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पदोन्नति में आरक्षण की बहाली सहित अजजा वर्ग के विभिन्न ज्वलंत समस्याओं के निराकरण हेतु संघ ने राष्ट्रीय जनजाति आयोग को सौंपे ज्ञापन*

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जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज 

छत्तीसगढ अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ रायपुर द्वारा श्री जाटोतु हुसेन माननीय सदस्य राष्ट्रीय जनजाति आयोग के नाम उनके सचिव को न्यू सर्किट हाउस नया रायपुर में विभिन्न ज्वलंत समस्याओं पर ध्यान आकृष्ट कराते हुए निराकरण की मांग की गई है। जिसमें प्रमुख छत्तीसगढ़ में एस एल पी नं.19668/2022 आदेश दिनाँक 01/05/2023 एवं डायरी नं. (सी) 5555/2025 आदेश दिनाँक 24/02/2025 में माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी आदेश और संवैधानिक प्रावधान के तहत संविधान के अनुच्छेद 16-4-ए, 16-4-बी, 335 आरक्षण अधिनियम, नियम के अनुसार पदोन्नति में आरक्षण नहीं दिया जा रहा है। सर्वोच्च न्यायालय के उक्त आदेश एवं प्रावधानों के पालन के बिना कोई भी पदोन्नति आदेश जारी नहीं किया जाए। नियम विरुद्ध पदोन्नति की कार्यवाही तत्काल निरस्त किया जाए और पूर्व की तरह पदोन्नति में आरक्षण तत्काल प्रारंभ किया जाए।

अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों के छात्रवृति हेतु 2.50 लाख की आय-सीमा निर्धारित की गई है, जिसके कारण इस वर्ग के कई विद्यार्थी अर्थ के अभाव में आगे की पढ़ाई से वंचित हो जाते हैं। आदिवासी वर्ग का निर्धारण जन्म से ही हो जाता है इसलिये इस वर्ग के लिये आय-सीमा की बाध्यता को समाप्त किया जावे।

उच्च स्तरीय छानबीन समिति में फर्जी जाति प्रमाण पत्र धारियों का प्रमाण पत्र फर्जी पाये जाने के बाद भी कानुन की आड़ में न्यायालय से स्टे लेकर फर्जी लोग शासकीय सेवा में नौकरी कर रहे हैं। जिसके परिणाम स्वरूप वास्तविक आदिवासी आरक्षण के लाभ से वंचित हो रहे हैं। इन फर्जी लोगों के खिलाफ तत्काल कार्यवाही किया जावे।

छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य जिले के सभी विभागों में तृतिय एवं चतुर्थ वर्ग के पदों पर शत-प्रतिशत भर्ती स्थानीय वर्ग के योग्य बेरोजगारों से आवेदन मंगाकर किया जावे। इससे आदिवासी क्षेत्रों में जो तरह-तरह की घटनायें घट रही है, उस पर तत्काल रोक लगेगा।

छग के अधिकांश शासकीय विभागों में अनुसूचित जनजाति वर्ग के पद रिक्त हैं। जिसमें आजतक भर्ती नही हो पाया है और छग शासन संविदा एवं आउटसोर्सिंग के माध्यम से काम चला रही है। ज्ञात हो संविदा एवं आउटसोर्सिंग पर कार्य करने के लिये कोई आरक्षण नियमों का पालन नही होता है। इसलिए विशेष भर्ती अभियान चलाकर इन रिक्त पदों को भरा जावे।

छ.ग. शासन के सभी माननीय मंत्रियों के पास अनुसूचित जनजाति वर्ग के अधिकारी/कर्मचारी को कम से एक विशेष सहायक / निज सहायक एवं अन्य स्टाफ के पद पर रखा जावे, जिससे सरकार और आदिवासी बाहुल्य समाज के बीच निरंतर कम्युनिकेशन/संवाद बना रहे।

वर्तमान में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में आदिवासी समाज के पुलिस अधीक्षक एवं कलेक्टरों की संख्या बहुत ही कम है। छ.ग. में लोक सेवा आयोग के राज्य प्रशासनिक पद में 18 से 22 वर्ष कार्यानुभव रखने वाले सबसे ज्यादा है। उन्हे उनके योग्यता, क्षमता, कार्यानुभव के अनुकूल पद-प्रतिष्ठा पर पदस्थ किया जावे। आदिवासी समाज के प्रमोशन प्राप्त अधिकारियों को कम से कम 33 जिलों में से 11 जिलों में कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक के पदों पर पदस्थ किया जावे।

आदिवासी समाज के बहुत सारे अधिकारी कर्मचारी बेवजह निलंबित है, वेतन वृद्धि रोकी गई है तथा अन्य कई लघु एवं दीर्घ शस्तियाँ अधिरोपित कर दण्डित किया गया है जिसके कारण पदोन्नति, क्रमोन्नति, एवं समयमान वेतन वृद्धि में रुकावट पैदा कर सामान्य वर्ग के अधिकारियो कर्मचारियों को लाभ दिया जा रहा है। कई स्थानों पर आदिवासी समाज के वरिष्ठ अधिकारियों के ऊपर कनिष्ठ अधिकारियों की पदस्थापना कर दी गई है। जिससे आदिवासी समाज के अधिकारी कर्मचारियों में निराशा व्याप्त है। ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ आदिवासी वर्ग के ऐसे अधिकारी कर्मचारियों की सूची मंगा कर इन अधिकारी कर्मचारियों को त्वरित न्याय दिलाई जावे।
इस अवसर पर संघ के प्रांताध्यक्ष आर एन ध्रुव, समाज सेवा के लिए शहीद वीर नारायण सिंह सम्मान से सम्मानित श्री सोनऊ राम नेताम राष्ट्रीय उपाध्यक्ष गोंडवाना गोंड महासभा, विधिक सलाहकार एम आर ध्रुव, अनुसूचित जनजाति आयोग के सचिव पवन नेताम, संघ के प्रांतीय सदस्य टामेश्वर ठाकुर, उप सरपंच सेरीखेड़ी नया रायपुर शारदा ध्रुव सहित बड़ी संख्या में सामाजिक गण उपस्थित थे।