भारत की अप्रतिम महिला स्वतंत्रता सेनानी महारानी अबक्का के जन्म की 500वीं वर्षगांठ के अवसर पर सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी का वक्तव्य
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज
भारत की अप्रतिम महिला स्वतंत्रता सेनानी महारानी अबक्का के जन्म की 500वीं वर्षगांठ के अवसर पर सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी का वक्तव्य भारत की महान महिला स्वतंत्रता सेनानी उल्लाल महारानी अबक्का एक कुशल प्रशासक, अजेय रणनीतिकार और महापराक्रमी शासक थी। उन्होंने उल्लाल संस्थान दक्षिण कन्नड (कर्नाटक) पर सफलतापूर्वक शासन किया था। उनके जन्म की 500वीं वर्षगांठ पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उनकी अजेय विरासत को हृदय से विनम्र श्रद्धासुमन अर्पण करता है।
उस समय विश्व की अजेय माने जाने वाली शक्तियों में से एक पुर्तगाली आक्रमणकारियों को उन्होंने अपने शासनकाल बार बार परास्त किया था और अपने राज्य की स्वतंत्रता बनाये रखीं। अपनी कूटनीतिक निपुणता तथा उत्तर केरल के राजा सामुद्री (जमोरिन) जैसे शासकों से किये सामरिक संधि के चलते उन्हें यह सफलता बनाये रखना सम्भव हुआ। उनकी रणनीति, शौर्य और निर्भीक नेतृत्व के चलते उन्हें इतिहास के पृष्ठों में “अभयारानी” यह संज्ञा प्राप्त हुई।
महारानी अबक्का ने भारत की सर्व समावेशी परंपरा का निर्वाह करते हुए कई शिव मंदिरों व तीर्थ स्थलों का भी विकास किया था। उन्होंने अपने शासनकाल में सभी मतावलंबियों को समान रूप से सम्मान और समाज के सभी वर्गों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया था किया था। इसी कारण उनकी सद्भावना व एकता की विरासत कर्नाटक में यक्षगान, लोकगीतों व लोक नृत्य द्वारा उनके प्रेरणादायक प्रसंगों के माध्यम से आज भी गूंज रही है।
भारत सरकार ने महारानी अबक्का के अप्रतिम शौर्य, देश और धर्म के प्रति समर्पण व कुशल प्रशासन को सम्मान देते हुए 2003 में उनके नाम पर एक डाक टिकट जारी कर उनकी जीवनी को संपूर्ण देश के जनमानस में प्रसारित किया था। एक विजयी जल सेना का संचालन करने की क्षमता से प्रेरणा लेने के लिए ही 2009 में एक गश्ती पोत का नामकरण रानी अबक्का के नाम पर किया गया था।
महारानी अबक्का का जीवन संपूर्ण देश के नागरिकों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक है। उनके जन्म की 500 वीं जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस आदर्श व्यक्तित्व को श्रद्धासुमन अर्पित करता है तथा संपूर्ण समाज का आह्वान करता है कि उनके तेजस्वी जीवन से प्रेरणा लें और राष्ट्र निर्माण के महान कार्य में अपना प्रभावी योगदान द विश्व शांति और समृद्धि के लिए समरस और संगठित हिन्दू समाज का निर्माण
अनंत काल से ही हिंदू समाज एक प्रदीर्घ और अविस्मरणीय यात्रा में साधनारत रहा है, जिसका उद्देश्य मानव एकता और विश्व कल्याण है। तेजस्वी मातृशक्ति सहित संतों, धर्माचार्यों, तथा महापुरुषों के आशीर्वाद एवं कर्तृत्व के कारण हमारा राष्ट्र कई प्रकार के उतार-चढ़ावों के उपरांत भी निरंतर आगे बढ रहा है।
काल के प्रवाह में राष्ट्र जीवन आए अनेक दोषों को दूर कर एक संगठित, चारित्र्यसंपन्न और सामर्थ्यवान राष्ट्र के रूप में भारत को परम वैभव तक ले जाने हेतु परम पूजनीय डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार ने सन 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्य प्रारम्भ किया। संघकार्य का बीजारोपण करते हुए, डॉ हेडगेवार ने दैनिक शाखा के रूप में व्यक्ति निर्माण की एक अनूठी कार्यपद्धति विकसित की, जो हमारी सनातन परंपराओं व मूल्यों के परिप्रेक्ष्य में राष्ट्र निर्माण का निःस्वार्थ तप बन गया। डॉ. उनके जीवनकाल में ही इस कार्य का एक राष्ट्रव्यापी स्वरूप विकसित हो गया। द्वितीय सरसंघचालक पूजनीय श्री गुरुजी (माधव सदाशिव गोलवलकर) के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्रीय जीवन के विविध क्षेत्रों में शाश्वत चिंतन के प्रकाश में कालसुसंगत युगानुकूल रचनाओं के निर्माण की प्रक्रिया प्रारम्भ हुई।
सौ वर्ष की इस यात्रा में संघ ने दैनिक शाखा द्वारा अर्जित संस्कारों से समाज का अटूट विश्वास और स्नेह प्राप्त किया। इस कालखंड में संघ के स्वयंसेवकों ने प्रेम और आत्मीयता के बल पर मान-अपमान और राग-द्वेष से ऊपर उठ कर सबको साथ लेकर चलने का प्रयास किया। संघकार्य की शताब्दी के अवसर पर हमारा कर्त्तव्य है कि पूज्य संत और समाज की सज्जन शक्ति जिनका आशीर्वाद और सहयोग हर परिस्थिति में हमारा संबल बना, जीवन समर्पित करने वाले निःस्वार्थ कार्यकर्ता और मौन साधना में रत स्वयंसेवक परिवारों का स्मरण करें।
अपनी प्राचीन संस्कृति और समृद्ध परंपराओं के चलते सौहार्दपूर्ण विश्व का निर्माण करने के लिए भारत के पास अनुभवजनित ज्ञान उपलब्ध है। हमारा चिंतन विभेदकारी और आत्मघाती प्रवृत्तियों से मनुष्य को सुरक्षित रखते हुए चराचर जगत में एकत्व की भावना तथा शांति सुनिश्चित करता है।
संघ का यह मानना है कि धर्म के अधिष्ठान पर आत्मविश्वास से परिपूर्ण संगठित सामूहिक जीवन के आधार पर ही हिंदू समाज अपने वैश्विक दायित्व का निर्वाह प्रभावी रूप से कर सकेगा। अतः हमारा कर्तव्य है कि सभी प्रकार के भेदों को नकारने वाला समरसता युक्त आचरण पर्यावरणपूरक जीवनशैली पर आधारित मूल्याधिष्ठित परिवार, ‘स्व’बोध से ओतप्रोत और नागरिक कर्तव्यों के लिए प्रतिबद्ध समाज का चित्र खड़ा करने के लिए हम सब संकल्प करते हैं। हम इसके आधार पर समाज के सब प्रश्नों का समाधान, चुनौतियों का उत्तर देते हुए भौतिक समृद्धि एवं आध्यात्मिकता से परिपूर्ण समर्थ राष्ट्रजीवन खड़ा कर सकेंगे।
अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा सज्जन शक्ति के नेतृत्व में संपूर्ण समाज को साथ लेकर विश्व के सम्मुख उदाहरण प्रस्तुत करने वाला समरस और संगठित भारत का निर्माण करने हेतु संकल्प करती है।

