गोंडवाना के इतिहास में जिसके राज में सोने का मुहर चलता था….. वह संग्रामशाह – रानी दुर्गावती मंडावी का शासनकाल था
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज वह संग्रामशाह – रानी दुर्गावती मंडावी का शासनकाल था….
यह जानकारी मुख्य अतिथि रमेशचंद्र श्याम ने साझा की. अवसर था शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान अकलतरा में आयोजित जिला नोडल स्तरीय “जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास” व्याख्यान कार्यक्रम का.
गोंडवना साम्राज्य के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बाते कि गोंड़ राजाओं ने सत्रह सौ वर्ष तक राज किया था. गोंड राजवंश की स्थापना नर्मद नदी के किनारे गढ़ कटंगा में यदुराय जिन्हें बोलचाल में जादो राय बोलते थे ने ईसवी सन 157 में किया था. कालांतर में गोंड साम्राज्य का केंद्र गढ़ मंडला स्थानातरित हो गया. गोंडवाना साम्राज्य वर्तमान मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, उड़ीसा, बिहार झारखण्ड के कुछ भाग शामिल थे. गोंड वंश में कई प्रतापी राजा हुए जिनके साथ कई आदिवासी और राजपूत राजाओं का गठबंधन रहा. मंडला को पंद्रहवी शताब्दी तक महिष्मति नगरी के नाम से जाना जाता था. मंडला गढ़ के राजाओं को “माहेषमतेय” अग्रनाम से विभूषित किया जाता था. पंद्रहवी शताब्दी में माहेष्मतेय संग्रामशाह – दलपत शाह मंडावी – रानी दुर्गावती के शासन काल को समृद्धि और सुशासन के लिए गोंडवाना का स्वर्णयुग का दर्जा प्राप्त है. इसी काल में सोने का मुहर (सिक्का) चलता था. यह माना जाता है कि संग्राम शाह को लोहे को सोना बनाने की कीमियागिरी (केमेस्ट्री) मालूम था. वे अपनी प्रजा से हल में लोहे के फाल कसने के जेरु (क्लेम्प) दान में लिया करते थे और उसे सोना में परिवर्तित करते थे.
ईसवी सन1564 में रानी दुर्गावती के बलिदान के बाद पुत्र नारायन शाह के अबोध बालक होने के कारण दलपतशाह के भाई चन्द्रशाह राजगद्दी पर बैठे. अठारवी सदी में इन्ही के दसवीं पीढ़ी में राजा सुमेर शाह हुए. सुमेर शाह के पुत्र राजा शंकरशाह और उनके पुत्र कुंवर रघुनाथ शाह हुए. सन 1857 के क्रांति में शंकरशाह रघुनाथ शाह मंडावी के बलिदान के साथ गोंडवाना साम्राज्य का अवसान हुआ. इस तरह से इसवी सन 157 से 1857 तक 1700 वर्ष तक गोंड वंश का शासन रहा.
मुख्य अतिथि महोदय ने छत्तीसगढ़ के आदिवासी राजाओं का संक्षिप्त जानकारी भी दी.
कार्यक्रम में जांजगीर चांपा जिले के सात I.T.I. के स्टूडेंट्स और ट्रेनिंग आफिसर सहभागिता प्रदान किये. विद्यार्थियों द्वारा रंगोली प्रतियोगित और रंगारंग लोक नृत्य प्रस्तुत किया गया.
कार्यक्रम के विशिस्थ अतिथि रहे सर्वश्री आर एस नेताम, मुख्य न. पा. अधिकारी नरियर, चन्द्र कुमार साहू नायब तहसीलदार अकलतरा, रोहित सारथी सभापति न. पा. परिषद् अकलतरा, डॉ. सी. पी. सिंह, पूर्व चिकित्सा अधिकारी, वि. ख. अकलतरा,
मंच का गरिमापूर्ण सञ्चालन समीक्षा मैडम और मस्तराम कुर्रे सर ने किया.
सम्पूर्ण कार्यक्रम का भव्य संयोजन, संचालन और अध्यक्षता आई टी आई अकलतरा के प्राचार्य श्री सी.एल. गोंड ने किया.
मुख्य अतिथि के बिलासपुर से सर्वश्री श्यामलाल जगत प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य, छत्तीसगढ़ गोंडवाना गोंड महासभा, छेदीलाल नेताम अध्यक्ष गोंड समाज सीपत परिक्षेत्र, घनश्याम खुशरो सचिव, शिवचरण जगत कोषाध्यक्ष, बद्री खैरवार प्रदेश सचिव खैरवार समाज अनिल ध्रुव साथ रहे.
(रमेश चंद्र श्याम )
कार्यकारी प्रांताध्यक्ष

