ग्रामीण विशेषछत्तीसगढ़

गैरादिवासी से विवाहित महिला को आदिवासी सीट से चुनाव लड़ने से रोकने के लिए आदिवासी प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर से की भेंट …. कलेक्टर ने कहा नियमतः विवाह उपरांत जाति न समाप्त होती है न बदलती है.

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जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज 

आदिवासियों को प्राप्त संवैधानिक अधिकार और सहूलियत गैर आदिवासियों द्वारा कुटिलता पूर्वक दुरूपयोग किया जा रहा है. जिनमे से एक है संपन्न और रसूखदार गैर आदिवासियों द्वारा आदिवासी महिला से व्याह कर उनके नाम पर आदिवासियों के जमीन को खरीदना. अब दूसरी तरह की लूट की जा रही है. आदिवासी महिला से शादी कर पञ्च सरपंच से लेकर विधायक तक के चुनाव लड़ाया जा रहा है.
नगरीय निकाय एवं त्रि स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में आदिवासियों के समुचित प्रतिनिधित्व के लिए सीट आरक्षित किया जाता है. लेकिन गैर आदिवासी लोग आदिवासी महिला से विवाह कर उन्हें आदिवासियों के लिए आरक्षित सीट पर प्रत्याशी बनाते हैं. यह आदिवासियों के हक़ और हिस्से पर अवैध कब्ज़ा है. पहले इस तरह की बातें छुटपुट ही होती थी लेकिन आजकल धड़ल्ले और बेशर्मी के साथ हो रही है. इस तरह के बेजा कब्ज़ा आदिवासी समाज के हक़ हिस्से पर ही हो रहा है अनुसूचित जाति के सीट पर ऐसा नहीं हो रहा है. इस समस्या से समूचे छत्तीसगढ़ के आदिवासी समाज उद्वेलित है.
इस मुद्दे को लेकर आदिवासी प्रतिनिधि मंडल ने जिला कलेक्टर सह जिला निर्वाचन अधिकारी से भेंट की. जिला कलेक्टर ने ध्यान से बात सुनी और कुछ तथ्यपरक वैधानिक बातें साझा की… नियमतः अंतरजातीय विवाह उपरान्त व्यक्ति की जाति न समाप्त होती है न ही बदलती है. प्रशासन अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहित और पुरष्कृत भी करती है. आदिवासी जाति प्रमाणपत्र धारी गैर आदिवासी से विवाहित महिला को आदिवासी सीट से चुनाव नामांकन को निरस्त नहीं किया जा सकता. सोसल मिडिया में वायरल एक जनपद के रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा जारी पात्र का हवाला दिए तो बताया गया कि इस तरह के आदेश राज्य चुनाव आयुक्त के द्वारा सभी जिला निर्वाचन को जारी किया जाता है. वायरल पत्र जनपद आर. ओ. द्वारा पंचायत सचिव को लिखा गया है… इस पत्र की प्रमाणिकता जांची जायेगी. ज्ञापन को चुनाव कार्य प्रभारी को मार्क कर अपने अधीनस्थ कर्मचारी को प्रतिनिधि मंडल के साथ भेजकर सम्बंधित अतिरिक्त कलेक्टर से मिलवाया गया. उन्होंने भी ऐसी आदेश से अनभिज्ञता जाहिर की. आपसी विचार विमर्श के पश्चात इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि इस समस्या का समाधान के लिए संविधान में आवश्यक संशोधन करना पडेगा जो विधायिका का काम है.
प्रतिनिधि मंडल में सम्मिलित रहे… रमेश चन्द्र श्याम कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ गोंडवाना गोंड महासभा के साथ रहे सर्वश्री समय सिंह गोंड, कार्यकारी जिला अध्यक्ष, अनिल ध्रुव प्रदेश संयोजक आदिवासी स्टूडेंट यूनियन (ASU), जगदीश प्रसाद सिदार जिला उपाध्यक्ष, बद्री खैरवार प्रदेश सचिव खैरवार समाज.