वे, रमेश सिरका शामिल हुए.

मंचीय कार्यक्रम समापन के पश्चात एनटीपीसी जमनीपाली गोंडवाना समाज की पारिवारिक बैठक हुई. समाज के स्वर्णिम अतीत के साथ भूलन परदेसी को भी याद किया गया. सभी रिटायर हो चुके और गाँव में बस गए लोगों की एक बैठक बुलाने का प्रस्ताव सर्व सम्मति से पारित हुआ. इसकी जिम्मेदारी भूलन परदेसी की दी गई.
ये भूलन परदेसी कौन है ? जानना नहीं चाहेंगे ?
इन पंकित्यों का लेखक ही भूलन परदेसी है.