ग्राम पीथमपुर (लोरमी) में आदिवासी जमीन के गैर आदिवासि करण पर विचार मंथन ..
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज
आदिवासी जमीन के गैर आदिवासी करण रोकने लालपुर थाना तहसील में बिलासपुर के सर्व आदिवासी समाज के युवा कार्यकर्ताओं ने जो आपत्ति दर्ज की है उसने क्षेत्र के सगाजनो में उम्मीद की एक लौ जगा दी है. पिछली बार जब २३ अगस्त को जब बिलासपुर से हम लालपुर थाना कोर्ट में दलील पेश किये थे तो स्थानीय सगाजन बहुत प्रभावित हुए थे; और अगली पेशी ५ सितम्बर को क्षेत्र के सगाजनो ने स्वप्रेरित होकर ग्राम पीथमपुर के बैठक में आमंत्रित किया था.
सो लालपुर थाना कोर्ट से पीथमपुर गाँव के लिए निकल पड़े. क्षेत्र के उत्साही युवाशक्तियों के अगुवाई में ग्राम बिजराकापा, बैगाकापा, चिरघुट्टी होते हुए पीथमपुर पहुंचे.
सगाजनो की बैठक नए बने गोंडवाना भवन में रखी गई थी. सगाजन पहले ही उपस्थित थे.दरअसल दयाराम पोरतेजी कुसुमकूड़ा वाले जिन्होंने अपनी जमीन को अपने मितनहा भांचा को बेचने के लिए आवेदन किया है, ने मुझे शिकायत किया था कि ग्राम पीथमपुर के हीरा मरावीजी ने अपनी जमीन के मार्फ़त पैसठ हजार रूपये लिया है. और वापस नहीं कर रहा है, और गाँव के सगाजन हीरा मरावी का ही साथ दे रहे हैं. इसी मसले सहित आदिवासी जमीन को गैर आदिवासियों को बेचने की माध्यम बनने वालो के साथ “कैसे निपटा जाए” विषय पर चर्चा के लिए पीथमपुरवाले सगाजन बैठक बुलाये थे. विषय पर खुलकर चर्चा हुई. हिरा मरावी जी ने सिर्फ पांच हजार रूपये लिया है. दयाराम पोरते जी से लोग नाराज लग रहे थे. यह बात सामने आई कि विषम परिस्थितियों में गरीब आदिवासियों को किस्तों में गुप-चुप आर्थिक सहायता कर उनकी जमीन दुसरे आदिवासी के नाम पर खरीद लेते हैं. समाज के सक्षम आदिवासियों को भनक भी नहीं लगता है. हरेक पहलुओं पर सोच विचार कर सुझाव पेश किया गया.
बचाओ मुहीम में बिलासपुर से साथ रहे सर्व श्री समय सिंह गोंड़ कार्यकारी जिला अध्यक्ष छत्तीसगढ़ गोंडवाना गोंड महासभा बिलासपुर, अनिल ध्रुव प्रदेश संयोजक आदिवासी स्टूडेंट यूनियन, रवि मरकाम, बद्री खैरवार. लोरमी क्षेत्र से गोंड समाज के पदाधिकारी सर्वश्री प्रकश मरकाम, दिनेश शाह उइके, प्रीतम कुरेटी, दीप ध्रुव, हीरालाल मरावी, रोहित मार्को, राधे श्याम ध्रुव,शिव शंकर पोर्ते,संतराम खुशरो, जोहित मरकाम, कुंवारु राम पोर्ते, सुग्रीव मरकाम, विनोद पोरते रामुनगर, राजकुमार ध्रुव रामुनगर आदि.साथ रहे.
मुद्दे पर लोग काफी संवेदनशील हैं. सामाजिक सोच एक दिन जरुर रंग लाएगी. विचार मंथन अभी अनंतिम है.

